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science10th Chapter 4 Carbon and its Compounds Class 10 Notes In Hindi
📚 अध्याय - 4 📚
कार्बन एवं उसके यौगिक
कार्बन :-
🔹 कार्बन आधातु है इसका प्रतीक ' C ' है । सर्वतोमुखी तत्व कार्बन भूपर्पटी में खनिजों के रूप में 0.02 % तथा वायुमंडल में कार्बन डाइ - ऑक्साइड के रूप में 0.03 % उपस्थित है । सभी सजीवों - पौधे और जन्तुओं का शरीर कार्बन यौगिकों का बना होता है ।
🔹 कार्बन के दो अपरूप होते है ।
1 . हीरा
2 . ग्रेफाइट
ग्रेफाइट ( Graphite ) :-
🔹 प्रत्येक कार्बन अणु तीन अन्य कार्बन अणुओं से उसी तल में बने हैं जिससे षटकोणीय व्यूह मिलता है | इनमें से एक आबंध द्विआबंध होता है | इस प्रकार कार्बन की संयोजकता संतुष्ट हो जाती है | ग्रेफाइट विद्युत का एक बहुत ही अच्छा सुचालक है जबकि अन्य अधातु सुचालक नहीं होते हैं |
हीरा ( diamond ) :-
🔹 प्रत्येक कार्बन परमाणु कार्बन के ही अन्य चार परमाणुओं से जुड़ कर एक कठोर तीन विमाओं वाला संरचना बनाता है । हीरा अब तक का ज्ञात सर्वाधिक कठोर पदार्थ जबकि ग्रेफाइट चिकना तथा फिसलनशील होता है | शुद्ध कार्बन को अत्यधिक उच्च दाब एवं ताप पर उपचारित ( subjecting ) हीरे को संश्लेषित किया जा सकता है । ये संश्लिष्ट हीरे आकार में छोटे होते हैं , लेकिन अन्यथा ये प्राकृतिक हीरों से अभेदनीय होते हैं ।
कार्बन में सह संयोजी आबंध :-
🔹 कार्बन की परमाणु संख्या = 6
🔹 इलेक्ट्रानिक विन्यास C(6) =
K L
2 4
कार्बन उत्कृष्ट गैस विन्यास कैसे प्राप्त करता है ?
🔹 कार्बन चर्तुसंयोजी है । कार्बन न तो चार इलेक्ट्रॉन खोकर ( C⁴⁺ धनायन ) न ही चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर ( C⁴⁻ ऋणायन ) आयनिक आबंध बनता । चार अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनो को धारण करना कार्बन के लिए अत्यंत कठिन है । कार्बन द्वारा चार इलेक्ट्रॉन खोने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी । इसीलिए कार्बन अपने अन्य परमाणु अथवा अन्य तत्वों के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के साथ साझेदारी कर आबंध बनता है ।
🔹 एक ही प्रकार या विभिन्न प्रकार के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बने आंबध को सह - संयोजी आबंध कहते हैं ।
🔹 कार्बन के अतिरिक्त के परमाणु हाइड्रोजन , ऑक्सीजन नाइट्रोजन और क्लोरीन भी इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से आबंध बनाते हैं ।
सहसंयोजी यौगिकों के भौतिक गुण :-
🔹 1. सह - संयोजी यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं क्योंकि इनके बीच अन्तराअणुक बल बहुत कम होता है ।
🔹 2. सह संयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक होते है क्योंकि इन यौगिको के आंवध में किसी प्रकार के आयन का निर्माण नहीं होता है । ये इलेक्टोनों की साझेदारी से बनते है ।
कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति :-
( 1 ) श्रृंखलन :-
🔹 कार्बन कार्बन परमाणुओं के बीच सहसंयोजी आबंध बनाकर लम्बी श्रृंखला , शाखित , श्रृंखला और वलय संरचना वाले भौगिकों का निर्माण करता है । कार्बन के परमाणु एक - दूसरे से एकल , द्वि या त्रि आंबध द्वारा जुड़े हो सकते हैं ।
( 2 ) चतु : संयोजकता :-
🔹 कार्बन परमाणु की संयोजकता 4 है । जिसके कारण कार्बन चार अन्य कार्बन परमाणु ; एक संयोजी परमाणु ( H , Cl ) ऑक्सीजन , नाइट्रोजन और सल्फर के साथ आबंध बना सकता है ।
संतृप्त और असंतृप्त कार्बनिक यौगिक :-
🔹 कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिकों को हाइड्रोजन कहते हैं ।
इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना :-
🔹 संतृप्त हाइड्रोकार्बन -
एथेन C₂H₆ :
संतृप्त हाइड्रोकार्बन के नाम आण्विक सूत्र तथा संरचनात्मक सूत्र
इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना :-
🔹 असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
विषम परमाणु :-
🔹 हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में यह तत्व एक या अधिक हाइड्रोजन को इस प्रकार प्रतिस्थापित करते हैं कि कार्बन की संयोजकता संतुष्ट रहती है । ऐसे तत्वों को विषम परमाणु कहते हैं ।
प्रकार्यात्मक समूह :-
🔹 यह विषम परमाणु या विभिन्न परमाणुओं का समूह जो कार्बन यौगिकों को अभिक्रियाशील तथा विशिष्ट गुण प्रदान करते हैं , प्रकार्यात्मक समूह कहलाते हैं ।
समजातीय श्रेणी :-
🔹 यौगिकों की वह शृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन एक ही प्रकार के प्रकार्यात्मक समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है ।
🔹 उदाहरण एल्कोहल CH₃OH, C₂H₅OH, C₃H₇OH, C₄H₉OH
समान सामान्य सूत्र :-
🔹 समजातीय श्रेणी के उत्तरोतर सदस्यों में ₋CH₂ का अंतर तथा 14μ द्रव्यमान इकाई का अंतर होता है ।
🔹 समान रासायनिक गुणधर्म तथा अणु द्रव्यमान बढ़ने से भौतिक गुण धर्मों में भिन्नता आती है ।
कार्बन यौगिको की नाम प ति :-
🔹 यौगिक में कार्बन परमाणुओं की संख्या ज्ञात करो
🔹 प्रकार्यात्मक समूह को पूर्वलग्न या अनुलग्न के साथ दर्शाओं
कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म :-
दहन :-
🔹 कार्बन तथा उसके यौगिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि दहन पर प्रचुर मात्रा में उष्मा और प्रकाश मुक्त करते हैं ।
🔹 संतृप्त हाइड्रोकार्बन वायु की उपस्थिति में जलने पर नीली स्वच्छ ज्वाला उत्पन्न करते हैं ।
🔹 असंतृप्त हाइड्रोकार्बन दहन करने पर धुएँ वाली पीली ज्वाला उत्पन्न करते हैं क्योंकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में कार्बन की प्रतिशत मात्रा संतृप्त हाइड्रोकार्बन से अधिक होती है और वायु की उपस्थिति में कार्बन का पूर्ण उपचयन नहीं हो पाता ।
ऑक्सीकरण
🔹 क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) या अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट ( K₂Cr₂O₇) की उपस्थिति में एल्कोहल कार्बोक्सिलिक अम्ल में परिवर्तित होते हैं ।
🔹 पैलेडियम या निकेल जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते हैं ।
🔹 वनस्पति तेलों से वनस्पति घी का निर्माण इस विधि द्वारा किया जाता है ।
प्रतिस्थापन अभिक्रिया :-
कुछ महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल :-
एथेनॉल के भौतिक गुणधर्म :-
🔹 रंगहीन गंध और जलने वाला स्वाद
🔹 जल में घुलनशील
🔹 वाष्पशील द्रव जिसका क्वथनांक 351K
🔹 उदासीन प्रकृति
रासयनिक गुण धर्म :-
I. सोडियम के साथ अभिक्रिया -
हाइड्रोजन गैस की उत्पति से एथेनॉल की जाँच इस अभिक्रिया द्वारा की जा सकती है ।
II . निर्जलीकरण -
एथेनॉइक अम्ल ( एसीटिक अम्ल ) भौतिक गुणधर्म :-
🔹 रंगहीन द्रव , स्वाद में खट्टा , सिरके जैसी गंध
🔹 क्वथनांक 391K
🔹 शुद्ध एथेनॉइक अम्ल शीतलन करने पर बर्फ की तरह जम जाता है इसीलिए इसे ग्लैशल एसीटिक अम्ल कहते हैं ।
रासायनिक गुणधर्म :-
I. एस्टरीकरण
III कार्बोनेट तथा हाइड्रोजन कार्बोनेट से अभिक्रिया :-
2CH₃COOH + Na₂CO₃→ 2CH₃COONa + H₂0 + CO₂
CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂0 + CO₂
( सोडियम एसीटेट )
साबुन और अपमार्जक :-
🔹 साबुन लम्बी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम पोटैशियम लवण होते हैं ।
उदाहरण - C₁₇H₃₅COONa₊
🔹 साबुन केवल मृदु जल में सफाई किया करते हैं ।
अपमार्जक -
🔹 लम्बी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के अमोनियम या सल्फोनेट लवण होते हैं ।
🔹 अपमार्जक कठोर एवं मृदु जल में सफाई किया करते हैं ।
साबुन अणु में :-
🔹 1. जलरागी सिरा ( आयनिक भाग )
🔹 2. जलविरागी सिरा ( लम्बी हाइड्रोकार्बन शृंखला )
साबुन अणु की संरचना :-
🔹 साबुन की सफाई प्रक्रिया
🔹 मैल तैलीय होते हैं । जलविरागी सिरा तेल में घुल जाता है और जलरागी सिरों के चारों तरफ पानी से घिर जाता है । इससे मिसेली संरचना बन जाती है ।
🔹 साबुन का मिसेल मैल को पानी में घुलाने में मदद करता है और कपड़े साफ हो जाते हैं ।
🔹 साबुन कठोर जल में उपस्थित मैगनीशियम तथा कैल्शियम के लवण के साथ अभिक्रिया करके अघलुनशील पदार्थ स्कम बनाता है । यह स्कम सफाई प्रक्रिया में बाधा डालता है ।
🔹 अपमार्जक का उपयोग करके कठोर जल में सफाई प्रक्रिया प्रभावशाली कठोर नल में उपस्थित मैगनीशियम तथा कैल्शियम आयनों के साथ अघुलनशील स्कम नहीं बनता ।
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