p-खंड के तत्व (p-Block
Elements)
15
वर्ग
के
तत्वों के
गुण
क्या
क्या
होते
है
properties of elements of 15 block
What
are the properties of elements of 15 classes 15 वर्ग के तत्वों के गुण क्या क्या होते है
पी ब्लॉक एलिमेंट्स :
1. वह तत्व जिनमें आखरी इलेक्ट्रॉन p
कक्षक में पाया जाता है उन्हें p खंड के तत्व कहते हैं
2. यह आवर्त सारणी के
13 से लेकर 18 तक के वर्ग में आते हैं
3. इस खंड में धातु- अधातु व उपधातु आती है
4. इनका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
ns2 np1-6 तक होता है
प्रश्न :
फ्लोरीन की तुलना में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी कम है लेकिन फ्लोरीन क्लोरीन से प्रबल ऑक्सीकारक है
उत्तर :
1. क्लोरीन की बंध वियोजन एंथैल्पी का मान फ्लोरीन से कम होता है
2. F– की जलयोजन एंथैल्पी का मान अधिक होता है
15
वें वर्ग के तत्व :
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(Electronic configuration)
परमाणु क्रमांक |
प्रतीक |
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास |
7 |
N |
[He] 2s2 2p3 |
15 |
P |
[Ne] 3s2 3p3 |
33 |
As |
[Ar] 3d10 4s2 4p3 |
51 |
Sb |
[Kr] 4d10 5s2 5p3 |
83 |
Bi |
[Xe] 4f14 5d10 6s2 6p3 |
2. परमाणु आकार (Atomic
size):
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है बाह्य इलेक्ट्रॉन की आख़िरी इलेक्ट्रॉन से दूरी अर्थार्थ नाभिक से दूरी बढ़ती जाती है अतः परमाणु आकार बढ़ता जाता है
3. आयनन एंथैल्पी (Ionan
anthology):
बाह्यतम कक्षा से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आयनन एंथैल्पी कहती है ,
आकार बढ़ने के साथ-साथ आयनन एंथैल्पी कम होती जाती है
नोट :
इनकी आयनन एंथैल्पी 14 वर्ग के तत्वों से अधिक होती है
4. विद्युत ऋणता
(Electricity loan)
बंद के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने के गुण को विद्युत ऋणता कहते हैं ,
परमाणु का आकार बढ़ने पर विद्युत ऋणता कम होती है
5. भौतिक गुण (physical
properties):
§ इस समूह में नाइट्रोजन गैस है जबकि अन्य सदस्य
ठोस हैं
§ नाइट्रोजन
द्वि परमाणु गैस है
§ N
व P अधातु , As व Sb उपधातु , Bi धातु
§ N
से लेकर As तक गलनाक बढ़ता है इसके बाद गलनांक कम होता जाता है
6. ऑक्सीकरण अवस्था (oxidation
state):
§ इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था
+5 +4 +3 +2 +1 0 -1 -2 -3 होती है
§ इनमें से
+5 , +3 , -3 अधिक सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएं हैं
§ नाइट्रोजन में खाली d
कक्षक नहीं होते हैं अतः NF5 नहीं बनता जबकि p मैं खाली 3d कक्षक होने के कारण PF5 का निर्माण होता है
§ नाइट्रोजन की अधिकतम संयोजकता 4
होती है जबकि अन्य तत्वों की संयोजकता 5होती है
§ Bi
की ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थाई होती है ( अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण)
कुछ
प्रश्न उत्तर
N2 गैस
है
जबकि
अन्य
तत्व
ठोस
अवस्था में
होते
हैं
क्यों
?
प्रश्न 1
: N2 गैस है जबकि अन्य तत्व ठोस अवस्था में होते हैं क्यों ?
उत्तर :
N का आकार छोटा होने के कारण यह दूसरे नाइट्रोजन परमाणु से pπ -pπ बंध बना लेता है अर्थार्थ नाइट्रोजन के परमाणुओं के मध्य तीन बंद पाए जाते हैं
,N2 के अणुओं के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होता है अतः N2 गैस है |
फास्फोरस का परमाणु आकार बड़ा होता है यह pπ
-pπ बंध नहीं बना सकता परंतु प्रत्येक फास्फोरस 3 फास्फोरस के परमाणु से एकल बंध द्वारा जुड़ा रहता है जिससे P4 का निर्माण होता है , अनुभव अधिक होने के कारण वांडरवाल बल अधिक होते हैं अतः फास्फोरस होता है |
प्रश्न 2
: N2 अक्रिय गैस है जबकि फास्फोरस क्रियाशील होता है क्यों ?
उत्तर
: N2 कि बंध वियोजन ऊर्जा बहुत अधिक होती है अतः N2 अक्रिय गैस है
फास्फोरस में प्रत्येक p
का SP3 संकरण होता है इसमें बंध कोण 109’28 मिनट का होना चाहिए परंतु यह मात्र 60’ का होता है जिससे अणु में अत्यधिक तनाव उत्पन्न होता है अतः फास्फोरस अधिक क्रियाशील है |
प्रश्न 3
: R3P=O का अस्तित्व है जबकि
R3N=Oका अस्तित्व नहीं होता है क्यों ?
उत्तर :
P मैं खाली d कक्षक होने के कारण यह है अपनी संयोजकता पांच कर सकता है अतः R3P=O का अस्तित्व है , जबकि N मैं खाली d
कक्षक नहीं होते हैं अतः यह अपनी संयोजकता 5:00 नहीं कर सकता इसलिए R3N=Oका अस्तित्व नहीं होता है |
हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता Hydrogen Perfection in hindi
Hydrogen
Perfection हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता :
यह सभी तत्व हाइड्रोजन से क्रिया करके EH3 प्रकार के यौगिक बनाते हैं |
NH3 |
अमोनिया |
PH3 |
फास्फीन |
AsH3 |
आर्सीन |
SbH3 |
स्टीबीन |
BiH3 |
बिस्मथिन
|
1. NH3 के अतिरिक्त सभी गैस विषैली होती हैं
2. E-H की बंध लंबाई बढ़ने पर बंद सुगमता ( आसानी) से टूटता है जिससे हाइड्रोजन त्यागने की प्रवृति बढ़ती है अर्थार्थ अपचायक गुण बढ़ जाते हैं अतः 15 वर्ग के हाइड्राइड के अपचायक गुणों का बढ़ता क्रम
BiH3 <
SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3
3. E-H की बंध की बंध लंबाई कितनी कम होती है तापीय स्थायित्व अधिक होता है अतः तापीय स्थायित्व का बढ़ता क्रम |
BiH3 <
SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3
4. प्रत्येक योगिक संकरण SP3 होता है इसकी आकृति पिरामिड होती है |
5. अमोनिया में अन्तराणुक हाइड्रोजन बंध पाए जाते हैं अतः अमोनिया का क्वथनांक अधिक होता है जबकि PH3 मैं दुर्बल वांडरवाल बल अधिक होते हैं अतः PH3 का क्वथनांक कम होता है |
प्रश्न 1 : NH3 प्रबल क्षार है क्यों ? (Why is strong
acid ?)
उत्तर : N पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक होने के कारण यह आसानी से लोन पेअर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स त्यागते हैं अतः यह प्रबल क्षार है |
नाइट्रोजन (N2) , (NH3)अमोनिया बनाने की विधि व गुण Nitrogen and Ammonia properties
नाइट्रोजन (N2) (Nitrogen)
बनाने की विधि : गुण
प्रयोगशाला विधि :
1.
NaNO2 + NH4Cl → NaCl
+ N2 + 2H2O
2.
2NaN3→ 2Na + 3N2
3. Ca(N3)2 → Ca +
2N2
3. अमोनियम डाइक्रोमेट को गर्म करने पर
(NH4)2Cr2O7 → N2 + 4H2O + Cr2O3
गुण :
1. यह रंगहीन , गंधहीन, स्वादहीन अक्रिय गैस है
2. O2 से क्रिया
N2 + O2 → 2NO
3. N2+ 3H2 → 2NH3
4 . धातुओं से क्रिया करके यह नाइट्राइड बनाती है
6Li + N2 → 2Li3N
3Mg + N2 → Mg3N2
नोट : नाइट्रोजन का उपयोग क्रायो सर्जरी में किया जाता है।
(NH3)अमोनिया (Ammonia) :
बनाने की विधियां (Methods to make)
1. प्रयोगशाला विधि (Laboratory
method)
2NH4Cl + Ca(OH)2 → CaCl2 + 2H2O + 2NH3
2. औद्योगिक विधि – इसे हैबर विधि द्वारा बनाया जाता है
N2 + 3H2 → 2NH3
अमोनिया की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तें निम्न है
1. इस क्रिया के लिए दाब अधिक होना चाहिए (200 atm)
2. इस क्रिया में ताप कम होना चाहिए अर्थार्थ न्यूनतम ताप 750k
3. लोह चूर्ण उत्प्रेरक का कार्य करता है इसमें K2O तथा Al2O3 मिलाने से उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बढ़ जाती है |
गुण (properties):
1. यह रंगहीन तीक्ष्ण गंध युक्त गैस है
2. किसका जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है
NH3 +
HOH → NH4OH
3. यह फेरिक क्लोराइड व ZnSO4से क्रिया करके क्रमशः फेरिक हाइड्रोक्साइड व जिंक हाइड्रोक्साइड के अवक्षेप बनाती है।
FeCl3 + 3NH4OH → Fe(OH)3 + 3NH4Cl
ZnSO4 + 2NH4OH → Zn(OH)2 + (NH4)2SO4
4. यह कॉपर आयन के विलयन से क्रिया करके नीले कलर का संकुल यौगिक बनाती है
Cu2+ + 4NH3 → [Cu(NH3)4]2+
5 . यह AgCl के श्वेत अवक्षेप को विलेय कर लेती है
AgCl + 2NH3 → [Ag(NH3)2]Cl
HNO3 नाइट्रिक अम्ल क्रियाएं तथा गुण परिक्षण Nitric acid reactions and
properties test
Nitric
acid reactions and properties test (HNO3 नाइट्रिक अम्ल क्रियाएं तथा गुण परिक्षण) नोट
: Note : N2O5 में N की संयोजकता चार होती है।
प्रश्न 1: द्विवयीकृत हो जाता है क्यों ?
उत्तर
: 2NO2 → N2O4
NO2 में विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते है यह अधिक स्थायित्व प्राप्त करने के लिए द्वित्यकृत हो जाता है द्विवयीकृत अणु (N2O4) में सम संख्या इलेक्ट्रॉन होते है।
नाइट्रोजन के ऑक्सी अम्ल :
ये निम्न है।
1.
H2N2O2 हाइपो नाइट्रस अम्ल
2.
HNO2 नाइट्रस अम्ल
3.
HNO3 नाइट्रिक अम्ल
HNO3 नाइट्रिक अम्ल
:
(1) प्रयोगशाला विधि :
NaNO3 + H2SO4 → NaHSO4 + HNO3
(2) औद्योगिक विधि या वर्क लैण्ड आइड विधि :
4NH3 + 5O2 → 4NO + 6H2O
2NO + O2 → 2NO2
3NO2 + H2O → 2HNO3 + NO
प्राप्त HNO3 का आसवन करने पर 68% HNO3 बनता है , सान्द्र H2SO4 द्वारा इसका निर्जलीकरण करने पर 98% HNO3 बनता है।
रासायनिक गुण :
(A) अधातुओं से क्रिया :
1. कार्बन (C) से क्रिया करने पर कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) बनती है
C + 4HNO3 → CO2 + 2H2O + 4NO2
2 . यह सल्फर (s) से क्रिया करके H2SO4 बनाती है
S + 6HNO3 → 6NO2 + 2H2O + H2SO4
Or
S8 + 48HNO3 → 48NO + 16H2O + 8H2SO4
3. यह फॉस्फोरस (P) को फॉस्फेरिक अम्ल (H3PO4) में ऑक्सीकृत कर देता है।
P4 + 20 HNO3 → 4H3PO4 + 4H2O + 20NO2
4. यह I2 को आयोडिक अम्ल (HIO3) में ऑक्सीकृत कर देता है
I2 + 10HNO3 → 10NO2 + 4H2O + 2HIO3
(B) धातुओं से क्रिया :
1. कॉपर से क्रिया
3Cu + 8HNO3 → 3Cu(NO3)2 + 4H2O + 2NO
Cu + 4HNO3 → Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O
2. Zn से क्रिया
4Zn + 10HNO3 → 4Zn(NO3)2 + 5H2O + N2O
Zn + 4HNO3 → Zn (NO3)2
नोट : Cr तथा Al , NO3 में निष्क्रिय हो जाते है क्योंकि इन धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की निष्क्रिय पतली परत बन जाती है।
HNO3 के उपयोग :
1. उर्वरक बनाने में (NH3 +
NO3)
2. नाइट्रो ग्लिसरीन , ट्राई नाइट्रो टॉलूइन (TNT) विस्फोट पदार्थ बनाने में।
नाइट्रेट का परिक्षण या छल्ला परिक्षण या वलय परिक्षण या ring test :
मिश्रण के जलीय विलयन में FeSO4 का ताजा विलयन डालते है , परखनली की दिवार के सहारे सहारे सांद्र H2SO4 डालते है , जिससे भूरे रंग का झल्ला बनता है।
NO3– + 3Fe2+ + 4H+ → 3Fe3+ + NO + 2H2O
[Fe(H2O)6]2+ + NO → [Fe(H2O)5(NO)]2+ + H2O
फास्फोरस (P) के अपरूप Phosphorus in hindi
Phosphorus
in hindi फास्फोरस (P) के अपरूप :
यह निम्न है
श्वेत फास्फोरस (White
phosphorus):
§ यह श्वेत पारभासी मोम के समान ठोस पदार्थ है
§ इसमें लहसुन जैसी गंध आती है
§ इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है
§ यह अंधेरे में चमकता है क्योंकि वायु में इसका ऑक्सीकरण हो जाता है , ऑक्सीकरण से प्राप्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में न होकर प्रकाश के रूप में होती है , इस गुण को स्फुरदीप्ति का गुण भी कहते हैं
§ वायु की उपस्थिति में यह श्वेत धूआ बनाता है
§ इसका अणुसूत्र P4 होता है इसमें फास्फोरस के परमाणु चतुष्फलकीय के रूप में व्यवस्थित रहते हैं
नोट : श्वेत फास्फोरस में प्रत्येक P का SP3 संकरण होता है, जिससे बंध कोण 109’28 मिनट का होना चाहिए परंतु P4 मैं बंध कोण केवल 60 डिग्री का होता है जिससे कोणीय तनाव अधिक होने के कारण क्रियाशीलता अधिक हो जाती है अतः श्वेत फास्फोरस क्रियाशील है |
§ श्वेत फास्फोरस की क्रिया सांद्र NaOH के बिलियन से करने पर विषैली गैस फास्फीन बनती है
§ यह जल में विलय परंतु कार्बन डाई सल्फाइड में विलय होता है
लाल फास्फोरस (Red phosphorus):
§ यह लोहे के समान धूसर रंग का होता है
§ श्वेत फास्फोरस को 573k अक्रिय वातावरण मैं कई दिनों तक गर्म करने पर लाल फास्फोरस प्राप्त होता है
§ यह जलवे CS2 दोनों में अविलय होता है
§ यह श्वेत फास्फोरस से अधिक स्थाई होता है
§ इसमें
P4 की चतुष्फलकीय की इकाइयां श्रंखला के रूप में होती है
काला फास्फोरस (Black
phosphorus):
इसके दो अपरूप ज्ञात है
1. अल्फा – काला फास्फोरस
2. Beta – काला फास्फोरस
इन्हें निम्न प्रकार से बनाया जाता है
लाल फास्फोरस को 803kपर गर्म करने पर एल्फा- काला फास्फोरस बनता है
श्वेत फास्फोरस को उच्च दाब और बंद नली में 473k पर गर्म करने पर Beta- काला फास्फोरस बनता है
काला फास्फोरस परतों के रूप में होता है यह रूप सबसे स्थाई होता है
फास्फीन (PH3) , फास्फोरस ट्राई क्लोराइड (PCl3) बनाने की विधि , गुण , उपयोग
फास्फीन (PH3) (Phosphine)
बनाने की विधियां :
1. स्वेत फास्फोरस की क्रिया NaOH के सान्द्र विलयन से करने पर
P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2
2. कैल्शियम फास्फाइड की क्रिया HCl या H2Oसे करने पर
Ca2P2 +
6HCl → 3CaCl2 + 2PH3
Ca3P2 + 6H2O → 3Ca(OH)2 + 2PH3
गुण (properties) :
1. यह रंगहीन सड़ी मछली के समान गंध युक्त अत्यंत विषैली गैस है।
2. यह CuSO4 तथा मरक्यूरिक क्लोराइड से निम्न प्रकार से क्रिया करती है।
3CuSO4 + 2PH3 → Cu3P2 + 3H2SO4
3HgCl2 + 2PH3 → Hg3P2 + 6HCl
उपयोग (uses):
इसका उपयोग होम सिग्नल में किया जाता है , एक छिद्र युक्त पात्र में कैल्शियम कार्बाइड तथा केल्सियम फास्फाइड लेकर उसे समुद्र में डाल देते हैं , यह जल से क्रिया करके गैस बनाते हैं यह ज्वलनशील होती है अर्थार्थ आग को पकड़ लेती है जिससे पानी के जहाज के आगे आने वाले अवरोध के बारे में पता लग जाता है।
संकरण SP3 होता है।
फास्फीन की ज्यामिति पिरामिडी होती है।
फास्फोरस ट्राई क्लोराइड (PCl3) (Phosphorus tri
chloride) बनाने की विधि :
1. श्वेत फास्फोरस की क्रिया क्लोरीन से करने पर
P4 + 3Cl2 → 4PCl3
2. फास्फोरस की क्रिया थायोनिल क्लोराइड से करने पर
P4 + 8SOCl2 → 4PCl3 + 4SO2 + 2S2Cl2
गुण
(properties):
1. यह रंगहीन द्रव है।
2. एथिल एल्कोहल (C2H5-OH) से क्रिया
3C2H5-OH + PH3 → 3C2H5Cl + H3PO3
3. एसिटिक अम्ल से क्रिया –
3CH3COOH + PCl3 → 3CH3-COCl + H3PO3
4. जल के साथ क्रिया करके सफ़ेद धुआँ देता है
3H2O + PCl3 → 3HCl +
H3PO3
संरचना (structure):
संकरण SP3 होता है।
ज्यामिति पिरामिड होती है।
फास्फोरस पेन्टा क्लोराइड (PCl5) Phosphorus penta chloride
Phosphorus
penta chloride फास्फोरस पेन्टा क्लोराइड
(PCl5) :
बनाने की विधि :
1. श्वेत फास्फोरस की क्रिया क्लोरीन से करने पर –
P4 + 10Cl2 → 4PCl5
2. फास्फोरस की क्रिया सल्फ्यूरिक क्लोराइड से करने पर –
P4 + 10SO2Cl2 → 4PCl2 + 10SO2
गुण :
1. यह हल्के पिले रंग का ठोस पदार्थ है।
2. जल से क्रिया
PCl5 + 4H2O → 5HCl + H3PO4
3. धातुओं से क्रिया –
2Ag + PCl5 → 2AgCl + PCl3
Sn + 2PCl5 → SnCl4 + 2PCl3
4. गर्म करने पर यह वियोजित हो जाता है –
PCl5 →(गर्म करने पर) PCl3 + Cl2
5. एथिल एल्कोहल (C2H5-OH) से क्रिया –
C2H5-OH + PCl5 → C2H5-Cl + POCl3 + HCl
6. ऐसिटिक अम्ल से क्रिया –
CH3COOH + PCl5 → CH5-COCl + POCl3 + HCl
(PCl5) की संरचना :
1. (PCl5) में केंद्रीय परमाणु P का SP3d संकरण होता है।
2. इसकी ज्यामिति त्रिभुजीय द्वी पिरामिडी होती है।
3. इसमें तीन निरक्षीय बंध होते है जबकि दो बंध अक्षीय बन्ध कहलाते है।
4. निरक्षीय बंधो की बन्ध लम्बाई कम तथा अक्षीय बंधो की बन्ध लम्बाई ज़्यादा होती है।
5. अक्षीय बंध निरक्षीय बंधो से अधिक प्रतिकर्षित होते है अतः अक्षीय बन्ध की बंध लम्बाई अधिक होती है।
6. यह संरचना असममित होने के कारण PCl5 को गर्म करने पर यह वियोजित हो जाता है।
7. ठोस अवस्था में यह आयनित होता है क्योंकि ठोस अवस्था में यह PCl4+ (चतुष्फलकीय ) तथा PCl6– (अष्ठफलकीय ) आयनों से मिलकर बना होता है।
फास्फोरस के
ऑक्सी
अम्ल
Oxy acid of phosphorus
Oxy
acid of phosphorus फास्फोरस के ऑक्सी अम्ल :
1. हाइपो फास्फोरस अम्ल (Hypo phosphorus acid):
H3PO2
फ़ॉस्फ़ोनिक अम्ल
एक -OH बंध
एक क्षारकीय अम्ल
दो P-H bond अतः प्रबल अपचायक
P = +1
2. फास्फोरस अम्ल (Phosphorus acid)
H3PO3
फास्फोनिक अम्ल
दो -OH बन्ध
द्वी क्षारकीय अम्ल
एक P-H bond है अतः दुर्बल अपचायक है।
P = +3
3. फॉस्फोरिक अम्ल :
ऑर्थो फॉस्फोरिक अम्ल
H3PO4
तीन -OH बन्ध
त्रि क्षारकीय अम्ल
P = +5
P-H bond में एक भी बंध नहीं है अतः अपचायक नहीं है।
4. पायरो फास्फोरिक अम्ल (Pyro phosphoric acid):
H4P2O7
5. साइक्लो ट्राई मेटा फास्फोरिक अम्ल :
(HPO3)3 को मेटा फास्फोरिक अम्ल कहते है।
6. पोली मेटा फास्फोरिक अम्ल (Poly Meta Phosphoric Acid):
(HPO3)n
7. हाइपो फास्फोरिक अम्ल (Hypo phosphoric acid):
H2P2O6
प्रश्न 1 : फास्फोरस अम्ल को गर्म करने पर असमानुपातन होता है , क्रिया का समीकरण लिखो।
उत्तर : 4H3PO3 → PH3 + 3H3PO4
नोट : वे तत्व जिनमे एक ही तत्व का ऑक्सीकरण व अपचयन होता है उसे समानुपातन कहते है।
16 वें वर्ग के तत्व Elements of 16th Class
Elements of 16th Class 16 वें वर्ग के तत्व :
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :
परमाणु क्रमांक |
तत्व |
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास |
8 |
O |
2[He]
2S2 2P4 |
16 |
S |
10[Ne]
3S2 3P4 |
34 |
Se |
18[Ar]
3d10 4S2 4P4 |
52 |
Te |
36[Kr]
4d10 5S2 5P4 |
84 |
PO |
54[Xe]
4f14 5d10 6S2 6P4 |
नोट : इनका बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास nS2 nP4 होता है |
नोट : इन्हें कैल्कोजोन भी कहते हैं क्योंकि कॉपर के अधिकांश अयस्क किस वर्ग के तत्वों से मिलकर बने होते हैं
2. परमाणु आकार :
ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है अतः परमाणु का आकार बढ़ता जाता है
3. आयनन एंथैल्पी :
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कम होती जाती है
प्रश्न 1 : 15 वर्ग के तत्वों की आयनन एंथैल्पी अधिक होती है जबकि 16 वर्ग के संगत तत्वों की आयनन एंथैल्पी कम होती है क्यों ?
या
N
की आयनन एंथैल्पी O से अधिक होती है क्यों ?
उत्तर : 15 वर्ग के तत्वों का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास nS2 nP3 होता है , P कक्षक अर्ध पूर्ण होने के कारण यह अधिक स्थाई है , अतः 15 वर्ग के तत्वों की आयनन एंथैल्पी अधिक होती है
16 वर्ग के तत्वों का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास nS2 nP4 होता है , यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर अधिक स्थाई विन्यास प्राप्त करना चाहते हैं अतः आयनन एंथैल्पी कम होती है
4. विधुत ऋणता :
आकार बढ़ने पर विधुत ऋणता कम होती जाती है
नोट : F के बाद O की विधुत ऋणता सबसे अधिक होती है
5. इलेक्ट्रॉन बंधुता या इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी :
उदासीन परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर जो ऊर्जा बाहर निकलती है उसे इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं
आकार बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन बंधुता कम होती है
अपवाद :
प्रश्न 1 : S की इलेक्ट्रॉन बंधुता O से अधिक होती है क्यों ?
उत्तर : O का परमाणु आकार छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक होता है , अतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम होती है जिससे इलेक्ट्रॉन बंधुता कम हो जाती है
S का परमाणु आकार बड़ा होने के कारण इलेक्ट्रॉन का घनत्व कम होता है अतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है जिससे इलेक्ट्रॉन बंधुता का मान अधिक होता है
6. भौतिक गुण :
§ O गैस है जबकि अन्य तत्व ठोस अवस्था में है
§ O तथा S अधातु , Se तथा Te उपधातु जबकि Po रेडियो सक्रिय धातु है
§ ऊपर से नीचे जाने पर गलनांक व क्वथनांक बढ़ते जाते हैं
7. ऑक्सीकरण अवस्था :
§ इस वर्ग के तत्वों की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था +6 तथा न्यूनतम ऑक्सीकरण अवस्था -2 होती है
§ ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था प्रायः -2 होती है
अपवाद : OF2 में O की ऑक्सीकरण अवस्था +2 होती है , H2O2 में O की ऑक्सीकरण अवस्था -1 होती है
§ ऑक्सीजन के अतिरिक्त अन्य तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएं +2 , +4 , +6 होती है
§ इस वर्ग के भारी तत्व अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण +4 ऑक्सीकरण अवस्था में अधिक स्थाई होते हैं
8. ऑक्सीजन के सामान्य गुण :
§ इस समूह में O का आकार छोटा होता है
§ इस समूह में O की विधुत ऋणता अधिक होती है
§ O मे खाली d कक्षकों का अभाव होता है
प्रश्न 1 : OF6 नहीं होता जबकि SF6 होता है क्यों ?
उत्तर : O में खाली d कक्षक नहीं होते जबकि S में खाली d कक्षक होते हैं अतः
SF6 का अस्तित्व है
प्रश्न 2 : O2 गैस है जबकि S8 एक ठोस है क्यों ?
उत्तर : O का परमाणु आकार छोटा होने के कारण यह है pπ- pπ bond द्वारा दूसरे ऑक्सीजन परमाणु से द्विबंध बना लेते हैं , अर्थार्थ O2 बनता है , O2 के अणुओं के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होते हैं अतः O2 गैस है
S का आकार बड़ा होता है इसमें pπ- pπ बन्ध नहीं बनता परंतु गंधक के 8 परमाणु एकल बंध से जुड़कर S8 अणु का निर्माण करते हैं , इन अणुओं के मध्य प्रबल वांडरवाल बल होते हैं अतः गंधक ठोस है
हाइड्राइड के गुण , डाई ऑक्सीजन या O2 Hydride properties
हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता या 16 वर्ग के हाइड्राइड :
16 वर्ग के तत्व हाइड्रोजन से क्रिया करके H2E प्रकारके यौगिक बनाते हैं जैसे H2O , H2S , H2Se , H2Te आदि
हाइड्राइड के गुण (Hydride properties):
1. क्वथनांक :
जल के अणुओं के मध्य अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बंध होता है अणुओं के मध्य संगुणन होती है , अतः H2O द्रव है द्रव होने के कारण इसका क्वथनांक अधिक होता है
H2S के अणुओ के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होते हैं अतः यह गैस है , गैस होने के कारण इसका क्वथनांक कम होता है
16
वर्ग के हाइड्राइड के क्वथनांक का बढ़ता क्रम
H2S < H2Se < H2Te < H2O
2. अपचायक गुण :
हाइड्रोजन त्यागने के गुण को अपचायक गुण कहते हैं , E-H bond की बन्ध लंबाई बढ़ने पर हाइड्रोजन त्यागने की प्रवृति बढ़ती है अतः अपचायक गुण बढ़ते हैं
अपचायक का बढ़ता गरम
H2O < H2S < H2Se < H2Te
3. तापीय स्थायित्व :
E-H
बन्ध की बन्ध लंबाई बढ़ने पर बन्ध वियोजन ऊर्जा कम होती जाती है जिससे तापीय स्थायित्व कम होता जाता है
अतः तापीय स्थायित्व का घटता हुआ क्रम
H2O > H2S > H2Se > H2Se
4. अम्लीय गुण :
H+ आयन त्यागने के गुण को अम्लीय गुण कहते हैं , बंध लंबाई बढ़ने पर H+ आयन त्यागने का गुण बढ़ता जाता है अतः अम्लीय गुण बढ़ते जाते हैं
H2O < H2S < H2Se < H2Te
डाई ऑक्सीजन
(Die oxygen) या O2 :
बनाने की प्रयोगशाला विधि :
2KClO3 → 2KCl + 3O2
गुण :
1. यह रंगहीन , गंधहीन , स्वादहीन गैस है
2. यह धातु , अधातु व यौगिकों से क्रिया करके ऑक्साइड बनाती है
2Ca + O2 → 2CaO
4Al + 3O2 → 2Al2O3
P4 + 5O2 → 2P2O5
S + O2 → SO2
CH4 + 2O2 → CO2 + H2O
C2H4 + 3O2 → 2CO2 + 2H2O
ऑक्साइड की परिभाषा क्या है उदाहरण व प्रकार सहित समझाइए
Definition of oxide in hindi types examples ऑक्साइड :
किसी तत्व की ऑक्सीजन से क्रिया करने पर द्वि अंगीय योगिक बनते हैं इन्हें ऑक्साइड कहते हैं
यह दो प्रकार के होते हैं
1. सामान्य ऑक्साइड :
यह संयोजकता के नियमों का पालन करते हैं जैसे : CaO , MgO , Na2O , FeO , Fe2O3 ,PbO , PbO2 ,Al2O3
आदि
2. संयुक्त या मिश्रित ऑक्साइड :
यह संयोजकता के नियमों का पालन नहीं करते जैसे : Fe3O4 ,Pb3O4 आदि
सामान्य ऑक्साइड चार प्रकार के होते हैं :
1. अम्लीय ऑक्साइड (Acidic oxide) :
वह ऑक्साइड जो जल से क्रिया करके अम्ल बनाते हैं उन्हें अम्लीय ऑक्साइड कहते हैं प्राय: अधातु के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं उदाहरण : CO2 , SO2 , N2O5 , Mn2O7 , CrO3 आदि
CO2 + H2O → H2CO3
SO2 + H2O → H2SO3
P2O5 + 3H2O → 2H3PO4
N2O5 + H2O → 2HNO3
SO3 + H2O → H2SO4
Mn2O7 + H2O → 2HMnO4
CrO3 + H2O → H2CrO4
2. क्षारीय ऑक्साइड (Alkaline oxide):
यह जल से क्रिया करके क्षार बनाते हैं
जैसे : CaO , MgO , Na2O आदि
Na2O + H2O → 2NaOH
CaO + H2O → Ca(OH)2
3. उदासीन ऑक्साइड (Neutral oxide):
यह जल से कोई क्रिया नहीं करते
उदाहरण : CO , NO , N2O
4. उभयधर्मी ऑक्साइड :
यह अम्ल व क्षार दोनों से क्रिया कर लेते हैं
जैसे : Al2O3
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
ओजोन (O3) , सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2) गुण Ozone and Sulfur dioxide properties
(Ozone) ओजोन
(O3)
:
बनाने की विधि :
जब शुष्क O2 का निरव विद्युत विसर्जन करते हैं 10% ओजोन बनती है
3O2 → 2O3
गुण :
1. यह पित नीले रंग की गैस है , गहरे नीले रंग का द्रव तथा बैंगनी काले रंग का ठोस है
2. आक्सीकारक गुण – ओजोन के अपघटन से नवजात ऑक्सीजन (O) बनती है ,
यह ऑक्सीजन दूसरे पदार्थ का ऑक्सीकरण कर देती है , ओजोन के इस गुण को आक्सीकारक गुण कहते हैं , यह गुण निम्न है
·
यह PbS को
PbSO4 मैं ऑक्सीकरण कर देती है
PbS + 4O3 →
PbSO4 +
4O2
·
यह आयोडाइड को आयोडीन में ऑक्सी कृत कर देती है
2I + O3 +
H2O → I2 + O2 + 2OH–
Or
2KI + O3 +
H2O → I2 + O2 + 2KOH
नोट :
जब KI बिलियन की क्रिया ओजोन से की जाती है तो आयोडीन मुक्त होती है , इस आयोडीन का अनुमापन हाइपो बिलियन से करने पर ओजोन का मात्रात्मक आकलन किया जाता है
नोट :
पृथ्वी से 20 किलोमीटर ऊंचाई पर प्रकाश की उपस्थिति में ऑक्सीजन गैस ओजोन में परिवर्तित हो जाती है जिस से ओजोन परत बनती है यह पृथ्वी पर पराबैंगनी किरणों को आने से रोकती है इसका क्षय निम्न दो कारणों से हो सकता है
1. जेट विमान से निकलने वाले धुएं में NO उपस्थित रहता है यह ओजोन से क्रिया कर लेता है
NO + O3 → O2 + NO2
2.
फ्रेऑन का उपयोग प्रशीतक तथा एरोसोल के रूप में किया जाता है फ्रेऑन ओजोन परत का क्षय करते हैं
सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2) (Sulfur dioxide):
बनाने की विधि :
1. S
+ O2 → SO2
2. सोडियम सल्फाइड की क्रिया सांद्र H2SO4 से करने पर
Na2SO3 + H2SO4 → Na2SO4 +
H2O + SO2
3. आयन पाइराइट को O2 के साथ गर्म करने पर
4FeS2 + 11O2 → 2Fe2O3 + 8SO2
गुण :
1. यह रंगहीन तीक्ष्ण गंधयुक्त गैस है।
2. जल से क्रिया
SO2 + H2O → H2SO3
3 . NaOH से क्रिया करने पर सोडियम सल्फाइड बनता है इसमें और SO2 गैस प्रवाहित करने पर सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट बनता है।
SO2 + 2NaOH → Na2SO3 + H2O
Na2SO3 + H2O + SO2 → 2NaHSO3
4. क्लोरीन से क्रिया
SO2 + Cl2 → SO2Cl2
5. O2 से क्रिया
2SO2 + O2 → 2SO3
अपचायक गुण :
नमी युक्त SO2 दूसरे पदार्थों को अपचयित कर देती है इस गुण को अपचायक गुण कहते है।
1. यह फेरिक आयन के फेरस आयन में अपचयित कर देती है।
SO2 + 2Fe3+ + 2H2O → SO42- + 2Fe2+ + 4H+
2. यह परमैग्नेट आयन (बैंगनी रंग ) को Mn2+ आयन में अपचयित कर देती है जिससे बैंगनी रंग गायब हो जाता है यह क्रिया SO2 परिक्षण में काम आती है।
2MnO4– + 5SO2 + 2H2O → 5SO42- + 2Mn2+ + 4H+
नोट :
SO2 में अनुनाद के कारण दोनों बंध की बन्ध लम्बाई समान होती है।
सल्फ्यूरिक अम्ल , सल्फर के ऑक्सी अम्ल , उपयोग , गुण , अपरूप
Sulfuric
acid uses and properties सल्फर के ऑक्सी अम्ल :
1. सल्फ्यूरस अम्ल :
H2SO3
S = +4
2. सल्फ्यूरिक अम्ल :
H2SO4
S = +6
3. थायो सल्फ्यूरिक अम्ल
H2S2O3
4. पर ऑक्सो सल्फ्यूरिक अम्ल या कैरो अम्ल :
H2SO5
5. पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल या ओलियम :
H2S2O7
6. पर ऑक्साइड सल्फ्यूरिक अम्ल :
H2S2O8
सल्फ्यूरिक अम्ल :
बनाने की विधि :
इसे सम्पर्क विधि या सस्पर्श विधि से बनाया जाता है , इस विधि के मुख्य बिंदु निम्न है।
1. (S) गंधक की क्रिया (O) वायु से करने पर SO2गैस प्राप्त करते है।
S + O2 → SO2
2. शुद्ध SO2की क्रिया निम्न परिस्थितियों में O2से करने पर सल्फर ट्राई ऑक्साइड गैस प्राप्त करते है।
2SO2 + O2 → 2SO3
SO3 की अधिक मात्रा प्राप्त करने की आवश्यक शर्ते निम्न है।
1. यह क्रिया ऊष्माक्षेपी है अतः SO3 की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए ताप कम होना चाहिए इस क्रिया के लिए न्यूनतम ताप 723k हैं।
2. SO3 की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए दाब अधिक होना चाहिए। (2atm)
3. SO3 की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए (V2O5) उत्प्रेरक काम में लेते है।
4. SO3 का संपर्क सांद्र H2SO4 से करने पर ओलियम प्राप्त होता है।
SO3 + H2SO4 → H2S2O7 (ओलियम)
5. H2S2O7 (ओलियम) में आवश्यकता अनुसार जल मिलाने पर सल्फ्यूरिक अम्ल प्राप्त होता है।
H2S2O7 + H2O → 2H2SO4
उपयोग :
इसे रसायनों का राजा कहते हैं
1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में
2. अभिरंजक बनाने में
3. उर्वरक बनाने में
4. सीसा संचायक सेल में
5. सेल्यूलोज नाइट्रेट बनाने में
6. डिटर्जेंट बनाने में
7. वस्त्र उद्योग में
8. पेट्रोलियम के शोधन में
गुण :
1. यह रंगहीन , गाडा तेलीय द्रव है
2. निर्जलीकरण – यह नमी को अवशोषित कर लेता है
3. यह सुक्रोज से क्रिया करके जल बाहर निकाल देता है जिससे चीनी काली पड़ जाती है
C12H22O11 → 11H2O + 12C
ऑक्सीकारक गुण :
1. यह कार्बन को CO2में ऑक्सीकृत कर देता है।
2H2SO4 +
C → 2H2O + CO2 +SO2
2. यह (S) गंधक को SO2में ऑक्सीकृत कर देता है।
2H2SO4 +
S → 2H2O + 3SO2
3. यह कॉपर को कॉपर सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देता है।
Cu + 2H2SO4 → CuSO4 + 2H2O + SO2
सल्फर के अपरूप :
सल्फर के निम्न दो अपरूप ज्ञात हैं
विषम लंबास |
एकनताक्ष |
रोम्बिक |
मोनो क्लीनिक |
एल्फा गंधक |
Beta गंधक |
इसका घनत्व 2.06 होता है |
इसका घनत्व 1.98 होता है |
इसका गलनांक 385.8k होता है |
इसका गलनांक 393k होता है |
यह 369k से कम ताप पर अधिक स्थाई होता है |
यह 369k से अधिक ताप पर अधिक स्थाई होता है |
यह पीले रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है |
यह रंगीन सुई के समान क्रिस्टल होते हैं |
नोट : गंधक के दोनों अपरूप 369k पर एक दूसरे के साम्य में रहते हैं , इस ताप को संक्रमण ताप कहते हैं
नोट : दोनों अपरूप जल में अविलेय परंतु कार्बन डाई सल्फाइड में विलय होते हैं
S8 की संरचना :
किरीटाकर (crown shape )
प्रश्न : वाष्प अवस्था में गंधक अनुचुंबकीय होती है क्यों ?
उत्तर : वाष्प अवस्था में गंधक का अणुसूत्र S2 होता है जोकि O2 अणु के समान है , इसमें paai अणु कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते है।
17 वें वर्ग के तत्व elements of 17th block
elements of 17th block 17 वें वर्ग के तत्व :
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :
परमाणु क्रमांक |
प्रतिक |
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास |
9 |
Fe |
2[He] 2S2 2P5 |
17 |
Cl |
10[Ne] 3S2 3P5 |
35 |
Br |
18[Ar] 3d10 4S2 4P5 |
53 |
I |
36[Kr] 4d10 5S2 5P5 |
85 |
At |
54[Xe] 4f14 5d10 6S2 6P5 |
नोट : इनका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास nS2 nP5 होता है
नोट : इन्हें हैलोजन कहते हैं जिसका अर्थ है लवण बनाने वाले
नोट : समुद्री जल में यह सोडियम , पोटेशियम , कैल्शियम के क्लोराइड , ब्रोमाइड , आयोडाइड के रूप में पाए जाते हैं , समुद्री घास में यह कार्नेलाइट के रूप में पाए जाते हैं
2. परमाणु आकार :
ऊपर से नीचे जाने पर कक्षों की संख्या बढ़ती जाती है अतः परमाणु का आकार बढ़ता जाता है
3. आयनन एंथैल्पी :
परमाणु का आकार बढ़ने पर इसका मान कम होता जाता है
4. विधुत ऋणता :
परमाणु आकार बढ़ने पर विधुत ऋणता कम होती जाती है
नोट : प्रत्येक आवर्त में हैलोजन की विधुत ऋणता सबसे अधिक होती है क्योंकि प्रत्येक आवर्त में इनका आकार छोटा व प्रभावी नाभिकीय आवेश सबसे अधिक होता है
नोट : आवर्त सारणी में सबसे अधिक विधुत ऋणता F की है क्योंकि इसका आकार छोटा व प्रभावी नाभिकीय आवेश सबसे अधिक होता है
5. इलेक्ट्रॉन बंधुता या इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी :
इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर जो ऊर्जा निकलती है उसे इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी कहते हैं , परमाणु आकार बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी कम होती जाती है
अपवाद :
प्रश्न : Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी F से अधिक होती है क्यों ?
उत्तर : F का परमाणु आकार छोटा होने के कारण इस पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक होता है जिससे आने वाला इलेक्ट्रॉन अधिक प्रतिकर्षण होता है , दूसरे शब्दों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम होती है अतः इलेक्ट्रॉन बंधुता कम होती है
Cl का परमाणु आकार बडा होने के कारण इस पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व कम होता है जिससे आने वाला इलेक्ट्रॉन कम प्रतिकर्षित होता है , दूसरे शब्दों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है अतः इलेक्ट्रॉन बंधुता अधिक होती हैं
नोट : आवर्त सारणी में सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बंधुता वाला तत्व क्लोरीन है
प्रश्न : हैलोजन को इलेक्ट्रॉन बंधुता के घटते क्रम में लिखिए
उत्तर : Cl > F > Br > I
6. भौतिक गुण :
§ F2 पीले रंग की गैस , Cl2 हरे पीले रंग की गैस , Br2 लाल रंग का द्रव , I2 बैंगनी रंग का ठोस है
§ ऊपर से नीचे जाने पर गलनांक व क्वथनांक बढ़ते जाते हैं
§ सभी हैलोजन द्विपरमाण्वीय अणु है
§ सभी हैलोजन रंगीन होते हैं क्योंकि सूर्य के प्रकाश में दृश्य क्षेत्र से भी किरणों को अवशोषित कर लेते हैं जिससे इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा के कक्षको से चले जाते हैं , जब भी यह इलेक्ट्रॉन वापस ऊर्जा के कक्षाओं में जाते हैं तो दृश्य क्षेत्र में प्रकाश विकिरणों को उत्सर्जित करते हैं अतः यह रंगीन दिखाई देते हैं
7. ऑक्सीकरण अवस्था :
§ इनकी न्यूनतम ऑक्सीकरण अवस्था -1 तथा अधिकतम ऑक्सीकरण +7 होती है ,
§ वह हैलोजन जिनमें खाली d कक्षक होते हैं वह +3 , +5 , +7
ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं , ऑक्सीकरण अवस्था में जैन नियम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दर्शाते हैं
§ F केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं , क्योंकि इसकी विधुत ऋणता सबसे अधिक तथा खाली d कक्षको का अभाव होता है
नोट : F का आकार छोटा होने के कारण l.p -l.p (loan pair) प्रतिकर्षण बल अधिक होता है अतः F2 की बंध वियोजन एंथैल्पी कम होती है
क्लोरीन (Cl2) , हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता Chlorine properties and reactions
हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता :
यह हाइड्रोजन से क्रिया करके HX प्रकार के यौगिक बनाते हैं अर्थार्थ HX , HF , HCl , HBr , HI योगिक बनाते हैं
प्रश्न 1 : बंध वियोजन एंथैल्पी का घटता क्रम
उत्तर : HF > HCl > HBr > HI
प्रश्न 2 : अम्लीय प्रकृति का बढ़ता क्रम
उत्तर : HF < HCl < HBr < HI
प्रश्न 3 : क्वथनांक का बढ़ता क्रम
उत्तर : HCl < HBr < HI < HF
प्रश्न 4 : HF का क्वथनांक HCl से अधिक होता है क्यों ?
उत्तर : H-F में अंतर आणविक हाइड्रोजन बंध अधिक होने के कारण संगुणन हो जाता है
क्लोरीन
(Cl2) Chlorine:
बनाने की विधि
1. मैंगनीज डाइऑक्साइड की क्रिया सांद्र HCl से करने पर
MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O + Cl2
2. KMnO4 को सांद्र HCl के साथ गर्म करने पर
2KMnO4 + 16HCl → 2KCl + 2MnCl2 + 8H2O + 5Cl2
3. डेकॉन विधि :
4HCl + O2 → 2H2O + 2Cl2
गुण :
§ यह हरे पीले रंग की तीक्ष्ण गंध युक्त गैस है
§ धातु तथा अधातु से क्रिया
2Na + Cl2 → 2NaCl
2Al + 3Cl2 → 2AlCl3
P4 + 6Cl2 → 4PCl3
S8 + 4Cl2 → 4S2Cl2
2Fe + 3Cl2 → 2FeCl2
§ हाइड्रोजन तथा उसके यौगिकों से क्रिया
H2 + Cl2 → 2HCl
अमोनिया से क्रिया
NH3 + HCl → NH4Cl
§ एक भाग सांद्र HNO3 तथा तीन भाग सांद्र HCl मिलकर अम्ल राज (एक्ता रेजिया) , इसमें कम क्रियाशील धातु जैसे Pe तथा Au धूल जाती हैं
§ दुर्बल अम्ल के लवणों से क्रिया
Na2CO3 + 2HCl → 2NaCl + H2O + CO2
Na2SO3 + 2HCl → 2NaCl + H2O + SO2
NaHCO3 + HCl → NaCl + H2O + CO2
उपयोग :
1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में
2. धातुओं के निष्कर्षण में
18 वें वर्ग के तत्व elements of 18th block in table
elements of 18th block in table 18 वें वर्ग के तत्व :
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :
परमाणु क्रमांक |
तत्व |
इलेक्ट्रॉनिक्स विन्यास |
2 |
He |
1S2 |
10 |
Ne |
[He] 2S2 2P6 |
18 |
Ar |
[Ne] 3S2 3P6 |
36 |
Kr |
[Ar] 4d10 4S2 4P6 |
54 |
Xe |
[Kr] 4d10 5S2 5P6 |
86 |
Rn |
[Xe] 4f14 5d10 6S2 6P6 |
(He) हीलियम के अतिरिक्त सभी का बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक nS2 nP6 विन्यास है , आख़िरी कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह किसी से क्रिया नहीं करते , अतः इन्हें अक्रिय गैस कहते हैं , परंतु विशेष परिस्थिति में यह अन्य तत्वों से क्रिया कर यौगिकों का निर्माण कर लेती है अतः इन्हें उत्कृष्ट गैस भी कहते हैं
नोट : रेडॉन (Rn) रेडियो सक्रिय तत्व है
2. परमाणु आकार :
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कक्षों की संख्या बढ़ती जाती है अतः परमाणु का आकार बढ़ता जाता है
3. आयनन एंथैल्पी :
प्रत्येक आवर्त में इनकी आयनन एंथैल्पी सबसे अधिक होती है , क्योंकि आखरी कक्षा में स्थाई विन्यास होने के कारण इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है अतः आयनन एंथैल्पी सबसे अधिक होती है
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एंथैल्पी कम होती जाती है
4. इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी :
इनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी धनात्मक होती है क्योंकि स्थाई विन्यास होने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है
5. विधुत ऋणता :
आखरी कक्षा में अष्टक पूर्ण होने के कारण यह bond नहीं बनाते अतः इनकी विधुत ऋणता शून्य होती है
6. भौतिक गुण :
§ यह सभी गैसीय अवस्था में होती है
§ स्थाई विन्यास होने के कारण यह सभी एक परमाणु गैस है
§ ऊपर से नीचे जाने पर आकार बढ़ता जाता है अतः आकार बढ़ने पर वांडरवाल बल बढ़ते जाते हैं जिससे क्वथनांक बढ़ते जाते हैं अतः क्वथनांक का बढ़ता क्रम
He < Ne < Ar < Kr < Xe
उपयोग :
§ हीलियम को गुब्बारों में भरा जाता है जिससे मौसम का पूर्व अनुमान लगाया जाता है
§ समुद्री गोताखोर ऑक्सीजन के सिलेंडर में He गैस का उपयोग करते हैं जिससे रक्त में ऑक्सीजन विलेयता कम हो जाती है साथ ही हीलियम रक्त में बहुत कम घुलनशील है
§ Ar का उपयोग विद्युत बल्ब में किया जाता है
§ निम्न तापमान ज्ञात करने के लिए हीलियम तापमापी का उपयोग करते हैं
§ Ne का उपयोग विसर्जन ट्यूब तथा प्रदीप्त बल्बों में विज्ञापन प्रदर्शन हेतु किया जाता है
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