संचार व्यवस्था कक्षा १२ के नोट्स हिंदी में Communication Systems 12th notes hindi
मॉडुलन की परिभाषा क्या है , आवश्यकता तथा प्रकार modulation definition & types in hindi
modulation definition & types in hindi , मॉडुलन की परिभाषा क्या है , आवश्यकता तथा प्रकार ?
प्रश्न 1 : मॉडुलन किसे कहते है इसकी आवश्यकता समझाइये माॅडुलन के प्रकार लिखिए और इन्हें तंरग चित्र में प्रदर्शित कीजिए?
उत्तर : मॉडुलन (Modulation):- संदेश सिग्नल निम्न आवृत्ति के होते है। जिन्हें अधिक दूरी तक प्रेषित करना सम्भव नहीं है इसलिए इन्हंें उच्च आवृत्ति की वहक तरंगों पर अध्यारोपित कराते है। इस प्रक्रिया को माॅडुलन कहते है।
माॅडुलन की आवश्यकता:–
1. ऐन्टिना की लम्बाई – सिग्नल को प्रभावी रूप से विकृत करने केलिए ऐन्टिना की लम्बाई कम से कम 2/4 होनी चाहिए। संदेश सिग्नल की तरंग द्धैध्र्य कई किलो मीटर में होती है। इसलिए एन्टिना की लम्बाई किलो मीटर में लेनी होगी। इतना बड़ा ऐन्टिना ऊँचाई पर लगाना सम्भव नहीं है। इसलिए आवृत्ति में वृद्धि करना जरूरी है।
2. विकृति शक्ति:- किसी ऐन्टिना से विकरीत शक्ति का मान 1/ λ2 के समानुपाती होता है। इसलिए शक्ति का मान अधिक हो इसके लिए जरूरी है कि λ का मान कम होना चाहिए।
3. सिग्नल में विभेद करना:- यदि सभी स्टेशनों से लगभग समान आवृत्ति के संदेश, सिग्नल प्रेक्षित किए जायेगें तो अभिग्राही पर इनमें विभेद करना सम्भव नहीं होगा। इसलिए प्रत्येक स्टेशन को अलग अलग आवृत्ति की बेण्ड चैड़ाई आवंटित कर दी जाती है इसलिए सिग्नल में माॅडूलन करना आावश्यक है।
माॅडूलन के तीन प्रकार है –
1. आयाम माॅडुलन (ए.एम AM) : इसमें वाहक तरंग के आयाम में संदेश सिग्नल के आयाम के अनुसार परिवर्तित करते है।
डाइग्राम
2. आवृति माॅडुलन (एफ.एम FM) वाहक तरंग की आवृति में सदेश सिग्नल के आयाम के अनुसार परिवर्तन होता है।
डाइग्राम
3. कला माॅडुलन या पल्स माॅडुलन (पी.एम PM) – वाहक तरंग की आवृत्ति में संदेश सिंग्नल की कला के अनुसार परिवर्तन होता है।
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण की विधियाँ , भू-तरंग , व्योम , आकाश तरंग संचरण
प्रश्न 1 : विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण की विधियाँ समझाइये।
उत्तर : विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण की विधियाँ निम्न है ’
1. भू-तरंग संचरण:- कम आवृत्ति की तरंगों के प्रेषक के लिए ऐन्टिना की लम्बाई अधिक लेनी पडती है। ऐसे ऐन्टिना पृथ्वी सें ज्यादा ऊचाई पर लगाना सम्भ्ज्ञव नहीं है ये कम ऊँचाई पर स्थित होते है इनसे चलने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंगे पृथ्वी के पृष्ठ के सहारे चलती है ये पृथ्वी में विद्युत धारा उत्पन्न करती है। इसलिए पृथ्वी इनका अवशोषण करती रहती है अतः इस विधि से ज्यादा दूरी तक तरंगों का सम्प्रेषण सम्भव नहीं है।
2. व्योम संचरण विधि – इस विधि में तरंगों को आकाश की ओर भेजते है। जब ये तरंगे आयन मण्डल में पहुंचती है। तो आयन मण्डल इनको परावर्तित कर देता है। पुनः पृथ्वी द्वारा परावर्तित तरंगे आयन मण्डल की ओर जाती है। और वहाँ से परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर आ जाती है इस प्रकार बार बार परावर्तन से काफी दूरी तक तरंग भेजी जा सकती है। इस विधि से 30 मेधाहर्टज से ज्यादा आवृत्तियों का सम्प्रेषण नहीं कर सकते। क्येांकि इससे अधिक आवृत्ति की तरंगे आयन मण्डल को पार कर जाती है पृथ्वी पर नहीं लौटती है आयन मण्डल की ऊँचाई 65 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होतीहै। आयन मण्डल में आयन और इलेक्ट्रान प्रचुर मात्रा में पाये जाते है। इनका निर्माण सूर्य से प्राप्त उच्च ऊर्जा में पाये जाते है। पराबैंगनी, तरंगों के गैस के अणुओं से टकराने से होता है ये गैंस के अणु आयनित हो जाते है और आयन मण्डल का निर्माण करते है।
3. आकाश तरंग संचरण:- इस विधि से 40 मेगाहर्टज से अधिक आवृतियों का सम्प्रेषण करते है। टाॅवर पर लगे ऐन्टिना द्वारा इन तरंगों का सम्प्रेषण करते है। पृथवी गोल होने के कारण दृष्टि रेखीय तरंगे ज्यादा दूरी तक नहीं पहुच पाती है यदि प्रेषित टाॅवर की ऊँचाई एच टी (Ht) और अभिग्राही टाॅवर की ऊँचाई एचआर है।
संचार उपग्रह भी आकाश तरंग संचरण विधि में काम आता है। प्रेषित तंरगे आयन मण्डल को पार करके संचार उपग्रह के अभिग्राही तक पहुचती है यहाँ प्रवृर्धित करके पृथ्वी पर पुनः भेज दी जाती है
निम्न की परिभाषा क्या है definitions in communication system physics
निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए अथवा समझाइये?
उत्तर : 1. ट्रांसड्यूसर (Transducer):- यह ऐसी युक्ति है जो ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित करती है जैसे माइक्रोफोन ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलता है। फोटो डायोड प्रकाशीय सिग्नल को विद्युत सिग्नल में बदलता है।
2. सिग्नल (Signal):– सूचना को विद्युत रूप में रूपान्तरित करने पर सिग्नल प्राप्त होते है ये दो प्रकार के होते है।
1. अनुरूप सिग्नल
2. अंकीय सिग्नल
3. मॉडुलन (Modulation):-संदेश सिग्नल की आवृत्ति कम होतीहै। अतः इन्हें उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों पर अध्यारोपित कराते है। इस प्रक्रिया को माडुलन कहते है।
4. परास:- प्रेषित्र से वह अधिकतम दूरी जहाँ पर सिग्नल पर्याप्त प्रबलता से प्राप्त किए जा सकते है परास कहते है।
5. बैंड चौड़ाई (Band width):- न्यूनतम आवृत्ति से अधिकतम आवृत्ति के अन्तर को बैण्ड चैड़ाई कहते है। जिस पर कोई उपकरण संचालित होता है अथवा सिंग्नल में ये आवृत्तिया निनिहत होता है।
6. क्षीणता (Weakness):- दूरी के साथ साथ सिग्नल की तीव्रता अथवा प्रबलता में कमी होती जाती है इस कमी को क्षीणता कहते है।
7. विमॉडुलन:- चैनल से प्राप्त सिग्नल में से वाहक एवं अवांछनिय सिग्नल को अलग हटाने की प्रक्रिया को विमाडुलन कहते है जो अभिग्राही ये सम्पन्न होता है।
8. परावर्तक (Reflector):- यह ऐसी युक्ति है जो सिग्नल को ग्रहण करके और उन्हें प्रवर्धित करके उन्हें चैनल को प्रेषित कर देती है। जैसे संचार उपग्रह सिग्नल को ग्रहण करके एवं प्रवर्धित करके पुनः पृथ्वी पर भेज देता है।
9. प्रवर्धन (Amplification):- सिग्नल के आयाम में वृद्वि करने को प्रवर्धन कहते है।
संचार व्यवस्था की परिभाषा क्या है तथा प्रकार Communication system in hindi
प्रश्न 1 : संचार व्यवस्था की परिभाषा दीजिए इसका खण्ड चित्र बनाकर मुख्य भागों कीकार्यविधि समझाइये?
ans : संचार व्यवस्था (Communication
system):-सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की व्यवस्था को संचार व्यवस्था कहते है।
इसके मुख्य भाग निम्न है:-
1. प्रेषित
2. चैनल
3. अभिग्राही
खण्ड चित्र – डाइग्राम
संदेश सिग्नल को सीधे ही प्रेषित करना सम्भव नहीं है। क्योंकि ये अधिक दूरी तक नहीं जा सकते है। संदेश सिग्नल को प्रेषित में भेजते है। प्रेषित्र को कार्य संदेश सिग्नल को प्रेशन योग्य बनाता है। जिसके लिए संदेश सिग्नल में वांछित परिवर्तन किये जाते है। प्रेषित्र से प्राप्त सिग्नल को चैनल में भेजा जाता है। चैनल एक ऐसा भौतिक माध्यम है जो प्रेषित और अभिग्राही को जोड़ता है संचार व्यवस्था के आधार पर यहा तार केवल अथवा खुला आकाश हो सकता है। चैनल से प्राप्त सिंग्नल अभिग्राही में भेजे जाते है। अभिग्राही का मुख्य कार्य वाहक तंरग और अवांछनीय सिग्नल को दूर करके मूल रूप में सूचना को प्राप्त करना है इस प्रकार मूल सूचना उपयोगकर्ता को प्रदान कर दी जाती है।
प्रश्न 2 : संचार व्यवस्था कितने प्रकार की है उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर : संचार व्यवस्था दो प्रकार की है।
1. बिन्दु से बिन्दुव्त संचार व्यवस्था:- इसमें प्रेषित्र का सम्बन्ध केवल एक अभिग्राही से होता है चैनल के रूप में तार अथवा केबल काम में लेते है जैसे – टेलीफोन, टेलीग्राम, फैक्स आदि
2. प्रसारण व्यवस्था:- इसमें प्रेषित्र का सम्बन्ध अनेक अभिग्राहियों से हो सकता है चैनल के रूप में खुला आकाश, वायुमण्डल काम मे लेते है। जैसे – रेडियो, टीवी, मोबाइल आदि
एकीकृत परिपथ (IC) (इंटीग्रेटेड सर्किट) की परिभाषा क्या है तथा प्रकार integrated circuit in hindi
integrated circuit in hindi एकीकृत परिपथ (IC) (इंटीग्रेटेड सर्किट) की परिभाषा क्या है तथा प्रकार ?
प्रश्न 1 : एकीकृत परिपथ समझाइये इसके लाभ लिखिए ये कितने प्रकार की होती है।
उत्तर : एकीकृत परिपथ (IC) (इंटीग्रेटेड सर्किट) : अर्द्धचालक का एकल क्रिस्टल (सिलिकन) को लेकर उस पर सक्रिय अवयव जैसे डायोड ट्रांजिस्टर और आक्रिय अवयव जैसे प्रतिरोध और संधारिख् का सूक्ष्म रूप से निर्माण करके अनेक इलेक्ट्राॅनिक परिपथ की सरंचना करते है इसे एकीकृत परिपथ कहते है। इसके निम्न लाभ है।
1. टाॅके की संधि नहीं होने के कारण विश्व विश्वसनीय अधिक होती है।
2. ये आकार में छोटे और हल्के होने के कारण इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जा सकते है।
3. संदेश सिग्नल को एक अवयव में दूसरे अवयव तक जाने से कम समय लगता है।
4. अनेक आई.सी. का एक साथ निर्माण होने के कारण ये सस्ती होती है इनहें खराब होने पर आसानी से बदला जा सकता है आई.सी. के निम्न प्रकार है।
1. लघु स्केल इन्ट्रीग्रेशन SSI) इनमें लाॅजिक गेट अथवा इलेक्ट्राॅनिक परिपथ की संख्या 10 से कम होती है।
2. मध्य स्केल इन्ट्रीगे्रशन (MSI) : इसमें लाॅजिक गेट अथवा इंलेक्ट्राॅनिक परिपथ की संख्या 100 से कम होती है।
3. वृहत स्केल इन्ट्रीगे्रशन (LSI) : इसमें लाॅजिक गेट अथवा इलेक्ट्रानिक परिपथ की संख्या 1000 से कम होती है।
4. अतिवृहत स्केल इन्ट्रीगे्रशन (VLSI) इसमें लाॅजिक गेट अथवा इलेक्ट्रानिक परिपथ की संख्या 1000 से अधिक होती है।
logic
gate (तार्किक द्वार)
क्या
है
ये
कितने
प्रकार के
होते
है
, प्रतीक चिन्ह
और
सत्यमान सारणी
प्रश्न 1 : सिग्नल कितने प्रकार की है। समझाइये।
उत्तर
: signal दो प्रकार के होते है।
1. अनुरूप सतत:- ये ऐसे सिग्नल है जिसमें चार राशि जैसे वोल्टेज धारा आदि का मान समय के अनुसार निरन्तर प्राप्त होता है जब ध्वनि को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करते है तो ऐसे ही सिग्नल प्राप्त होते है।
डाइग्राम
2. आंकिक सिग्नल (डिजिटल):- ये ऐसे सिग्नल है जिनमें चर राशि का मान तक निश्चित समय अन्तराल के बाद ही प्राप्त होता है इसमें सिग्नल 0 और 1 अवस्था में प्राप्त होते है। 0 का तात्पर्य राशि प्राप्त नहीं होना है जबकि अवस्था 1 का तात्पर्य राशि का अधिकतम मान प्राप्त होना है।
डाइग्राम
प्रश्न 2
: logic
gate (तार्किक द्वार) क्या है ये कितने प्रकार के होते है। इनके प्रतीक चिन्ह और सत्यमान सारणी दीजिए।
उत्तर :logic gate : ये ऐसे अंकिय इलेक्ट्राॅनिक परिपथ है जिनमें निर्गत और निवेश में तार्किक समबद्व का पालन होता है ये निम्न प्रकार के है।
1. NOT
gate: यह सर्वाधिक मूलभूत तार्किक द्वार है जिसमें निवेशी सिग्नल 1 और निर्गत सिग्नल भी 1 ही होता है।
इसमें निर्गत सिग्नल निवेशी सिग्नल के विपरित होता है। इसलिए इसे व्युत्क्रम द्वार भी कहते है। इसका संकेत चिन्ह निम्न है।
सत्यमान सारणी:- निर्गत और निवेशी की सभी सम्भावनाओं को व्यक्त करने वाली सारणी को सत्यमान सारणी कहते है जो निम्न है।
|
A |
Y |
|
0 |
1 |
|
1 |
0 |
2. Or
gate: इसमें निवेशी संकेत दो यादों से अधिक होते है और निर्गत सकेत 1 ही होता है इसमें 0 अवस्था तभी प्राप्त होगी जब सभी निवेश 0 अवस्था में है इसका प्रतीक चिन्ह और सत्यमान सारणी निम्न है।
सत्य सारणी
A B Y
0 0 0
1 0 1
0 1 1
1 1 1
3. AND
gate: इसमें निवेशी संकेत दो या दो से अधिक होत है। परन्तु निर्गत संकेत 1 ही होता है। इसमें निर्गत अवस्था 1 तभी प्राप्त होगी जब सभी निवेश 1 अवस्था में हो इसका प्रतीक चिन्ह और सत्यमान सारणी निम्न है।
सत्यमान सारणी
A B Y
0 0 0
0 1 0
1 0 0
1 1 1
4. NOR
gate: इसे सार्वधिक अथवा सार्व द्वार भी कहते है। इससे अन्य सभी द्वारा बनाए जा सकते है। इसमें निवेशी संकेत दो या दो से अधिक तथा निर्गत संकेत एक होता है। Or द्वारा से प्राप्त संकेत को नाॅट (NOT) द्वार में प्रवेश करते है। इसका प्रतीक चिन्ह व सत्यमान सारणी निम्न है।
सत्यमान सारणी
A B Y
0 0 1
0 1 0
1 0 0
1 1 0
6. NAND
gate : इसे भी सार्वत्रिकअथवा सार्व गेट कहते है। निवेशी संकेत दो या दो से अधिक होत है और निर्गत संकेत 1 होता है
AND द्वार से प्राप्त संकेत को NOT द्वार में प्रवेश करते है इसमें अवस्था 0 तभी प्राप्त होगी जब सभी निवेश 1 अवस्था में है इसका प्रतीक चिन्ह व सत्यमान सारणी चिन्ह निम्न है।
सत्यमान सारणी
A B Y
0 0 1
0 1 1
1 0 1
1 1 0
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