physics12th 12. नाभिक पाठ कक्षा १२ के नोट्स Nuclei 12th notes in hindi

 नाभिक पाठ कक्षा १२ के नोट्स Nuclei 12th notes in hindi

रदरफोर्ड का अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग , निष्कर्ष , रदरफोर्ड माॅडल , कमियाँ 

प्रश्न 1 : रदरफोर्ड के अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग का वर्णन कीजिए और इससे प्राप्त निष्कर्ष लिखिए?

उत्तर :  रदरफोर्ड का अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford’s Alpha Dispersion Experiment):- रदर फोर्ड ने सोने की पतली पन्नी जिसकी मोटाई 2.1 x 10-7m  है पर अल्फा कण जिनकी ऊर्जा 5.5 Mev  (मेटाई वोल्ट) की बौछार की गयी प्रकिर्णन से प्राप्त अल्फा कणों को सूक्ष्मदर्शी से जिसकी नेत्रिका पर्र दे का पर्दा है प्रेक्षित किये गये तो निम्न निष्कर्ष प्राप्त हुये।

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इस प्रयोग से निम्न निष्कर्ष प्राप्त हुए

1. अधिकांश अल्फा कण बिना विचलित हुए सीधे पार हो जाते है।

2. कुछ अल्फा कण ऐसे भी होते है जो 90 डिग्री से अधिक कोण पर विक्षेपित होते है।

3. 8000 अल्फा कण में से 1 अल्फा कण ऐसा भी होता है जो 180 डिग्री से परावर्तित होत है।

इस प्रयोग से निम्न निष्कर्ष प्राप्त हुए

1. परमाणु में द्रव्यमान और धनावेश एक छोटे से भाग में केन्द्रित होता है जिसे नाभिक कहते है इसका आकार लगभग 10-15मीटर से 10-14 मीटर होता है।

2. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है। जिसमें ele इस प्रकार चक्कर लगाते रहते है जैसे कि सूर्य के चारों और ग्रह।

प्रश्न 2 : रदर फोर्ड माॅडूल को प्रस्तुत कीजिए और इसकी कमीयां लिखिए?

उत्तर :  रदरफोर्ड माॅडल (Rutherford model):- रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु में धनावेश एक छोटे से भाग में केन्द्रित होता है जिसे नाभिक कहते है और ele  नाभिक के चारो ओर भिन्न भिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते है।

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कमियाँ :-

1. परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असफल रहना।  क्योंकि त्वरित ele ऊर्जा उत्सर्जित करता है अतः धीरे धीरे वेग कम होने से अन्त में नाभिक में गिर जायेगा।

2. इस माॅडल के अनुसार स्पेक्ट्रम सतत होना चाहिए जबकि  रेखिल होता है।

3. चुम्बकीय क्षेत्र में स्पेक्ट्रमीय रेखाओं का विपाटन (जीमेन प्रभाव) तथा विद्युत क्षेत्र स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन (स्टार्क प्रभाव) को नहीं समझा सका।

नाभिकीय बल की परिभाषा क्या है , विशेषताएँ , रेडियो एक्टिवता Nuclear force & Radio activation

प्रश्न 1 : नाभिकीय बल किसे कहते है ? इसकी विशेषताएँ लिखि?

उत्तरनाभिकीय बल (Nuclear force):- नाभिक के अन्दर न्यूक्लिओन्स के मध्य लगने वाले बल को नाभिकीय बल कहते है। इसकी विशेषता निम्न है

1. यह बल आकर्षण का होता है।

2. यह बल प्रकृति में सबसे अधिक प्रबल है।

3. इसकी परास बहुत कम लगभग 10-14 मीटर होती है अतः यह बल नाभिक के अन्दर ही लगता है।

4. यह बल आवेश पर निर्भर नहीं करता। अतः न्यूट्राॅन-न्यूट्रान, न्यूट्राॅन-प्रोट्रान, प्रोट्राॅन-प्रोट्राॅन, के मध्य समान रूप से लगता है।

5. यदि नाभिकीय कणों के बीच की दूरी 8 फेक्टोमीटर (Fm) के बराबर है तो बल का मान अधिकतम होता है दूरी इससे कम होने पर प्रतिकर्षण का बल लगता है और दूरी इससे अधिक बढ़ने पर तेजी से घटकर शून्य हो जाता है।

प्रश्न 2 :  रेडियो एक्टिवता (Radio activation) किसे कहते है? इनमें से कौन से विकिरण निकलते है ?

उत्तररेडियोएक्टिवता (Radioactivity) की खोज हेनरी बेकरल वैज्ञानिक ने की। कुछ बड़े नाभिक स्वतः ही विघटित होकर विकिरण निकालते रहते है और अन्य नाभिक में विघटित होते रहते है। इस घटना को रेडियोऐक्टिवता कहते है और पदार्थों को रेडियोऐक्टिवता पदार्थ कहते है। रेडियो एक्टिवता की घटना में निम्न विकिरण निकलते है।

1. α-विकिरण- ये हीलियम के नाभिक होते है।

2. β-इलेक्ट्रान तथा β+ प्रोजिट्रान होता है।

3. y (गामा) किरणे जिनके प्रोट्राॅन की ऊर्जा कुछ Kev होती है। निकलती है।

नाभिकीय विखण्डन , परमाणु रियेक्टर (भट्टी) , नाभिकीय संलयन

प्रश्न 1 : नाभिकीय विखण्डन किसे कहते है। श्रृंखला अभिक्रिया समझाइये। गुणन कारक की परिभाषा दीजिए? नाभिकीय भट्टी के विभिन्न भागों को चित्र बनाकर समझाइये।

उत्तर :  नाभिकीय विखण्डन (Nuclear fission):- बड़ा नाभिक जैसे यूरेनियम पर न्यूट्रान की क्रिया कराये तो यह लगभग दो बराबर भागों में टूट जाता है और काफी मात्रा में मुक्त होती है। इस घटना को नाभिकीय विखण्डन कहते है।

92U235  + 0n1  = 56Ba144 + 36Kr89 + 30n1

92U235  + 0n1  =  54Xe140 + 38Sr94 + 20n1

नाभिकीय विखण्डन में प्राप्त न्यूट्रॉनों की औसत संख्या 2.57 होती है। 

श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction):- यदि नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त न्यूट्रान अन्य यूरेनियम परमाणुओं का विखण्डन कर दे और इसी प्रकार विखण्डन की क्रिया होती रहे तो इसे श्रृंखला अभिक्रिया कहते है।

गुणनकारक:- नाभिकीय विखण्डन में किसी स्तर पर न्यूट्रानों से विखण्डनों की संख्या और इसके पूर्व के स्तर पर न्यूट्रानों से विखण्डनों की संख्या के अनुपात को गुणानकारक (n) कहते है।

k = नाभिकीय विखण्डन में किसी स्तर पर न्यूट्रॉन के द्वारा विखण्डनों की संख्या / इसके पूर्व के स्तर में न्यूट्रॉन के द्वारा विखण्डनों की संख्या

यदिका मान 1 से कम तो क्रिया अक्रान्ति , k =1  पर क्रिया क्रान्तिक औरका मान एक से अधिक होने पर क्रिया अतिक्रान्तिक कहलाती है।

परमाणु रिएक्टर (भट्टी) (Nuclear reactor (furnace)):-ऐसी युक्ति जिसमें नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा को संरचनात्मक कार्यों में परिवर्तित करते है। नाभिकीय रियेक्टर कहते है। इसके मुख्य भाग निम्न है।

1. ईधन (Fuel):- यह विखण्डनीय पदार्थ होता है जो यूरेनियम, थोरीयम, प्रोटेनियम आदि हो सकते है।

2. मंदक (Moderator):- नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त न्यूट्रोनों की गति तेज होती है। इस गति को कम करने के लिए मेंदक काम में लेते है। जो साधारण जल, भारी जल, ग्रेफाइट हो सकता है।

3. नियंत्रक छड़े (Controller rods):- ये कैंडमियम की छड़े होती है। कैडमियन न्यूट्राॅन का अच्छा अवशोषक है यह न्यूट्राॅन की संख्या को नियंत्रित करता है।

4. शीतलक (Coolant):- नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा को निरन्तर बाहर निकालना जरूरी है। इसलिए शीतलक को प्रवाहीत करते है। शीतलक के रूप में साधारण जल, भारी जल, द्रवीत गैसे आदि हो सकती है।

5. बाहरी आवरण (Outer cover):- नाभिकीय विखण्डन से हानिकारक विकिरण निकलते है जो प्राणीयों के लिए नुकसानदायक होत है। इसलिए पूरे भाग को कंकरीट के 2-3 मीटर मोटी दीवार से उपकरण को ढक दिया जाता है।

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प्रश्न 2 :  नाभिकीय संलयन किसे कहतेहै तथा नाभिकीय अभिक्रियाऐं समझाइये?

उत्तर :  नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion):- उच्च ताप और दाब पर छोटे छोटे नाभिक मिलकर बड़े नाभिक का निर्माण करते है और काफी ऊर्जा मुक्त होती है इस घटना को नाभ्ज्ञिकीय संलयन कहते है।

ताप नाभिकीय अभिक्रियाऐं:- छोटे छोटे नाभिक जब एक दूसरे के नजदीक आते है तो उनमें प्रतिकर्षण का बल लगता है। एक नाभिक को दूसरी नाभिक में प्रवेश करने के लिए इतनी पर्याप्त ऊर्जा होनी चाहिए निवहन प्रतिकर्षण बल को पार कर सके औश्र दाब भी अधिक होना चाहिए ताकि नाभिक एक दूसरे के सम्पर्क में सके ये क्रियाऐं उच्च ताप और दाब पर होती है। इन्हें ताप नाभिकीय अभिक्रियाऐं कहते है तारों में ऊर्जा का उत्पादन ताप नाभिकीय क्रियाओं के द्वारा हो रहा है पृथ्वी पर इतना उच्च ताप बनाये रखना सम्भव नहीं है इसलिए अभी तक पृथ्वी पर ताप नाभिकीय क्रियाऐं सम्पन्न करना सम्भव नहीं है।

 

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