science10th Chapter 9 Heredity and Evolution Class 10 Notes In Hindi

अध्याय - 9

 आनुवंशिकता एवं जैव विकास

आनुवंशिकी ( Genetics ) :
🔹 लक्षणों के वंशीगत होने एवं विभिन्नताओं का अध्ययन ही आनुवंशिकी कहलाता है
आनुवंशिकता / वंशागति :
🔹 विभिन्न लक्षणों का पूर्ण विश्वसनीयता के साथ वंशागत होना
विभिन्नता / विविधता :
🔹 यह जनक और संतति के लक्षणों की असमानता की अवस्था है
शारीरिक कोशिका विभिन्नता  ( Somatic ) Variation
🔹  यह शारीरिकी कोशिका में आती है
🔹  ये अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित नहीं होते 
🔹 जैव विकास में सहायक नहीं है  
🔹  इन्हें उपार्जित लक्षण भी कहा जाता है
👉  उदाहरण : कानों में छेद करना , कुत्तों में पूँछ काटना
जनन कोशिका विभिन्नता ( Gametic ) Variation
🔹 यह जनन कोशिका में आती है  
🔹 यह अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित होते हैं  
🔹 जैव विकास में सहायक हैं  
🔹 इन्हें आनुवंशिक लक्षण भी कहा जाता है  
👉 उदाहरण : मानव के बालों का रंग , मानव शरीर की लम्बाई

जनन के दौरान विभिन्नताओं का संचयन :

विभिन्नताएँ :
👉 अलैंगिक जनन ( Asexual Reproduction )
👉 लैंगिक जनन ( Sexual Reproduction )
अलैंगिक जनन ( Asexual Reproduction )
🔹 विभिन्नताएँ कम होंगी 
🔹 डी.एन.. प्रतिकृति के समय न्यून त्रुटियों के कारण उत्पन्न होती हैं

लैंगिक जनन ( Sexual Reproduction )
🔹 विविधता अपेक्षाकृत अधिक होगी 
🔹 क्रास संकरण के द्वारा , गुणसूत्र क्रोमोसोम के विसंयोजन द्वारा , म्यूटेशन ( उत्परिवर्तन ) के द्वारा
विभिन्नता के लाभ :
🔹 ( i ) प्रकृति की विविधता के आधार पर विभिन्नता जीवों को विभिन्न प्रकार के लाभ हो सकते हैं  
उदाहरण - ऊष्णता को सहन करने की छमता वाले जीवपणुओं को अधिक गर्मी से बचने की संभावना अधिक होती है
🔹  ( ii ) पर्यावरण कारकों द्वारा उत्तम परिवर्त का चयन जैव विकास प्रक्रम का आधार बनाता है  
🔹 स्वतंत्र ( Free earlabe ) एवं जुड़े कर्णपालि ( Attached ear lobe ) मानव समष्टि में पाए जाने वाले दो परिवर्त हैं
मेंडल का योगदान :
🔹 मेंडल ने वंशागति के कुछ मुख्य नियम प्रस्तुत किए  
🔹 मेंडल को आनुवंशिकी के जनक के नाम से जाना जाता है मैंडल ने मटर के पौधे के विपर्यासी ( 7 विकल्पी ) लक्षणों का अध्ययन किया जो स्थूल रूप से दिखाई देते हैं

                            

मेंडल द्वारा मटर के पौधे का चयन 
मेंडल ने मटर के पौधे का चयन निम्नलिखित गुणों के कारण किया
🔹 ( i ) मटर के पौधों में विपर्यासी विकल्पी लक्षण स्थूल रूप से दिखाई देते हैं  
🔹 ( ii ) इनका जीवन काल छोटा होता है
🔹 ( iii ) सामान्यतः स्वपरागण होता है परन्तु कृत्रिम तरीके से परपरागण भी कराया जा सकता है  
🔹 ( iv ) एक ही पीढ़ी में अनेक बीज बनाता है
I. एकल संकरण ( मोनोहाइब्रिड )
🔹 मटर के दो पौधों के एक जोड़ी विकल्पी लक्षणों के मध्य क्रास संकरण को एकल संकर क्रास कहा जाता है  
🔹 उदाहरण - लंबे पौधे तथा बौने पौधे के मध्य संकरण 
एकल संकरण Monohybrid Cross

अवलोकन
🔹 ( 1 ) प्रथम संतति F पीढ़ी में सभी पौधे लंबे थे
🔹 ( 2 ) F पीढ़ी में 3/4 लंबे पौधे वे 1/4 बौने पौधे थे 
🔹 ( 3 ) फीनोटाइप F - 3 : 1 ( 3 लंबे पौधे : 1 बौना पौधा
      जीनोटाइप F - 1 : 2 : 1 
      TT , Tt , tt का संयोजन 1 : 2 : 1 अनुपात में प्राप्त होता है  
निष्कर्ष :
🔹 1. TT Tt दोनों लंबे पौधे हैं , यद्यपि tt बौना पौधा है  
🔹 2. T की एक प्रति पौधों को लंबा बनाने के लिए पर्याप्त है जबकि बौनेपन के लिए t की दोनों प्रतियाँ tt होनी चाहिए  
🔹 T जैसे लक्षण प्रभावी लक्षण कहलाते हैं , t जैसे लक्षण अप्रभावी लक्षण कहलाते हैं  
II द्वि - संकरण द्वि / विकल्पीय संकरण ( Dihybrid Cross )
🔹 मटर के दो पौधों के दो जोड़ी विकल्पी लक्षणों के मध्य क्रास

👉 चित्रद्विसंकर क्रॉस के परिणाम जिनमें जनक दो जोड़े विपरीत विशेषकों में भिन्न थे जैसे बीच का रंग और बीच की आकृति
🔹F          गोल , पीले बीज    :    9 
                  गोल , हरे बीज       :    3
                  झुरींदार , पीले बीज :    3 
                  झुरींदार , हरे बीज   :    1 
इस प्रकार से दो अलग अलग ( बीजों की आकृति एवं रंग ) को स्वतंत्र वंशानुगति होती है  
लक्षण अपने आपको किस प्रकार व्यक्त करते हैं । 

लिंग निर्धारण :-

मानव में लिंग निर्धारण :-

🔹 आधे बच्चे लड़के एवं आधे लड़की हो सकते हैं सभी बच्चे चाहे वह लड़का हो अथवा लड़की अपनी माता से X गुणसूत्र प्राप्त करते हैं अत : बच्चों का लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें अपने पिता से किस प्रकार का गुणसूत्र प्राप्त हुआ है जिस बच्चे को अपने पिता से X गुणसूत्र वंशानुगत हुआ है वह लड़की एवं जिसे पिता से Y गुणसूत्र वंशागत होता है , वह लड़का होता है  
जैव विकास
विकास वह निरन्तर धीमी गति से होने वाला प्रक्रम जो हजारों करोड़ों वर्ष पूर्व जीवों में शुरू हुआ जिससे नई स्पीशीज का उद्भव हुआ  
स्थिति -1

निष्कर्ष :
🔹  हरे भुंगों को प्राकृतिक चयन का फायदा हुआ क्योंकि वे हरी झाड़ियों में दृश्य नहीं थे यह प्राकृतिक चयन कौओं द्वारा किया गया प्राकृतिक चयन भंग समष्टि में अनुकूल दर्शा रहा है जिससे समष्टि पर्यावरण में और अच्छी तरह से रह सके
स्थिति- II

निष्कर्ष :-
🔹 रंग परिवर्तन से अस्तित्व के लिए कोई लाभ नहीं मिला यह संयोग ही था कि दुर्घटना के कारण एक रंग की भुंग समष्टि बच गई जिससे समष्टि का स्वरूप बदल गया अत : छोटी समष्टि में दुर्घटनाएँ किसी जीन की आवृत्ति को प्रभावित कर सकती हैं जबकि उनका उत्तरजीविता हेतु कोई लाभ हो
स्थिति- III :-

निष्कर्ष :-
🔹 भृगों की जनसंख्या में कोई आनुवंशिक परिवर्तन नहीं आता जनसंख्या में प्रभाव कुछ समय के लिए पर्यावरण के कारण आया था  
उपार्जित एवं आनुवंशिक लक्षण :-
उपार्जित लक्षण :-
🔹 1. ये लक्षण जीवों द्वारा अपने जीवन में प्राप्त किये जाते हैं  
🔹 2. ये जनन कोशिकाओं के डी.एन.. ( DNA ) में कोई अंतर नहीं लाते अगली पीढ़ी को वंशानुगत / स्थानान्तरित नहीं होते  
🔹 3. जैव विकास में सहायक नहीं है  
🔹 उदाहरणअल्प पोषित भंग के धार में कमी
आनुवंशिक लक्षण :-
🔹 1. ये लक्षण जीवों की वंशानुगत प्राप्त होते हैं  
🔹 2. ये जनन कोशिकाओं में घटित होते हैं तथा अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित होते हैं  
🔹 3. जैव विकास में सहायक है  
🔹 उदाहरणमानव के आँखों बालों के रंग

जाति उद्भव किस प्रकार होता है ?

1. जीन प्रवाह :- उन दो समष्टियों के बीच होता है जो पूरी तरह से अलग नहीं हो पाती है किंतु आंशिक रूप से अलग - अलग हैं

2. आनुवंशिक विचलन :- किसी एक समष्टि की उत्तरोत्तर पीढ़ियों में जींस की बारंबरता से अचानक परिवर्तन का उत्पन होना  
3. प्राकृतिक चुनाव :- वह प्रक्रम जिसमें प्रकृति उन जीवों का चुनाव कर बढ़ावा देती है जो बेहतर अनुकूलन करते हैं  
4. भौगोलिक पृथक्करण :-जनसंख्या में नदी , पहाड़ आदि के कारण आता है इससे दो उपसमष्टि के मध्य अंतर्जनन नहीं हो पाता  

आनुवंशिक विचलन :-

विकासीय संबंध योजना :-
1. समजात अभिलक्षण :-
🔹 विभिन्न जीवों में यह अभिलक्षण जिनकी आधारभूत संरचना लगभग एक समान होती है यद्यपि विभिन्न जीवों में उनके कार्य भिन्न - भिन्न होते हैं  
🔹 उदाहरण :- पक्षियों , सरीसृप , जल - स्थलचर , स्तनधारियों के पदों की आधारभूत संरचना एक समान है , किन्तु यह विभिन्न कशेरूकी जीवों में भिन्न - भिन्न कार्य के लिए होते हैं
🔹 समजात अंग यह प्रदर्शित करते हैं कि इन अंगों की मूल उत्पत्ति एक ही प्रकार के पूर्वजों से हुई है जैव विकास का प्रमाण देते हैं  
2. समरूप अभिलक्षण :-
🔹 वह अभिलक्षण जिनकी संरचना संघटकों में अंतर होता है , सभी की उत्पत्ति भी समान नहीं होती किन्तु कार्य समान होता है  
🔹 उदाहरण :- पक्षी के अग्रपाद एवं चमगादड़ के अग्रपाद  
🔹 समरूप अंग यह प्रदर्शित करते हैं कि जन्तुओं के अंग जो समान कार्य करते हैं , अलग - अलग पूर्वजों से विकसित हुए हैं  
3. जीवाश्म :-
🔹 जीव के परिरक्षित अवशेष जीवाश्म कहलाते हैं उदाहरण - जैसे कोई मृत कीट गर्म मिट्टी में सूख कर कठोर हो जाए  
🔷 उदाहरण 

 
🔹   आमोनाइट      -      जीवाश्मअकशेरूकी
 🔹  ट्राइलोबाइट      -      जीवाश्म - अकशेरूकी 
 🔹 नाइटिया           -      जीवाश्म - मछली 
 🔹 राजोसौरस        -      जीवाश्म - डाइनोसॉर कपाल 

जीवाश्म कितने पुराने हैं
🔹 1. खुदाई करने पर पृथ्वी की सतह के निकट वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए होते हैं  
🔹 2. फॉसिल डेटिंग :- जिसमें जीवाश्म में पाए जाने वाले किसी एक तत्व के विभिन्न समस्थानिकों का अनुपात के आधार पर जीवाश्म का समय निर्धारण किया जाता है  

विकास एवं वर्गीकरण
🔹  विकास एवं वगीकरण दोनों आपस में जुड़े हैं
🔹  1. जीवों का वर्गीकरण उनके विकास के संबंधों का प्रतिबिंब है  
🔹 2. दो स्पीशीज के मध्य जितने अधिक अभिलक्षण समान होंगे उनका संबंध भी उतना ही निकट का होगा  
🔹 3. जितनी अधिक समानताएँ उनमें होंगी उनका उद्भव भी निकट अतीत में समान पूर्वजों से हुआ होगा  
🔹 4. जीवों के मध्य समानताएँ हमें उन जीवों को एक समूह में रखने और उनके अध्ययन का अवसर प्रदान करती हैं
विकास के चरण
🔹  विकास क्रमिक रूप से अनेक पीढ़ियों में हुआ
I. योग्यता को लाभ
   🔹 आँख का विकास – जटिल अंगों का विकास डी.एन.. में मात्र एक परिवर्तन द्वारा संभव नहीं है , ये क्रमिक रूप से अनेक पीढ़ियों में होता है  
🔹 प्लैनेरिया में अति सरल आँख होती है  
🔹 कीटों में जटिल आँख होती है  
🔹 मानव में द्विनेत्री आँख होती है

II . गुणता के लाभ 
   
🔷 पंखों का विकास
🔹 पंख ( पर ) -ठंडे मौसम में ऊष्मारोधन के लिए विकसित हुए थे , कालांतर में उड़ने के लिए भी उपयोगी हो गए
🔹 उदाहरणडाइनोसॉर के पंख थे , पर पंखों से उड़ने में समर्थ नहीं थे पक्षियों ने परों को उड़ने के लिए अपनाया  

कृत्रिम चयन :-
🔹 बहुत अधिक भिन्न दिखने वाली संरचनाएं एक समान परिकल्प में विकसित हो सकती है दो हजार वर्ष पूर्व मनुष्य जंगली गोभी को एक खाद्य पौधे के रूप में उगाता था तथा उसने चयन द्वारा इससे विभिन्न सब्जियाँ विकसित की इसे कृत्रिम चयन कहते हैं

आण्विक जातिवृत
🔹 ( i ) यह इस विचार पर निर्भर करता है कि जनन के दौरान डी.एन.. में होने वाले परिवर्तन विकास की आधारभूत घटना है  
🔹 ( ii ) दूरस्थ संबंधी जीवों के डी.एन.. में विभिन्नताएँ अधिक संख्या में संचित होंगी

मानव विकास :-

आनुवंशिकी परिभाषाएँ 

1. जीन :- मेंडल ने जीन को ' कारक ' अथवा ' फैक्टर ' कहा जीन आनुवंशिकता की इकाई है

2. युग्म विकल्पी ( अलील ) :– विकल्पी विपरीत लक्षणों के संकेतक जोड़े को युग्म विकल्पी ( अलील ) कहा जाता है ये एक ही जीन के थोड़ा सा भिन्न रूप होते हैं
3. विषमयुग्मजी ( हैटरोजाइगस ) :- वे जीव जिनमें विपरीत विशेषकों के अलील होते हैं Tt.
4. समयुग्मजी ( होमोजाइगस ) :- वे जीव जिनमें समान विशेषकों के अलील होते हैं जैसे— TT , tt

5. प्रभाविता ( डोमिनेंस ) :- वह जीन जो F , पीढ़ी में प्रकट होता है  
6. अप्रभावी ( रेसिसिव ) :- वह जीन जो प्रभावी जीन के समक्ष प्रकट नहीं होता  
7. जीनी प्ररूप ( जीनोटाइप ) :- जीव का जीन वे आधार पर प्रारूप ; जैसे— TT या tt . 
8. दृश्य प्ररूप ( फीनोटाइप ):- जीव का बाहरी दृश्य के आधार पर प्ररूप ; जैसेलंबे पौधे , बौने पौधे  
9. सूक्ष्म विकास :- छोटे क्षेत्र में होने वाला विकास उदाहरणभुंगों ( beetles ) के शरीर के रंग में परिवर्तन
10. स्पीशीज :- जनसंख्या में समान जीवों का समूह जो आपस में निषेचन कर , उत्पादक जीव बनाता है  
11. गुणसूत्र :- धागे जैसी संरचनाएँ जो कोशिका के केन्द्र में पाई जाती हैं , जिसमें कोशिका की आनुवंशिक सूचना होती है  
12. डी.एन.. :- डी आक्सी - राइबोज न्यूक्लिक अम्ल , यह गुणसूत्र में उपस्थित होता है

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