तरंग प्रकाशिकी Wave Optics
12th notes in hindi
हाइगेन्स का तरंग सिद्धान्त (Wave theory of hedges) , तरंगाग्र के प्रकार , परिभाषा
प्रश्न 1 : हाइगेन्स का तरंग सिद्धान्त लिखिए इस सिद्वान्त से प्रकाश का संचरण समझाइये तरंग्राग के प्रकार लिखिए?
उत्तर : हाइगेन्स का तरंग सिद्धान्त (Wave theory of
hedges) :- हाइगेन के अनुसार किसी स्त्रोत से प्रकाश तरंगाग्र के रूप में चलता है तरंगाग्र का प्रत्येक बिन्दु स्त्रोत की तरह कार्य करता है। जिससे द्वितीयक तरंगी निकलती है। प्रकाश के संचरण को प्रदर्शित करने के लिए माना कि ै एक बिन्दु स्त्रोत है और किसी क्षण गोला नम्बर 1 तरग्रांग की स्थिति बतलाता है , t समय पश्चात नये तरंगाग्र कि स्थिति ज्ञात करने के लिए तरंगांग्र के प्रत्येक बिन्दु को केन्द्र मानकर ct त्रिज्या का चाप लेकर गोले खिचते है। इन गोलो को मिलाता हुआ उभनिष्ट पृष्ठ गोला नम्बर 2 नये तरंगाग्र की स्थिति को बतलाता है। इस प्रकार तरंग्राग्र माध्यम में आगे बढ़ते जाते है और अन्त में समतल तरंगाग्र हो जाते है। तरंग्राग्र के लम्बवत खिची हुई रेखा को किरण कहते है इसी दिशा में प्रकाश ऊर्जा का संचरण होता है।
चित्र
तरंगाग्र के प्रकार (Types of wave):-
1. गोलीय तरंगाग्र:- यदि स्त्रोत बिन्दु आकार का है और स्त्रोत से दूरी कम है तो प्राप्त तरंगाग्र गोलीय होते है।
2. बेलनाकार तरंगाग्र:- यदि स्त्रोत रेखा के रूप में है और स्त्रोत से दूरी कम है तो प्राप्त तरंगाग्र बैलनाकार होते है।
3. समतल तरंगाग्र:- यदि स्त्रोत बिन्दु आकार का अथवा रेखीय रूप में है और स्त्रोत से दूरी ज्यादा है तो प्राप्त तरंगा्रग समतल होते है।
चित्र
तरंगाग्र की परिभाषा दीजिए (Definition
of waveform)-
तरंग गति में तरंगाग्र ऐसे बिन्दुओं का समूह हैं जो सभी समान कला में होते है।
डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect) , व्यतिकरण (Interruption) in hindi
प्रश्न 1 : डॉप्लर प्रभाव किसे कहते हैं आवृति में परिवर्तन का सूत्र दीजिए अभिरक्त और नीला विस्थापन समझाइये।
उत्तर : डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect):- यदि प्रकाश स्त्रोत अथवा प्रेक्षक गतिशील है तो प्रेक्षक को स्त्रोत की आवृति एवं तरंगद्र्वध्र्य परिवर्तित प्रेक्षित होते है। इस घटना को डाॅप्लर प्रभाव कहते है। तरंग दैध्र्य अथवा आवृति मे जितना परिवर्तन होता हैं उसे डाॅप्लर विस्थापन कहते है।
सूत्र
अभिरक्त विस्थापन (Abundant
Displacement) – यदि तारा, ग्रह निहारिका पृथ्वी से दूर जा रही है तो प्रेक्षित प्रकाश की आवृति में कमी और तरंग द्वैध्र्य में वृद्वि हो जाती है यानि की तरंग द्वैध्र्य मे विस्थापन लाल रंग की ओर होता है इसे अभिरक्त विस्थापन कहते है।
नीला विस्थापन – यदि तारा, ग्रह, निहारिका पृथ्वी के नजदीक आ रही है तो प्रेक्षित प्रकाश की आवृत्ति में वृद्वि और तरंगद्वैध्र्य मे कमी हो जाती है। यानि की तरंगद्धैध्र्य में विस्थापन नीले रंग कीओर होता है। इसे नीला विस्थापन कहते है।
प्रश्न 2 : व्यातिकरण किसे कहते है व्यातिकरण की शर्तें लिखिए।
उत्तर : व्यतिकरण (Interruption):- अध्यारोपण की घटना में किसी बिन्दु पर परिणामी विस्थापन के अधिकत अथवा न्यूनतम होने की घटना को व्यातिकरण कहते है।
शर्ते:-
1. दोनों स्त्रोत कला समबद्व होने चाहिए।
कला सम्बद्व:- यदि दोनों स्त्रोतों से प्राप्त तरंगो मे कलान्तर समय के साथ नियत रहता है तो स्त्रोत कलासम्बद्व कहलाता है।
2. दोनो तरंगो की तरंगद्वैध्र्य समान होनी चाहिए।
3. व्यतिकरण को स्पष्ट देखने के लिए दोनों तरंगों के आयाम भी समान होने चाहिए।
विवर्तन की परिभाषा क्या है , व्यतिकरण और विवर्तन में अन्तर , प्रकाश का विवर्तन किसे कहते है , diffraction of light in hindi
diffraction of light in hindi , विवर्तन की परिभाषा क्या है , व्यतिकरण और विवर्तन में अन्तर , प्रकाश का विवर्तन किसे कहते है ?
प्रश्न 1 : विवर्तन किसे कहते है विवर्तन के लिए आवश्यक शर्तें लिखिए प्रकृति में प्रकाश का विवर्तन ध्वनि की अपेक्षा क्यों अपेक्षित नहीं होता।
उत्तर : विवर्तन (Diffraction):- अवरोध की ज्यामिती छाया में प्रकाश के पहुचने की घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते है। अवरोध के किनारों से तरंग के मुड़ने को विवर्तन कहते है।
शर्तें:- विवर्तन के लिए आवश्यक शर्त है कि अवरोध अथवा छिद्र का आकार तरंग दैध्र्य की कोटि का होना चाहिए।
ध्वनि की तरंग द्वैध्र्य अधिक होने के कारण ध्वनि का विवर्तन आसानी से प्रकृति में प्रेक्षित होता है। परन्तु प्रकाश की तरंगद्र्वध्र्य अतिअल्प होने के कारण प्रकाश का विवर्तन हमें प्रकृति में प्रेक्षित नहीं होता क्योंकि प्रकृति में अवरोध अथवा छिद्र प्रकाश के तरंग देध्र्य की तुलना में कही अधिक बड़े होते है।
प्रश्न 2 : व्यतिकरण और विवर्तन में अन्तर लिखिए।
उत्तर : Differences in interference and diffraction
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व्यतिकरण (Interruption) |
विवर्तन (Diffraction) |
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यह दो कलासम्बद्व स्त्रोतों से प्राप्त तरंगो के अध्यारोपण से होता है। |
एक ही स्त्रोत के विभिन्न बिन्दुओं से प्राप्त तरंगो के अध्यारोपण से यह घटना होती है। |
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व्यतिकरण में प्राप्त फ्रिन्जे समान चैड़ाई और समान चमक की होती है। |
विवर्तन में प्राप्त फ्रिन्जे असमान चैड़ाई और असमान चमक की होती है। |
प्रकाश का विवर्तन
यदि किसी प्रकाश-स्त्रोत व पर्दे के बीच कोई अपारदर्शी अवरोध रख दिया जाए, तो हमें पर्दे पर अवरोध की स्पष्ट छाया दिखलायी पड़ती है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रकाश का संचरण सीधी रेखा में होती है। लेकिन यदि अवरोध का आकार बहुत छोटा हो, तो प्रकाश अपने सरल रेखीय संचरण से हट जाता है, वह अवरोध के किनारों पर मुड़कर छाया में प्रवेश कर जाता है। प्रकाश के इस प्रकाश अवरोध के किरानों पर थोड़ा मुडकर उसकी छाया में प्रवेश करने की घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते है। विवर्तन के कारण अवरोध की छाया के किनारे तीक्ष्ण नही होते हैं। प्रकाश के विवर्तन के कारण ही दूरदर्शी मे तारों के प्रतिबिम्ब तीक्षण बिन्दुओं की तरह दिखायी न देकर अस्पष्ट धब्बों की तरह दिखायी देते है। प्रकाश का विवर्तन अवरोध के आकार पर निर्भर करता है। यदि अवरोध का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की कोटि का है, तो विवर्तन स्पष्ट होता है और यदि अवरोध का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत बड़ा है, तो विवर्तन उपेक्षाणीय होता है।
प्रकाश का विवर्तन इसके तरंग प्रकृति की पुष्टि करता है। ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य प्रकाश के तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक होती है, इस कारण से ध्वनि तरंगों में विवर्तन की घटना आसानी से देखने को मिलती है। ध्वनि तरंगे अवरोधों पर आसानी से मुड़कर हमें सुनाई देती है, जबकि प्रकाश तरंगों का तरंगदैर्ध्य हमारे जीवनोपयोगी वस्तुओं के आकार की तुलना में बहुत छोटी होती है, जिसके कारण हमें प्रकाश के विवर्तन की घटना साधारणतया देखने को नही मिलती है।
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