गाउस का नियम एवं इसके अनुप्रयोग नोट्स कक्षा १२ gauss law and applications notes in hindi
विद्युत फ्लक्स की परिभाषा क्या है , सूत्र , विमा , मात्रक electric flux in hindi , वैद्युत फ्लक्स विमीय सूत्र
वैद्युत फ्लक्स विमीय सूत्र , SI मात्रक , विद्युत फ्लक्स की परिभाषा क्या है , सूत्र , विमा , मात्रक electric flux in hindi ?
विद्युत फ्लक्स (electric flux) : किसी विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ के लंबवत गुजरने वाली वैधुत बल रेखाओं की संख्या को उस पृष्ठ से सम्बद्ध विद्युत फ्लक्स कहते है।
वैधुत फ्लक्स को Φ से प्रदर्शित किया जाता है , यह एक अदिश राशि है अर्थात इसको व्यक्त करने के लिए सिर्फ परिमाण की आवश्यकता होती है दिशा की नहीं।
विद्युत बल रेखाओं की दिशा के लंबवत एकांक क्षेत्रफल से गुजरने वाली बल रेखाओ की संख्या को फ्लक्स क्षेत्र की तीव्रता या फ्लक्स घनत्व (E) कहा जाता है।
माना एक विद्युत क्षेत्र E में एक पृष्ठ स्थित है जिसका कुल क्षेत्र S है तथा अल्पांश का क्षेत्रफल dA है अतः पृष्ठ से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स का मान E तथा dS के गुणन के बराबर होगा।
dΦ = E.dA = E.dA.Cosθ
यदि θ = 0 है तो Cosθ = 1
अतः dΦ = E.dA
यदि θ = 90 है तो Cos90 = 0
अतः dΦ = 0
θ = 90 पर dΦ का मान न्यूनतम होता है।
यदि पृष्ठ किसी असमान विद्युत क्षेत्र में स्थित है तो पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स का मान ज्ञात करने के लिए पृष्ठ को अनेक अल्पांशो में बांटा जाता है तथा कुल विद्युत फ्लक्स का मान ज्ञात करने के लिए इन सभी अल्पांशो का योग किया जाता है।
यदि
तो ∑ के स्थान पर समाकलन का उपयोग करते है।
समाकलन का चिन्ह यह बताता है की क्षेत्र A को अनेक छोटे छोटे टुकड़ो (अल्पांशो) में बाँटा गया है।
विद्युत फ्लक्स का मान धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य कुछ भी हो सकता है।
यदि
θ
< 90 तो फ्लक्स धनात्मक
θ
= 90 तो फ्लक्स शून्य
θ
> 90 तो फ्लक्स ऋणात्मक
वैद्युत फ्लक्स का मात्रक = N.m2.C-1
dΦ की विमा = M1L3T-3A-1
वैद्युत फ्लक्स : अल्प क्षेत्रफल ds से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स , विद्युत तीव्रता सदिश और क्षेत्रफल सदिश के अदिश गुणनफल के तुल्य होता है।
dΘE = E.dS =
EdScosθ अर्थात ΘE =∫E.dS यहाँ θ → E एवं dS बीच का कोण है।
यह दिए गए क्षेत्रफल से गुजरने वाली कुल बल रेखाओ को व्यक्त करता है। यहाँ क्षेत्रफल को सदिश माना गया है।
क्षेत्रफल सदिश की दिशा सतह पर अभिलम्बवत होती है।
विद्युत फ्लक्स से सम्बंधित महत्वपूर्ण बिंदु :-
1. विद्युत फ्लक्स एक वास्तविक अदिश राशि है।
विद्युत फ्लक्स की इकाई = वोल्ट x मीटर होती है।
विद्युत फ्लक्स की विमा या विमीय सूत्र = ML3T-3A-1 होती है।
2. यह अधिकतम होगा जब cosθ अधिकतम = 1 (θ = 0) , अत: विद्युत क्षेत्र तीव्रता सदिश सतह के क्षेत्रफल पर अभिलम्बवत होगा एवं (dΘE)max = E.dS
3. विद्युत फ्लक्स न्यूनतम होगा यदि cosθ न्यूनतम = 0 , (θ = 90) , अत: यदि विद्युत क्षेत्र , सतह के सामानांतर होगा एवं (dΘE)min = 0
4. किसी बंद वस्तु से बाहर निकलने वाला फ्लक्स धनात्मक तथा अन्दर प्रविष्ठ होने वाला फ्लक्स ऋणात्मक माना जाता है।
इलेक्ट्रिक फ्लक्स या वैद्युत फ्लक्स
विद्युत क्षेत्र में रखे किसी पृष्ठ के लम्बवत गुजरने वाली वैधुत बल रेखाओं की संख्या को उस पृष्ठ से सम्बद्ध वैधुत फ्लक्स कहते है। इसे Θ से व्यक्त करते है और यह एक अदिश राशि है।
विद्युत बल रेखाओं की दिशा के लम्बवत एकांक क्षेत्रफल से गुजरने वाली वैद्युत बल रेखाओं की संख्या को फ्लक्स घनत्व या विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) कहते है अत: वैद्युत क्षेत्र E में स्थित किसी पृष्ठ के क्षेत्रफल के अल्पांश dS से सम्बद्ध वैद्युत फ्लक्स वेक्टर E व dS के डॉट गुणन से प्राप्त होगा , अर्थात
dΘ = E.dS
dΘ = E.dScosθ समीकरण-1
यदि θ = 0 डिग्री हो तो cosθ = 1
अत: dΘ = E.dS
जो की वैद्युत फ्लक्स का अधिकतम मान है।
यदि θ = 90 डिग्री हो तो cosθ = 0
अत: dΘ = 0
जो कि वैद्युत फ्लक्स का न्यूनतम मान है।
यदि कोई पृष्ठ असमान वैद्युत क्षेत्र में रखा है तो पृष्ठ से सम्बद्ध वैद्युत फ्लक्स ज्ञात करने के लिए अनेक अल्पांश में बाँटकर उनसे सम्बद्ध विद्युत फ्लक्स के मानो को जोड़कर कुल फ्लक्स ज्ञात करेंगे।
Θ = ∮E.dS समीकरण-2
इस समीकरण-2 में समाकलन ∮ को विद्युत क्षेत्र E का पृष्ठ समाकलन (surface integral ) कहते है। यह समाकलन यह बताता है कि क्षेत्रफल S को ds क्षेत्रफल के सूक्ष्म पृष्ठों में विभाजित किया जाता है और अदिश राशि E.dS की गणना प्रत्येक सूक्ष्म क्षेत्रफल के लिए करके उनका योग लिया जाता है जो सम्पूर्ण पृष्ठ से सम्बद्ध वैद्युत फ्लक्स को व्यक्त करता है।
पुन: समीकरण-1 लिखने पर –
dΘ = E.dScosθ समीकरण-1
समीकरण-1 से स्पष्ट है कि वैद्युत फ्लक्स एक अदिश राशि है तथा किसी सूक्ष्म पृष्ठ से सम्बद्ध विद्युत फ्लक्स dΘ का मान धनात्मक , शून्य या ऋणात्मक हो सकता है जो E व dS के मध्य कोण θ पर निर्भर करता है। यदि कोण θ न्युन कोण अर्थात 90 डिग्री से कम हो तो फ्लक्स धनात्मक होता है , यदि θ = 90 डिग्री हो तो फ्लक्स शून्य होता है और यदि θ अधिक कोण हो तो फ्लक्स ऋणात्मक होता है।
विद्युत फ्लक्स का मात्रक :-
dΘ = E.dS
अत: वैद्युत फ्लक्स का मात्रक = E का मात्रक x ds का मात्रक
= (न्यूटन/कुलाम) x मीटर2 = N.m2C-1 अर्थात न्यूटन.मीटर2कुलाम-1
या
E का मात्रक वोल्ट/मीटर भी लिया जा सकता है , इस स्थिति में –
dΘ का मात्रक = (वोल्ट/मीटर ) x मीटर2 = वोल्ट x मीटर
विद्युत फ्लक्स का विमीय सूत्र :–
dΘ = E.dS
dΘ = F.dS/q
dΘ = F.dS/it
अत: विमीय सूत्र = [M1L1T-2][L2]/[A1T1]
विमीय सूत्र = ML3T-3A-1 होती है।
विद्युत फ्लक्स
परिभाषा : विद्युत क्षेत्र में रखी हुई सतह से , सतह के अभिलम्ब दिशा से गुजरने वाली विद्युत बल रेखाओं की कुल संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते है। यह विद्युत क्षेत्र का गुण है।
विद्युत फ्लक्स एक अदिश राशि है। यह धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य हो सकती है।
विद्युत फ्लक्स का SI मात्रक N.m2C-1 या गाउस होता है अथवा J.m.C-1 हो सकता है।
विद्युत क्षेत्र E में कोई सतह मानी जाए एवं इस सतह पर छोटे क्षेत्रफल dS का अल्पांश चुना जाए तो इस अल्पांश से सम्बंधित फ्लक्स dΦE = E.dS है।
dS की दिशा तल के लम्बवत होती है n के अनुदिश है।
या
dΦE =
E.dS cosθ
या
dΦE = En.dS
जहाँ En , dS की दिशा में विद्युत क्षेत्र का घटक है।
सम्पूर्ण क्षेत्रफल से गुजरने वाला फ्लक्स dΦE = S∫ E.dS = S∫ En.dS
यदि सम्पूर्ण क्षेत्रफल में विद्युत क्षेत्र एक समान हो तो ΦE = E.dS
विशेष स्थितियाँ :-
स्थिति-1
यदि विद्युत क्षेत्र सतह के लम्बवत है ,
तब विद्युत क्षेत्र E का लम्ब के साथ कोण शून्य है अत: cos0 = 1
Φ = E.dS cosθ
Φ = E.S
स्थिति-2
यदि विद्युत क्षेत्र सतह के समान्तर है।
E लम्ब के साथ बना कोण = 90 होगा।
अत: cos90 = 0
Φ = E.dS cos90
Φ = 0
सतत आवेश वितरण , continuous charge distribution in hindi रेखीय , पृष्ठ , आयतन आवेश वितरण
रेखीय , पृष्ठ , आयतन आवेश वितरण (continuous charge distribution in hindi) सतत आवेश वितरण : जब एक बहुत बड़ी संख्या में आवेश परस्पर एक दूसरे के निकट उपस्थित होते है तो इन आवेशों को संतत रूप से वितरित माना जाता है।
मान लीजिये एक छड़ पर 1 नैनो कूलाम आवेश उपस्थित है इसका तात्पर्य यह है की उस छड़ पर 1010 बिन्दु आवेश उपस्थित है यदि किसी बिंदु पर इस छड़ के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी पड़े तो कूलॉम के अध्यारोपण सिद्धान्त से यदि प्रत्येक आवेश के कारण उस बिन्दु पर वैधुत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात की जावे तथा फिर सभी आवेशों के कारण प्राप्त विधुत क्षेत्रों का सदिश योग किया जाए तो यह प्रक्रिया बहुत ही जटिल हो जाती है।
इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए हम आवेश की सतत मानते है तथा आवेश घनत्व की अवधारणा उपयोग करते हुए कलन विधि द्वारा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करते है जो की बहुत आसान है।
मान लीजिये किसी वस्तु पर q आवेश उपस्थित है तो इसे हम बहुत सारे सूक्ष्म आवेशों dq में बाँट लेते है।
यदि यह आवेश एक विमा में विचरित करता है तो इसे रेखीय आवेश वितरण (लम्बाई के अनुदिश) , अगर आवेश दो विमाओ में विचरित करता है तो इसे पृष्ठ आवेश वितरण (क्षेत्रफल के अनुदिश) तथा यदि आवेश तीन विमाओं में विचरित करता है तो इसे आयतन वितरण (आयतन के अनुदिश) कहते है।
इन्हे संक्षिप्त में निम्न प्रकार समझाया जा सकता है।
(1) रेखीय आवेश वितरण (linear charge
distribution) :
जब आवेश लम्बाई के अनुदिश या एक रेखा के रूप में वितरित होता है , यह रेखा बहुत पतली मानी जाती है तथा पूरा आवेश इस पतली तार की सतह (परिधि) पर वितरित माना जाता है।
आवेश के इस प्रकार के वितरण को रेखीय आवेश वितरण कहा जाता है।
माना dq रेखीय घनत्व का आवेश रेखीय रूप में वितरित है यहाँ dq (आवेश अल्पांश ) की लम्बाई को यदि dx मानी जाए तो इसे λ से व्यक्त करते है।
रेखीय आवेश वितरण की परिभाषा
λ = dq /dx
कुल आवेश dq = λ .dx
= रेखीय आवेश वितरण x लम्बाई
मात्रक = कुलाम /m
(2) पृष्ठ आवेश वितरण (surface charge
distribution) :
जब आवेश दो विमाओं में वितरित रहता है या क्षेत्रफल के अनुदिश आवेश के वितरण को पृष्ठ आवेश वितरण कहते है।
माना किसी किसी शीट पर आवेश वितरित है जिसकी मोटाई अत्यंत अल्प हो अर्थात आवेश केवल दो विमाओं में हो , यदि इस पर आवेश वितरित होगा तो यह इसी लम्बाई व चौड़ाई के अनुदिश वितरित होगा अतः यह द्विविमी वितरण या पृष्ठ आवेश वितरण को क्षेत्रफल आवेश वितरण कहते है।
इसे σ से व्यक्त करते है।
माना dq पृष्ठीय आवेश घनत्व क्षेत्रफल dA के अनुदिश वितरित है तो
आवेश वितरण की परिभाषा से
σ = dq /dA
कुल आवेश dq = σ . dA
मात्रक = C/m2
(3) आयतन आवेश वितरण (volume charge
distribution)
जब आवेश तीनों विमाओ में विलगित है अर्थात लम्बाई , चौड़ाई तथा ऊंचाई वाली वस्तुओ पर , यदि आवेश वितरित है तो इस प्रकार के वितरण को आयतन कहते है।
इसे ρ से व्यक्त करते है इसका मात्रक C/m3 होता है।
माना dq आवेश आयतन अल्पांश dV में वितरित है तो आयतन आवेश वितरण की परिभाषा से
ρ = dq /dV
अल्पांश पर कुल आवेश dq = ρ.dV
सतत आवेश का वितरण : आवेश का अविरत एक विमीय , द्वि विमीय तथा त्रि विमीय हो सकता है। एक विमीय वितरण को आवेश का रेखीय वितरण (लीनियर चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन ) , द्वि-विमीय वितरण को आवेश का पृष्ठीय वितरण (सरफेस चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन ) और त्रि-विमीय वितरण को आवेश का आयनिक वितरण (वॉल्यूम चार्ज डिस्ट्रीब्यूशन) कहते है। निरंतर प्रभारी वितरण |
संतत आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र electric field for charge distribution
(electric field due to a continuous charge distribution in hindi ) संतत आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र :
हम संतत आवेश का वितरण का अध्ययन कर चुके है की जब बहुत सारे आवेश एक साथ उपस्थित हो तो इस प्रकार के आवेश वितरण को संतत आवेश वितरण कहते है।
अब हम इस संतत आवेश वितरण के कारण किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करेंगे।
इस आवेश वितरण का एक अल्पांश dq लेते है यह अल्पांश रेखीय , पृष्ठीय या आयतन संतत आवेश वितरण का हो सकता है।
आवेश अल्पांश dq के कारण बिंदु P पर जो की r दूरी पर स्थित है विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
इसकी दिशा जब P बिन्दु पर एक धन परिक्षण आवेश रखा जाए और जिस दिशा में इस धन आवेश पर बल लगता है।
चूँकि P बिंदु पर हमने आवेश dq के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात की है अब यदि हम P बिंदु पर कुल विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (परिणामी) ज्ञात करनी हो तो अल्पांशो के कारण विद्युत क्षेत्रों को सदिश योग अर्थात समाकलन किया जाता है।
अतः संतत आवेश वितरण के कारण P बिंदु पर कुल (परिणामी) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
स्पेशल केस :
1. यदि आवेश अल्पांश रेखीय संतत आवेश वितरण है तो
dq = λ dl (रेखीय संतत आवेश वितरण से )
अतः विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
2. यदि आवेश अल्पांश पृष्ठीय आवेश वितरण का है तो
dq = σ dS
अतः P बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
3. यदि अल्पांश आयतन वितरण का लिया गया है तो
dq = ρ dV
अतः परिणामी विद्युत क्षेत्र
नोट : dq के कारण dE विभिन्न दिशाओं में हो सकते है यह एक त्रिविम सदिश है। अतः इसकी कार्तीय घटक के रूप में ज्ञात किया जाता है।
E के कार्तीय घटक Ex , Ey ,
Ez होंगे
गाउस
का
नियम
क्या
है
, गॉस
की
प्रमेय gauss law in hindi , गौस की प्रमेय की परिभाषा ,सिद्धांत
सूत्र क्या है ? गाउस का नियम क्या है , गॉस की प्रमेय gauss law in hindi , गौस की प्रमेय की परिभाषा ,सिद्धांत ? gauss’s law in hindi –
गाउस का नियम (gauss law) : हमने पहले पढ़ा था की कूलॉम का नियम पढ़ा था , जो स्थिर वैद्युत बल पर आधारित था , गाउस का नियम भी स्थिर वैधुत बल के संदर्भ में कुलाम के नियम का ही दूसरा रूप है।
गाउस का नियम किसी स्थिर विद्युत क्षेत्र में उपस्थित बंद पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत फ्लक्स तथा पृष्ठ के अंदर उपस्थित कुल आवेश में एक संबंध स्थापित करता है इसी सम्बन्ध को गाउस का नियम तथा इस बंद पृष्ठ को गॉउसी पृष्ठ कहते है।
गाउस के नियम का उपयोग कर आवेशित वस्तुओ के विद्युत क्षेत्र की गणना आसानी से की जा सकती है।
गाउस के नियम का कथन :
“किसी विद्युत क्षेत्र में उपस्थित काल्पनिक या स्वेच्छा गृहीत बन्द पृष्ठ से अभिलंबवत बाहर निकलने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का 1/ε0K गुना होता है।
गाउसीय नियम का गणितीय निरूपण :
यहाँ
ε0 = निर्वात (वायु) की विद्युत शीलता
qin = पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश
k = माध्यम का परावैद्युतांक
Φ =
कुल फ्लक्स
यदि बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश शून्य है अर्थात यदि बंद पृष्ठ के भीतर कोई आवेश विधमान न हो या आवेश पृष्ठ के अंदर न होकर पृष्ठ के बाहर स्थित हो तो बंद पृष्ठ से अभिलंबवत निकलने वाला विद्युत फ्लक्स का मान भी शून्य होता है।
नोट : जब आवेश विविक्त रूप में विधमान हो तो अध्यारोपण के सिद्धान्त की सहायता से कुल आवेश ज्ञात किया जाता है लेकिन जब आवेश का वितरण संतत है तो पृष्ठ के लिए किसी अल्पांश द्वारा किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करके समाकलन विधि द्वारा समस्त आवेश वितरण कारण उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र का मान ज्ञात किया जाता है।
गाउस के नियम के महत्वपूर्ण तथ्य
(Important facts about Gauss’s law):
1. विद्युत क्षेत्र में रखे पृष्ठ के कुल विद्युत फ्लक्स का मान ज्ञात करने के लिए पृष्ठ से निर्गत (निकलने वाले ) विद्युत फ्लक्स को धनात्मक चिन्ह के साथ लिखते है तथा पृष्ठ में प्रवेश करने वाले विद्युत फ्लक्स को ऋणात्मक चिन्ह के लिखकर उनका बीजगणितीय योग किया जाता है।
2. गाउसियन पृष्ठ का आकार कुछ भी हो सकता है , गोलीय , बेलनाकार या घनाकार इत्यादि।
बशर्ते उस आकृति में आवेश वितरण में सममितता पायी जानी चाहिए।
3. गाउस का नियम गाउसियन पृष्ठ के आकार पर निर्भर नहीं करता है यह बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश की मात्रा आवेश की प्रकृति तथा उस माध्यम पर निर्भर करता है जिसमे वह स्थित है।
कूलॉम का नियम के केवल स्थिर आवेशों के लिए लागू होता है लेकिन गाउस का नियम आवेश की स्थिरता तथा गतिशीलता पर निर्भर नहीं करता है।
4. गाउस नियम उन्ही सदिश क्षेत्रों के लिए मान्य है जो विद्युत क्षेत्र व्युत्क्रम नियम का पालन करते है।
5. यदि कोई आवेश बन्द पृष्ठ से बाहर स्थित है तो पृष्ठ से निर्गत विद्युत फ्लक्स में इस आवेश का कोई योगदान नहीं होगा।
गाउस का नियम या गाउस की प्रमेय (स्थिर वैद्युतिकी में) : यह नियम carl f gauss (कार्ल ऍफ़ गॉस) द्वारा दिया गया था। गाउस का नियम किसी बंद पृष्ठ पर स्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र तथा बंद पृष्ठ से परिबद्ध कुल आवेश के मध्य सम्बन्ध बताता है। इस सतह को गाउसीय पृष्ठ कहते है।
गाउसीय पृष्ठ एक काल्पनिक बंद पृष्ठ होता है। इसकी वैधता प्रयोगों द्वारा सिद्ध की जा सकती है। इसका उपयोग सममित आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
गाउस के नियम का कथन एवं विवरण
गाउस का नियम निम्न प्रकार से लिखा जाता है –
किसी बंद काल्पनिक पृष्ठ या गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का पृष्ठीय समाकलन , निर्वात में उस बंद
पृष्ठ से परिबद्ध आवेश का 1/ε0K गुना होता है। यहाँ पर ε0 मुक्त आकाश (निर्वात) की विद्युतशीलता है।
यदि S गाउसीय पृष्ठ है और Σq ,
गाउसीय पृष्ठ के अन्दर कुल आवेश है तो गाउस के नियम के अनुसार –
Φ =
∮ E.dS
= Σq/ε0K
समाकलन चिन्ह यह व्यक्त करता है कि सम्पूर्ण बंद पृष्ठ का समाकलन किया गया है।
गाउस के नियम से सम्बंधित महत्वपूर्ण बिंदु
§ गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स इसकी आकृति पर निर्भर नही करता है।
§ गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स गाउसीय पृष्ठ के अन्दर आवेश की स्थिति पर निर्भर नहीं करता है।
§ गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स केवल पृष्ठ के अन्दर कुल आवेश पर निर्भर करता है।
§ किसी बंद पृष्ठ में आने वाले फ्लक्स को ऋणात्मक और बाहर जाने वाले फ्लक्स को धनात्मक माना जाता है क्योंकि n को बाहर की दिशा में धनात्मक लिया जाता है।
§ गाउसीय पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता गाउसीय पृष्ठ के अन्दर और बाहर उपस्थित सभी आवेशो के कारण होती है।
§ किसी गाउसीय पृष्ठ में Φ
= 0 का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक बिंदु पर E = 0 है लेकिन प्रत्येक बिंदु पर E = 0 का अर्थ Φ = 0 होता है।
गाउस के नियम या प्रमेय से विद्युत क्षेत्र की गणना कैसे करते है ?
गाउस प्रमेय से , हम कह सकते है –
कुल Φ = ∫E.dS = qin /ε0
E , Φ में दिया है लेकिन यह अदिश गुणनफल और समाकलन में बाध्य है इसलिए E को ज्ञात करने के लिए हम इसे इन बद्धताओं से मुक्त कर सकते है।
(1) सर्वप्रथम हम E को अदिश गुणनफल से मुक्त करना चाहेंगे , इसके लिए एक सतह का चुनाव करते है जो कि E के लम्बवत है इसलिए E , dS , E.dS बन जाता है।
(2) इस प्रकार की सतह का चुनाव करते है कि E का मान उस पर स्थिर बना रहे जिससे ∫E.dS = E∫dS
गॉस का नियम अथवा गॉस की प्रमेय
गाउस का नियम स्थिर वैद्युत बलों के सम्बन्ध में कूलाम नियम का दूसरा रूप है। यह प्रमेय किसी स्थिर वैद्युत क्षेत्र में स्थित किसी काल्पनिक एवं स्वेच्छागृहीत बंद पृष्ठ से सम्बद्ध गुजरने वाले सम्पूर्ण वैद्युत फ्लक्स या सम्पूर्ण अभिलम्बवत वैद्युत प्रेरण तथा सतह के अन्दर विद्यमान कुल आवेश में सम्बन्ध प्रदर्शित करती है। यह काल्पनिक तथा स्वेच्छ बंद पृष्ठ गाउसीय पृष्ठ (गाउसियन पृष्ठ) कहलाता है। गॉस प्रमेय की सहायता से आवेशित वस्तुओं के विद्युत क्षेत्रों की गणना सरलतापूर्वक की जा सकती है।
गॉस के नियम या प्रमेय का कथन : गॉस की प्रमेय या नियम के अनुसार “विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी स्वेच्छगृहित बंद पृष्ठ से अभिलम्बवत बाहर निकलने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश का 1/ε0K गुना होता है। “
इसे निम्न सूत्र द्वारा लिखा जाता है –
Φ =
∮ E.dS
= Σq/ε0K
जहाँ ε0 निर्वात या वायु की विद्युतशीलता एवं Σq पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश है और K माध्यम का परावैद्युतांक है।
यदि बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश शून्य है या बंद पृष्ठ के भीतर कोई आवेश न हो या आवेश बंद पृष्ठ के बाहर हो तो पृष्ठ से बाहर निकलने वाला कुल अभिलम्बवत फ्लक्स शून्य होता है अर्थात Φ = ∮ E.dS = 0
गाउस का नियम (gauss law in hindi) : यह किसी बन्द [पृष्ठ में परिबद्ध कुल आवेश तथा उस पृष्ठ से निर्गमित कुल वैद्युत फ्लक्स के मध्य सम्बन्ध व्यक्त करता है। इसके अनुसार किसी बंद पृष्ठ से निर्गमित कुल वैद्युत फ्लक्स उस सतह में परिबद्ध कुल आवेश और 1/ε0 के गुणनफल के तुल्य होता है।
गणितीय रूप में गाउस के नियम को निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है –
∮ E.dS = q/ε0
कूलॉम
नियम
से
गाउस
नियम
की
उपपत्ति proof of gauss’s law using coulomb’s law
(proof of gauss’s law using coulomb’s law ) कूलॉम नियम से गाउस नियम की उपपत्ति :
हम कूलॉम का नियम तथा गाउस का नियम विस्तार पूर्वक पढ़ चुके है तथा इनके सूत्रों की स्थापना भी कर चुके है।
अब हम कूलॉम के नियम का उपयोग करेंगे और कुलाम के नियम की सहायता से गॉस के नियम की उपत्ति करेंगे।
गाउस ने कहा था की बंद पृष्ठ से परिबद्ध विद्युत फ्लक्स उस बंद पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश के 1/ε0k गुना होता है।
और इसी को हम गणितीय रूप में स्थापित करने जा रहे है।
मान लीजिये एक बंद पृष्ठ दिया गया है इस बन्द पृष्ठ आवेश के किसी बिन्दु O पर एक धनावेश q रखा गया है।
बिंदु O से r दूरी पर पृष्ठ के क्षेत्रफल का अल्पांश dS मानते है तथा इस r दुरी पर q के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कूलाम के नियम से निम्न प्रकार दी जाएगी।
विद्युत क्षेत्र के लिए परिमाण निम्न प्रकार दिया जाता है
समीकरण को अरेंज करने पर
4πr2 पृष्ठ का क्षेत्रफल है , बायीं साइड लेने पर , 4πr2 के स्थान पर पृष्ठ का क्षेत्रफल A रखने पर , समाकलन सम्पूर्ण पृष्ठ के क्षेत्रफल को दर्शाता है।
चूँकि E सम्पूर्ण पृष्ठ में समान है अतः यह constant की भांति है अतः समाकलन के भीतर ले सकते है
याद कीजिये यह विद्युत फ्लक्स का सूत्र है
वापस ऊपर वाली समीकरण को स्मरण कीजिये जो हमने लिखी निम्न प्रकार लिखी थी
बायीं तरफ के स्थान पर हम E .dA लिख सकते है क्योंकि यह हमने अभी ज्ञात किया है अतः
उपरोक्त समीकरण को ही गाउस का नियम कहते है।
गाउस
के
नियम
से
अनन्त
रेखीय
आवेश
(आवेशित तार)
के
कारण
विद्युत क्षेत्र की
तीव्रता
(electric field intensity due to infinite line charge from gauss
law ) गाउस के नियम से अनन्त रेखीय आवेश (आवेशित तार) के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता :
माना AB एक अनंत लम्बाई का रेखीय आवेश है , इस अनन्त लम्बाई वाले तार पर आवेश संतत रूप से वितरित है , तार पर आवेश का रेखीय λ घनत्व है।
इस रेखीय आवेश से r दूरी पर एक बिन्दु पर है तथा हमें इस रेखीय आवेश के कारण P बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है , P बिंदु के सम्मुख तार पर स्थित बिंदु O को निर्देश बिंदु मान लेते है।
निर्देश बिंदु O से तार पर समान दूरी पर दो अल्पांश dl लेते है इनको क्रमशः A1 &
A2 नाम दिया गया है।
दोनों अल्पांशो पर रेखीय आवेश (आवेश ) समान तथा λ.dl के बराबर होगा।
दोनों अल्पांशो के कारण बिंदु P पर वैधुत क्षेत्र की तीव्रता को dE1 &
dE2 से व्यक्त किया गया है यहाँ dE1 & dE2 परिमाण में समान होंगे।
dE1 & dE2 दो घटको में विभक्त होते है यहाँ एक घटक dE1Sin θ & dE2 Sin θ परिमाण में समान है लेकिन दिशा में विपरीत है अतः ये एक दूसरे को नष्ट कर देते है।
दूसरा घटक dE1Cosθ &
dE2Cosθ परिमाण में समान है लेकिन दोनों एक ही दिशा में है अतः ये दोनों आपस में जुड़ जाते है , इनका मान ही P बिंदु पर दोनों अल्पांशो के कारण P बिंदु पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को प्रदर्शित करता है अतः वैद्युत क्षेत्र तार के लंबवत P के अनुदिश होगा।
विद्युत क्षेत्र की दिशा तार के लंबवत P बिंदु की तरफ होगी।
चूँकि आवेश तार पर संतत रूप से वितरित है अतः इस तार की लम्बाई l के सममित बेलनाकार पृष्ठ की कल्पना करते है।
गाउस के नियम से पृष्ठ में परिबद्ध आवेश
q = λ l
अतः गॉस के नियम से
E.dS = q/ε0 = λl /ε0
गाउसीय पृष्ठ (बेलनाकार बंद पृष्ठ माना है ) को तीन भागो में बांटा जा सकता है
1. ऊपरी वृत्ताकार पृष्ठ A
2. निचला वृत्ताकार पृष्ठ B
3. वक्र पृष्ठ C
विद्युत क्षेत्र S1 व S2 के साथ 90 डिग्री का कोण है तथा S3 व E के मध्य 0 डिग्री का कोण है अर्थात S3 पृष्ठ E के अनुदिश है।
गाउस के नियम से
अतः
बेलन का क्षेत्रफल S =
2πrl
अतः
E . 2πrl = λl /ε0
E = 2kλ/r
E = λ/[ 2 π r εo ]
अपरिमित समरूप
आवेशित अचालक
परत
के
कारण
विद्युत क्षेत्र
(electric field due to an infinite uniformly charge non
conducting sheet ) अपरिमित समरूप आवेशित अचालक परत के कारण विद्युत क्षेत्र :
माना चित्रानुसार एक ABCD अनन्त विस्तार की आवेश परावैधुत (अचालक) परत है जिसके कारण हमें विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
परत पर आवेश संतत (एकसमान) वितरित है तथा पृष्ठ आवेश घनत्व (एकांक क्षेत्रफल पर आवेश ) σ है।
परत के लंबवत बिंदु P पर विधुत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
P बिंदु की परत से लंबवत दूरी r है , P बिंदु के लंबवत परत पर बिन्दु को केंद्र मान कर O नाम देते है , O के दोनों तरफ l दूरी पर दो क्षेत्रफल अल्पांश A1 & A2 लेते है।
क्षेत्रफल अल्पांश A1 & A2 के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता क्रमश: dE1 & dE2 द्वारा प्रदर्शित करते है।
dE1 &
dE2 को इसके घटको में विभक्त करते है तो हम पाते है की एक घटक dE1Sin θ &
dE2 Sin θ परिमाण में समान है लेकिन दिशा में विपरीत है अतः ये एक दूसरे को नष्ट कर देते है।
दूसरा घटक dE1Cosθ &
dE2Cosθ परिमाण में समान है लेकिन दोनों एक ही दिशा में है अतः ये दोनों आपस में जुड़ जाते है , इनका मान ही P बिंदु पर दोनों अल्पांशो के कारण P बिंदु पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की तीव्रता को प्रदर्शित करता है अतः वैद्युत क्षेत्र शीट (परत) के लंबवत P के अनुदिश होगा।
चूँकि आवेश समान रूप से (सतत ) वितरित है अतः इस पर गाउसीय पृष्ठ की कल्पना कर सकते है।
हमने 2r लम्बाई और S अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले बेलनाकार पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) की कल्पना करते है।
इसकी कल्पना इस प्रकार करते है की बिंदु P बेलनाकार पृष्ठ के वृतीय फलक पर हो।
गाउसीय पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश
q = σS
गाउस के नियम से पृष्ठ से पारित विद्युत फ्लक्स
Φ = ∮ E.dS
∮ E.dS = q/ ε0
∮ E.dS = σS/ ε0
बेलनाकार पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) को तीन भागो में बांटा जा सकता है।
1. वृत्तीय फलक (बायां )
2. वृत्तीय फलक (दायां)
3. वक्र पृष्ठ
1. बेलनाकार पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) का वृत्तीय फलक (बायाँ) के विद्युत क्षेत्र व dS में कोण जीरो डिग्री
अतः Cosθ = 1
( θ = 0 )
2. गाउसीय पृष्ठ का वृत्तीय फलक (दायाँ) के विद्युत क्षेत्र व dS में कोण जीरो डिग्री
अतः Cosθ = 1
( θ = 0 )
3. बेलनाकार पृष्ठ (गाउसीय पृष्ठ) dS व विधुत क्षेत्र में कोण 90 डिग्री
अतः Cosθ = 0
( θ = 90 )
अतः कुल विद्युत फ्लक्स बायां व दायां S के कारण होगा अतः
कुल विद्युत फ्लक्स(Φ) = 2E.S ……………eq.1
गॉस के नियम से
Φ = σS/ ε0 ……………eq.2
eq.1 तथा eq.2 से
2E.S = σS/ ε0
अतः कुल विद्युत क्षेत्र
E = σ/ 2ε0
अतः यह हम कह सकते है की यह दुरी व पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता।
समरूप
आवेशित अपरिमित चालक
पट्टिका के
कारण
विद्युत क्षेत्र की
तीव्रता
(electric field intensity due to an uniformly charged
infinite conducting plate ) समरूप आवेशित अपरिमित चालक पट्टिका के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:
माना एक अनन्त विस्तार की चालक प्लेट को संतत रूप से आवेशित किया गया है। आवेशित करने के बाद सम्पूर्ण आवेश चालक पट्टिका के पृष्ठ पर संतत रूप से वितरित हो जाता है , अतः चालक पट्टी के अंदर विद्युत क्षेत्र का मान शून्य होता है।
चालक पट्टिका के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता पट्टिका के अभिलंबवत होगी , यह उसी प्रकार ज्ञात किया जा सकता है जैसे हमने अचालक पट्टिका के अल्पांश लेकर ज्ञात किया था।
यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है की अचालक पृष्ठ को जब आवेशित किया जाता है तो जहाँ आवेश दिया जाता है वहीं विधमान रहता है।
जबकि चालक में यह पृष्ठ पर (दोनों) पर समान रूप से वितरित हो जाता है जिससे चालक पट्टिका में अंदर विद्युत क्षेत्र का मान शून्य होता है।
माना चालक पट्टिका पर पृष्ठ आवेश घनत्व σ है , इस प्लेट के कारण प्लेट के लंबवत r दूरी पर स्थित कोई बिन्दु P पर हमें बिंदु क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
एक बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ की कल्पना करते है , बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश
q = σS
विद्युत फ्लक्स निम्न प्रकार दिया जाता है
Φ = ∮ E.dS = ∮E.dSCosθ
S1 &
S2 पृष्ठ के लिए
1. S1 पृष्ठ के लिए
θ = 0 , Cosθ = 1
2. S2 सूक्ष्म पृष्ठ के लिए
E = 0 , बिंदु चालकों के भीतर स्थित है अतः विधुत क्षेत्र शून्य है।
यहाँ θ , E व S के मध्य कोण है।
S3 पृष्ठ के लिए
θ = 90 , Cosθ = 0
पृष्ठ से परिबद्ध फ्लक्स
Φ = ∮E.dS Cos 0
+ 0 + ∮E.dS Cos 90
Φ = E.S
गाउस के नियम से
पृष्ठ से परिबद्ध फ्लक्स
Φ = σS/ ε0
ऊपर के दोनों समीकरणों से
E.S = σS/ ε0
E = σ/ ε0
समरूप
आवेशित गोलीय
कोश
के
कारण
विद्युत क्षेत्र की
तीव्रता
(electric field intensity due to an uniformly charged
spherical shell ) समरूप आवेशित गोलीय कोश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता :
मान लीजिये एक R त्रिज्या को गोलीय कोश है यहाँ गोलीय कोश का अभिप्राय है की एक गोला जो अन्दर से खोखला है जैसे गेंद।
इस गोलीय कोश पर Q आवेश समान रूप से (संतत) वितरित है।
इस गोलीय कोश पर पृष्ठ आवेश घनत्व (एकांक क्षेत्रफल पर आवेश)
σ = कुल आवेश / कुल क्षेत्रफल
σ =
Q/4πR2
इस गोलीय कोश के केंद्र O से r दूरी पर एक बिंदु P स्थित है इस बिंदु P पर हमें गोलीय कोश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
यह P बिंदु 3 स्थितियों में संभव है
1. जब P बिंदु गोलीय कोश के बाहर स्थित है अर्थात r > R
इस दशा में केंद्र O से r त्रिज्या वाले गोलीय पृष्ठ (गाउसीयन ) की कल्पना करते है।
अतः पृष्ठ से परिबद्ध आवेश = q
अतः गॉसीय पृष्ठ से निर्गत कुल वैधुत फ्लक्स
Φ = q/ε0k
पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E तथा क्षेत्रफल अल्पांश dS दोनों त्रिज्य दिशा में होता है या दूसरे शब्दों में कहे तो E तथा dS की दिशा समान होती है।
चूँकि गाउसीयन पृष्ठ गोलीय आकृति है अतः केंद्र O से गाउसीयन पृष्ठ की दुरी समान (r) होगी।
इसलिए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान भी समान होगा
हम जानते है की
Φ = ∫E.dS
= Q/ε0
चूँकि ∫dS= कुल क्षेत्रफल = 4πr2 = गाउसीयन पृष्ठ का कुल क्षेत्रफल
अतः
Φ = E x 4πr2 = Q/ε0
उपरोक्त सूत्र को देखकर हम यह कह सकते है की गोलीय कोश इस प्रकार व्यवहार करता है जैसे वह एक Q आवेश हो और सम्पूर्ण आवेश केंद्र पर रखा गया हो।
अतः गोलीय कोश जिस पर Q आवेश समान रूप से वितरित हो उसके लिए विद्युत क्षेत्र की तीव्रता वही होगी जो आवेश Q केंद्र पर रखा हो। यह बात बल पर भी लागू होती है।
2. जब बिन्दु P
गोलीय कोश के पृष्ठ पर स्थित है अर्थात (r = R )
इस स्थिति में गाउसीयन पृष्ठ की त्रिज्या R होगी तथा परिबद्ध आवेश Q ही रहेगा।
इसलिए ऊपर वाले सूत्र में r = R रखने पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
3
. जब बिन्दु P गोलीय कोश के पृष्ठ के अंदर स्थित हो (गोले के अंदर)
अर्थात (r < R )
इस स्थिति में बिन्दु P जिस पर हमे विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है वह बिन्दु आवेशित गोलीय कोश के भीतर है।
अतः गाउसीयन पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश शून्य होगा।
क्योंकि आवेशित गोले (चालक) पर आवेश केवल पृष्ठ पर स्थित होता है अंदर नहीं।
Q = 0
Φ = ∫E.dS = Q/ε0 = 0
अतः E = 0
अतः इस स्थिति में विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।
तीनो स्थितियों का सम्मिलित रूप से ग्राफ निम्न प्रकार बनता है।
समरूप
आवेशित चालक
गोले
के
कारण
विद्युत क्षेत्र की
तीव्रता
(electric field intensity due
to uniformly charged conducting sphere ) समरूप आवेशित चालक गोले के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
: यदि किसी भी चालक को आवेश दिया जाता है तो वह सम्पूर्ण आवेश हमेशा चालक की बाह्य पृष्ठ पर वितरित हो जाता है , चालक के भीतर कोई भी आवेश नहीं ठहरता अर्थात पूरा आवेश पृष्ठ पर आ जाता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते है। प्रतिकर्षण बल के कारण आवेश एक दूसरे से दूर जाने का प्रयास करते है और जितना अधिक संभव हो दूर जाते है , चूँकि आवेश पृष्ठ के बाहर जाना सम्भव नहीं है अतः वह आवेश पृष्ठ पर वितरित हो जाता है।
अगर आपके दिमाग में यह प्रश्न आ रहा है की यदि किसी चालक को कुछ धनावेश दिया जाए और फिर कुछ ऋणावेश तो समान प्रकार का आवेश कैसे हुआ ?
तो यह समझ ले की धनावेश व ऋणावेश देने के बाद जो परिणामी आवेश शेष रहता है वह या तो धनात्मक होगा या ऋणात्मक जो एक ही प्रकृति का होगा।
चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र का मान शून्य होता है ,हम ऐसा इसलिए कह सकते है क्योंकि अगर विधुत क्षेत्र शून्य नहीं होता तो चालक के भीतर आवेश एक बल महसूस करते और इस बल के परिमाण स्वरूप मुक्त इलेक्ट्रॉन गति करते जिससे इसमें धारा प्रवाहित होती लेकिन चालकों में स्वतः (बिना बाह्य स्रोत) के धारा प्रवाहित नहीं होती अतः हम कह सकते है की चालक के भीतर आवेश शून्य होता है , चूँकि आवेश शून्य है अतः चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता।
हालाँकि जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है तो आवेश को पृष्ठ पर आने में (वितरण) कुछ समय (नैनो सेकंड ) लगता है इस अल्प समय में चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है लेकिन आवेश इतनी तेजी से सतह पर वितरित होता है की यह विधुत क्षेत्र प्रेक्षित नहीं हो पाता और चालक के भीतर वैधुत क्षेत्र हमेशा शून्य माना जाता है।
चूँकि चालक गोले में सम्पूर्ण आवेश पृष्ठ पर ही वितरित रहता है अतः यह एक समरूप (सतत) आवेशित गोलीय कोश की भांति व्यहवहार करता है और चालक गोले के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता वही होगी जो समरूप आवेशित गोलीय कोश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता हमने ज्ञात की थी।
समरूप
आवेशित अचालक
गोले
के
कारण
विद्युत की
तीव्रता
(electric field intensity due
to uniformly charged non conducting sphere) समरूप आवेशित अचालक गोले के कारण विद्युत की तीव्रता
:
सबसे पहले इस बात पर ध्यान दे की जब एक चालक गोले को आवेश दिया जाता है तो सम्पूर्ण आवेश चालक के पृष्ठ पर वितरित हो जाता है लेकिन जब एक अचालक गोले को आवेश दिया जाता है तो वह उसी स्थान पर बना रहता है जहाँ उसे (आवेश) दिया जाता है क्योंकि अचालक पदार्थ में आवेश गति नहीं कर सकता है।
मान लीजिये एक अचालक गोला है जिसकी त्रिज्या R है तथा इस अचालक गोले पर Q आवेश समान रूप से वितरित है अतः दूसरे शब्दों में कह सकते है की यह Q आवेश गोले के सम्पूर्ण आयतन में समान रूप से वितरित है।
अतः आयतन आवेश घनत्व निम्न प्रकार लिखा जायेगा
ρ = कुल आवेश / कुल आयतन
हमें गोले के केंद्र O से r दूरी पर स्थित P बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है इसलिए हम r त्रिज्या के गोलीय गाउसियन पृष्ठ की कल्पना करते है।
यहाँ बिन्दु P की 3 स्थितियां हो सकती है।
1. जब P बिंदु गोले के बाहर स्थित हो (r > R )
जब P बिंदु गोले के बाहर स्थित हो तथा इस स्थिति में हम P बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते है।
पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश
कुल q = Q
गाउसियन पृष्ठ से सम्बद्ध कुल विद्युत फ्लक्स
Φ = E.S = Q/ε0
S = 4πr2
Φ = E. 4πr2 = Q/ε0
E = Q/4πr2ε0
चूँकि
अतः
Q का मान रखने पर
2.
जब बिंदु गोले के पृष्ठ पर स्थित हो अर्थात r = R
P बिन्दु का दूसरी स्थिति यह बन सकती है की P बिंदु गोले के पृष्ठ पर स्थित है इस दशा में गोले की त्रिज्या R , गाउसियन पृष्ठ की त्रिज्या r के बराबर होगी।
पिछली स्थिति से हमने ज्ञात किया है
E = Q/4πr2ε0
Q का मान रखने पर
चूँकि इस स्थिति में r = R है तो यह मान सूत्र में रखने पर
उपरोक्त दोनों स्थितियों का अध्ययन करने के बाद यह बात स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है की समरूप आवेशित कुचालक के लिए बाहरी बिंदुओं के लिए विद्युत क्षेत्र ऐसे व्यवहार करता है जैसे मानो सम्पूर्ण आवेश Q गोले के केंद्र पर रखा गया है।
3. जब P बिंदु गोले के अंदर स्थित है अर्थात r
< R
जब P बिंदु गोले के अंदर स्थित होगा तो इस स्थिति में एक r त्रिज्या वाले गाउसियन पृष्ठ गोले की कल्पना करते है।
अतः गाउसियन पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश
Q’ = ρ x 4/3 π r2
Q’ = एकांक क्षेत्रफल का आवेश घनत्व x कुल क्षेत्रफल
एकांक क्षेत्रफल का आवेश घनत्व (ρ) = कुल आवेश /कुल आयतन
अतः Q’ का मान में ρ का मान रखने पर
यहाँ गाउसियन पृष्ठ से बाहर व गोले की सतह के मध्य अर्थात दोनों सतहों के मध्य स्थित आवेश (Q –
Q’) के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी।
गाउस के नियम (gauss’s law )
से गाउसियन पृष्ठ से निर्गत कुल वैद्युत फ्लक्स
Φ = E.S = Q’/ε0
S = 4πr2
Φ = E. 4πr2 = Q’/ε0
Q’ का मान रखने पर
Φ = Qr3/R3ε0
E. 4πr2 = Qr3/R3ε0
E = Qr/4πR3ε0
अतः
E = ρr/3ε0
गोले के केंद्र r = 0 पर
मान रखने पर
E = 0
अतः गोले के केंद्र पर वैद्युत क्षेत्र का मान शून्य होता है
आवेशित चालक
की
सतह
पर
बल
force on the surface of charged conductor
(force on the surface of
charged conductor ) आवेशित चालक की सतह पर बल : जैसा की हम सब पढ़ चुके है की जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है तो वह आपस में प्रतिकर्षण बल के कारण सतह पर एकसमान (सतत) रूप से वितरित होता है।
वितरण के बाद भी यदि सतह के किसी सूक्ष्म भाग का अध्ययन किया जाए तो शेष भाग पर उपस्थित आवेश के कारण उस सूक्ष्म भाग में उपस्थित आवेश एक प्रतिकर्षण बल महसूस करता है और इसी प्रकार यदि चालक की सतह के किसी भी अल्पांश की बात करे तो शेष सभी अल्पांशो के कारण वह प्रतिकर्षण बल महसूस करता है इस प्रकार चालक की सतह पर एक बल कार्य करता है , आवेशित चालक की सतह पर इस बल का परिमाण सभी अल्पांशो द्वारा लगने वाले बलों के सदिश योग के बराबर होता है।
और इसी बल के कारण आवेशित चालक पृष्ठ बाहर की तरफ एक दाब महसूस करता है आइये आवेशित चालक की सतह पर लगने वाले बल तथा दाब का मान ज्ञात करते है।
माना एक चालक है और इस चालक के पृष्ठ पर आवेश घनत्व (एकांक क्षेत्रफल पर आवेश ) σ है। अब हम इस चालक के ठीक बाहर तथा अंदर अर्थात चालक के सापेक्ष दो सममित बिंदु लेते है इनको P1 तथा P2 नाम देते है और इन्ही बिंदुओं पर हम चर्चा करते है।
हमने ज्ञात किया था की चालक पृष्ठ के बाहर स्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता σ/ε0 होती है अतः P1 बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
EP1 = σ/ε0
क्योंकि चालक के भीतर आवेश शून्य होता है अर्थात पूरा आवेश चालक की सतह पर वितरित रहता है अतः चालक के भीतर सभी बिन्दुओ पर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
अतः P2 बिंदु पर विद्युत क्षेत्र
EP2 = 0
अब हम इस सम्पूर्ण चालक को दो अल्पांशो में विभक्त करते है
1. एक अल्पांश AB तथा इसका क्षेत्रफल dS
2. चालक का शेष भाग अर्थात ACB भाग
माना AB अल्पांश के कारण इसके निकट बिंदुओं पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E1 तथा व्यक्त करते है तथा ACB अल्पांश (भाग) के द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E2 से प्रदर्शित करते है।
अतः चालक के बाहर स्थित बिंदु P1 पर कुल विद्युत क्षेत्र की तीव्रता AB तथा ACB दोनों अल्पांश के कारण होगी
अतः
EP1 =
E1 + E2
E1 तथा E2 की दिशा समान है।
P2 बिंदु पर अल्पांश के कारण विद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत दिशा में होंगे अतः P2 बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
EP2 =
E1 – E2
चूँकि हम पढ़ चुके है की P2 बिंदु पर कुल विधुत क्षेत्र शून्य है
अतः
EP2 =
0
E1 –
E2 = 0
E1 =
E2
E1 +
E2 = σ/ε0
E2 +
E2 = σ/ε0
2E2 = σ/ε0
E2 = σ/2ε0
अतः ACB के कारण अल्पांश AB पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता σ/2ε0 होगी।
यदि AB का कुल आवेश dq है तो
अल्पांश AB पर बल
dF = E2dq =
(σ/2ε0 )dq
चूँकि dq = σdS
आवेश = आवेश घनत्व x क्षेत्रफल
dF = (σ/2ε0 )σdS
dF = σ2dS/2ε0
चूँकि E = σ/ε0 , σ = Eε0
dF = E2ε0dS/2
सम्पूर्ण पृष्ठ पर लगने वाला बल (कुल बल )
F = ∫E2ε0dS/2 = ∫σ2dS/2ε0
तथा
P = कुल बल /कुल क्षेत्रफल
P = σ2dS/2ε0 = E2ε0/2
विद्युत क्षेत्र के
एकांक
आयतन
में
ऊर्जा
energy per unit volume in an electric field
(energy per unit volume in an electric field ) विद्युत क्षेत्र के एकांक आयतन में ऊर्जा : आवेशित चालक पर समान प्रकृति का आवेश विधमान रहता है और समान प्रकृति का आवेश अन्य आवेश पर प्रतिकर्षण का बल लगाता है इसलिए ये एक दूसरे से जितना दूर हो , जाने का प्रयत्न करते है। यही कारण है की जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है वह पृष्ठ पर समान रूप से वितरित हो जाता है।
आवेशित चालक की सतह पर , सतह के लंबवत अर्थात सतह से बाहर की ओर एक बल कार्य करता है। जब चालक में आवेश की मात्रा को बढ़ाना हो या विद्युत क्षेत्र के आयतन में वृद्धि करना हो तो हमें इस बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ेगा और यह कार्य विद्युत क्षेत्र में ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
अब हम ज्ञात करते है की इकाई आयतन में कितनी ऊर्जा संचित होती है और इकाई आयतन में संचित ऊर्जा के लिए सूत्र की स्थापना भी करेंगे।
माना एक r त्रिज्या का गोलीय आवेश है और इस गोले पर पृष्ठ आवेश घनत्व अर्थात गोले की एकांक क्षेत्रफल का आवेश σ है।
हम आवेशित चालक की सतह पर बल में ज्ञात कर चुके है की गोले की सतह पर बाहर की ओर लगने वाला बल
P = σ2/2ε0
गोले की सतह पर बाहर की तरफ लगने वाला बल
F = दाब x क्षेत्रफल = PA
F = (4πr2) σ2/2ε0
चूँकि गोले की सतह पर बाहर की तरफ एक बल कार्यरत है अतः यदि हमें इसको dr दूरी तक संपीडित करना पड़े तो , dr दूरी तक संपीडन में F के विरुद्ध किया गया कार्य
कार्य = बल x विस्थापन
dW = F.dr
dW = [(4πr2) σ2/2ε0]dr
dr दूरी तक गोले को सम्पीड़ित करने पर इसके आयतन में कमी (विद्युत क्षेत्र के आयतन में वृद्धि )
dV = 4πr2 dr
अतः
dW = (σ2/2ε0)dV
सम्पूर्ण विद्युत क्षेत्र में कुल संचित ऊर्जा
W = U = ∫(σ2/2ε0)dV
W = U = ∫( E2ε0/2)dV
विद्युत क्षेत्र के इकाई आयतन में संचित ऊर्जा का मान या ऊर्जा घनत्व
ऊर्जा घनत्व = कुल संचित ऊर्जा /
कुल आयतन
ऊर्जा घनत्व = σ2/2ε0 = E2ε0/2
यदि निर्वात के स्थान पर अन्य माध्यम उपस्थित है तो ऊर्जा घनत्व
ऊर्जा घनत्व = σ2/2ε = E2ε/2
साबुन
के
आवेशित बुलबुले का
संतुलन equilibrium of charged soap bubble
(equilibrium of charged soap bubble ) साबुन के आवेशित बुलबुले का संतुलन : क्या आप जानते है की साबुन का बुलबुला कैसे संतुलित रहता है या उस पर कौन कौन से बल कार्य करते है ? साबुन का बुलबुला फूटता क्यों है ? इन सभी चीजों के अध्ययन करेंगे और बलों के लिए सूत्र का निर्माण भी करेंगे।
साबुन के बुलबुले पर दो दाब कार्य करते है , एक आंतरिक पृष्ठ पर तथा दूसरा बुलबुले के बाह्य पृष्ठ पर।
साबुन के बुलबुले की आंतरिक पृष्ठ पर वायु का दाब कार्य करता है तथा इसकी बाह्य पृष्ठ पर वायुमंडलीय दाब कार्य करता है।
आंतरिक पृष्ठ पर कार्यरत वायु का दाब , बाह्य पृष्ठ पर उपस्थित वायुमडलीय दाब से अधिक होता है और इसी दाब आधिक्य को ही पृष्ठ तनाव बल संतुलित करता है।
माना एक r त्रिज्या का बुलबुला है और इसका पृष्ठ तनाव T है तो दाब आधिक्य
Pex = 4T/r
बुलबुले के पृष्ठ पर बाहर की ओर वैद्युत दाब σ2/2ε0 कार्यरत रहता है।
इस स्थिति में
Pex + σ2/2ε0 = 4T/r
Pex =
4T/r – σ2/2ε0
जब बुलबुले को आवेशित किया जाए तो एक स्थिति ऐसी आयेगी जब दाब आधिक्य का मान शून्य हो जाता है और इस स्थिति के बाद बुलबुला फुट जाता है।
Pex = 0
4T/r = σ2/2ε0
बुलबुले की त्रिज्या (r)
बुलबुले पर पृष्ठ आवेश घनत्व
बुलबुले पर कुल आवेश q = σ x 4πr2













































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