धातु निष्कर्षण
धातु
निष्कर्षण क्या
है
परिभाषा तथा
उदाहरण Metal extraction definition in hindi
Metal extraction definition in hindi धातु निष्कर्षण : क्या है परिभाषा तथा उदाहरण
परिचय :
§ भूमि पर सबसे अधिक पाए जाने वाले प्रथम तत्व क्रमशः O ,
Si , Al है।
§ कम सक्रिय धातुएं जैसे Pt तथा Au प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती है।
§ अधिकांश सक्रीय धातुएँ प्रकृति में यौगिकों के रूप में पायी जाती है जैसे
CuFeS2
, Fe2O3 , FeS2 , ZnS
§ धातुओं के वे यौगिक जो पृथ्वी में पाए जाते है जिन्हे खनन द्वारा बाहर निकाला जाता है उन्हें खनिज कहते है।
§ वे खनिज जिनसे धातु आसानी से तथा कम लागत लगाकर प्राप्त की जाती है उन्ही खनिजों को अयस्क कहते है।
§ सभी अयस्क खनिज होते है परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते
व्याख्या :
Al के दो खनिज ज्ञात है
(1) बॉक्साइड (Al2O3.2H2O)
(2) केओलिनाइट (Al2O3.SiO2.2H2O)
यहाँ बॉक्ससाइड से Al सुगमता से प्राप्त किया जा सकता है अतः केवल बोक्ससाइड को ही अयस्क कहते है।
§ अयस्क के साथ पाए जाने वाले व्यर्थ के पदार्थों को मैट्रिक्स /अघात्री /गैंग कहते है।
§ अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की समस्त विधियों को अयस्क का धातुकर्म कहते है।
लोहे के अयस्क :
हेमेटाइट (Fe2O3)
मैग्नेटाइट (Fe3O4 )
सिडेराइट (FeCO3)
आयरन पाइराइट (FeS2)
कॉपर के अयस्क :
कॉपर पाइराइटीज (CuFeS2)
कॉपर ग्लास (Cu2O)
क्युप्राइट (Cu2O)
मेलेकाइट (CuCO3.Cu(OH)2)
जिंक के अयस्क :
जिकाइट (ZnO)
जिंक ब्लैंड (ZnS)
कैलामाइन (ZnCO3)
एल्युमिनियम के अयस्क :
बॉक्साइड (Al2O3.2H2O)
क्रायोलाइट (Na3AlF6)
द्रवीय धावन
/ गुरुत्वीय पृथक्करण विधि
& चुम्बकीय पृथक्करण विधि
अयस्क के धातुकर्म : द्रवीय धावन / गुरुत्वीय पृथक्करण विधि चुम्बकीय पृथक्करण विधि
अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की निम्न विधियाँ है :
(A)
अयस्क का सान्द्रण :
अयस्क से व्यर्थ के पदार्थ को हटाना अयस्क का सांद्रण कहलाता है।
अयस्क का सांद्रण निम्न विधियों से किया जा सकता है।
(1)
द्रवीय धावन /गुरुत्वीय पृथक्करण विधि
(gravitational separation process of ores) :
जब अयस्क तथा आधात्री के घनत्व में अधिक अंतर होता है तो यह विधि काम में लेते है।
एक ढालू तल वाली मेज पर पिसा हुआ अयस्क रखकर उसमे जल प्रवाहित करते है जिससे आधात्री के हल्के कण बहकर अलग हो जाते है जबकि अयस्क के बाहरी कण मेज शेष रह जाते है।
(2)
चुम्बकीय पृथक्करण विधि
(magnetic separation procedure of iron ore):
चुम्बकीय गुणों पर आधारित अयस्कों का सान्द्रण इस विधि से किया जाता है।
चुम्बक के दो रोलरों के मध्य एक गतिशील पट्टे पर पिसा अयस्क डालते है जिससे अनुचुम्बकीय पदार्थ पट्टे से दूर तथा चुम्बकीय पदार्थ पट्टे की ओर गिरते है।
फेन
प्लवन
/ झाग
प्लवन
विधि
क्या
है
fen palwan ya jhaag aplwan vidhi
fen palwan ya jhaag aplwan
vidhi kiya hai hindi me फेन प्लवन /झाग प्लवन विधि क्या है : सल्फाइडो अयस्क इस विधि से किया जाता है की यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है की सल्फाइड के कण तेल में भीगते है जबकि आधात्री के कण जल में भीगते है।
एक आयताकार पात्र में पिसा हुआ अयस्क , संग्राही , फेन स्थायी कारक , जूल डालकर इसमें वायु प्रवाहित करते है जिससे सल्फाइड के कण झाग के रूप में पानी की सतह पर एकत्रित हो जाते है जबकि आधात्री (मिट्टी) पेंदे में एकत्रित हो जाती है।
संग्राही क्या होते है ?
: वे पदार्थ जो सल्फाइड अयस्क की अक्लेदनियता (non wettability ) को बढ़ा देते है उन्हें संग्राही कहते है।
जैसे चीड़ का तेल , वसीय अम्ल , जेन्थेट
फेन स्थायीकारक क्या होता है
:
वे पदार्थ जो सल्फाइड अयस्क के झागों का स्थायित्व बढ़ा देते है उन्हें स्थायी कारक कहते है।
जैसे ऐनिलीन , क्रीसॉल
नोट : दो सल्फाइड अयस्क को एक दूसरे से पृथक करने के लिए जो पदार्थ काम में आते है उन्हें अवनमक कहते है।
ZnS तथा PbS को एक दूसरे से पृथक करने के लिए अवनमक(NaCN
) काम में लेते है।
अवनमक ZnS से तो क्रिया कर लेता है परन्तु PbS से क्रिया नहीं करता अतः फेन प्लवन विधि में PbS झाग के रूप में पानी की सतह पर एकत्रित हो जाता है।
ZnS
+ 4NaCN = Na2[Zn(CN)4] + Na2S
निक्षालन विधि क्या है बॉक्ससाइड का सान्द्रण
बॉक्ससाइड का सान्द्रण निक्षालन विधि क्या Extraction Process of Aluminium from Bauxite Ore
इस विधि में अयस्क को किसी उपयुक्त विलायक में घोला जाता है यहाँ विलायक को निक्षालक कहते है।
§ बॉक्ससाइड का सान्द्रण (Extraction
Process of Aluminium from Bauxite Ore):
बॉक्साइड Al का अयस्क है इसमें SiO2 , TiO2 , Fe2O3 की अशुद्धियाँ होती है इसे NaOH के सान्द्रण विलयन के साथ गर्म करते है जिससे बॉक्साइड तथा SiO2 की शुद्धि NaOH में विलेय हो जाती है जबकि अन्य अशुद्धियाँ छानकर पृथक कर देते है।
Al2O3 + 2NaOH + 3H2O =
2Na[Al(OH)4]
उपरोक्त विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करते है।
जिससे Al2O3. 3H2O का अवक्षेप बनता है इस अवक्षेप को गर्म करने से एलुमिना प्राप्त होता है।
2Na[Al(OH)4] + 2CO2 =
2NaHCO3 + Al2O3.3H2O
Al2O3.3H2O = Al2O3 + 3H2O
§ चांदी तथा सोने का सान्द्रण भी निक्षालन विधि से किया जाता है इस विधि में NaCN निक्षालक काम में लेते है।
4M + 8CN– + 2H2O + O2 = 4[M(CN)2]– + 4OH–
यहाँ M = Ag/Au
2[M(CN)2]– + Zn =
[Zn(CN)4]2- + 2M
सान्द्रित अयस्क
से
अशुद्ध धातु
प्राप्त करना
pure metal from concentrated ore
obtaining pure metal from
concentrated ore सान्द्रित अयस्क से अशुद्ध धातु प्राप्त करना :
(1) सान्द्रित अयस्क से धातु ऑक्साइड बनाना
(2) धातु ऑक्साइड से अशुद्ध धातु प्राप्त करना
(1)
सान्द्रित अयस्क से धातु ऑक्साइड बनाना
(Making metal oxide from concentrated ore) :
यह दो प्रकार से किया जाता है
(१) निस्तापन :
सान्द्रित अयस्क को वायु की कम मात्रा में गलनांक से कम ताप पर गर्म करते है जिससे नमी तथा CO2 बाहर निकल जाती है।
प्रायः कार्बोनेट तथा जलयोजित ऑक्साइड का ही निस्तापन किया जाता है।
ZnCO3
= ZnO + CO2
CaCO3.MgCO3
= CaO + MgO + 2CO2
Fe2O3.3H2O
= Fe2O3 + 2H2O
(२) भर्जन :
सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति में गलनांक से कम ताप पर गर्म करते है।
प्रायः सल्फाइड अयस्कों का ही भर्जन किया जाता है।
2ZnS
+ 3O2 = 2ZnO + 2SO2
2PbS
+ 3O2 = 2PbO + 2SO2
2Cu2S
+ 3O2 = 2Cu2O + 2SO2
(2)
धातु ऑक्साइड से अशुद्ध धातु प्राप्त करना
(Receiving pure metal from metal oxide) :
धातु ऑक्साइड की क्रिया कोक (कार्बन) या CO से करने पर अशुद्ध धातु प्राप्त होती है।
ZnO +
CO = Zn + CO2
Fe2O3 3C
= 2Fe + 3CO
धातुओं का
शोधन
आसवन
& द्रव
गलन
परिष्करण विधि
, Refinement of metals in hindi
Refinement of metals in hindi धातुओं का शोधन :
धातुओं के शोधन को अनेक विधियाँ है , ये विधियाँ अशुद्धियो तथा धातुओं की प्रकृति पर निर्भर करती है।
(1) आसवन विधि (Distillation method) :
वे धातुएँ जिनका क्वथनांक कम होता है उनका शोधन आसवन विधि से किया जाता है।
जैसे Zn , Hg
(2) द्रव गलन परिष्करण विधि (Fluid Melt Finishing Method):
वे धातुएं जिनका गलनांक कम होता है उनका शोधन इस विधि से किया जाता है जैसे टिन (Sn )
अशुद्ध Sn को ढालू तल वाली भट्टी पर रखकर गर्म करते है जिससे शुद्ध Sn पिघलकर पैंदे में एकत्रित हो जाता है।
जबकि अशुद्धियों का गलनांक अधिक होने पर वे ढालू तल पर शेष रह जाती है।
विधुत
अपघटनी विधि
& मंडल
परिष्करण विधि
Electrolytic decomposition finishing method
(Electrolytic
decomposition process) विधुत अपघटनी विधि : इस विधि द्वारा Cu , Ag , Au आदि धातुओं का शोधन किया जाता है।
एक आयताकार पात्र में से अशुद्ध Cu की मोटी प्लेट को एनोड के रूप में तथा शुद्ध Cu की पतली प्लेट को कैथोड के रूप में व्यवस्थित कर इसमें CuSO4 का विलयन भर लेते है।
विधुत धारा प्रवाहित करने पर अशुद्ध Cu की प्लेट से Cu2+ आयन विलयन में जाते है उतने ही Cu2+ आयन विलयन से शुद्ध कॉपर की प्लेट पर निक्षेपित हो जाते है।
एनोड पर क्रिया Cu = Cu2+ +
2e–
कैथोड पर क्रिया Cu2+ +
2e– = Cu
नोट : Cu के विधुत अपघटनी शोधन में एनोड के नीचे Ag , Au , Pt , Se , Te , Sb की अशुद्धियाँ एकत्रित हो जाती है जिसे एनोड पंक कहते है।
मंडल परिष्करण विधि(Section finishing method) :
सिद्धान्त : यह विधि सिद्धान्त पर आधारित है की अशुद्धियाँ धातु की ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था में अधिक विलेय होती है।
अशुद्ध धातु की छड़ लेकर उसके एक सिरे पर वृताकार गतिशील तापक व्यवस्थित कर देते है उसे धातु की छड़ के एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर ले जाते है जिससे अशुद्धियाँ गलित मंडल में अधिक विलेय हो जाती है जैसे जैसे गतिशील तापक आगे की ओर सरकता जाता है वैसे वैसे गलित मंडल भी आगे की ओर सरकता जाता है जबकि शुद्ध धातु पीछे की ओर क्रिस्टलीकृत हो जाती है यह क्रिया एक ही दिशा में बार बार दोहराते है जिससे सभी अशुद्धियाँ धातु की छड़ के एक सिरे पर एकत्रित हो जाती है इस सिरे को काटकर हटा देते है।
नोट : इस विधि द्वारा धातु तथा अर्द्धचालकों को अतिशुद्ध अवस्था में प्राप्त किया जाता है जैसे B , Ga , In , Si , Ge
वाष्प
प्रावस्था परिष्करण & वर्ण
लेखिकी विधि
Steam phase finishing method in hindi
Steam phase finishing method
in hindi वाष्प प्रावस्था परिष्करण विधि :
सिद्धान्त(Theories) :
धातुओं को वाष्पशील यौगिकों में बदलकर उच्च ताप पर गर्म करने से शुद्ध धातु प्राप्त होती है इसके अन्तर्गत निम्न दो विधियाँ है।
(१) मांड विधि :
इस विधि द्वारा Ni धातु का शोधन किया जाता है।
अशुद्ध Ni की क्रिया CO से करने पर वाष्प शील यौगिक Ni(CO)4 बनता है जिसे गर्म करने पर शुद्ध Ni प्राप्त होता है।
Ni +
4CO = Ni(CO)4
Ni(CO)4 =
Ni + 4CO (450 – 470k)
(२) वॉन आरकैल विधि :
इस विधि द्वारा Ti तथा Zr धातुओं का शोधन किया जाता है।
अशुद्ध Zr की क्रिया I2से करने पर वाष्पशील यौगिक ZrI4 बनता है जिसे उच्च ताप पर गर्म करने से शुद्ध Zr प्राप्त होता है।
Zr +
2I2 = ZrI4
ZrI4 =
Zr + 2I2 (1800k)
वर्ण लेखिकी :
इस विधि द्वारा धातुओं की अतिसूक्ष्म मात्रा की पहचान , पृथकरण , शोधन किया जाता है।
यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है की मिश्रण के घटक अधिशोषक पर अलग अलग मात्रा में अधिशोषित होते है।
एक ब्यूरेट में अधिशोषक पदार्थ (Al2O3) भर लेते है इसमें मिश्रण के घटको का विलयन डालते है।
मिश्रण के घटक अधिशोषक में अलग अलग स्थानों पर अधिशोषित हो जाते है इन्हे बैंड्स कहते है अर्थात वर्ण लेखिकी कहते है। अब ब्यूरेट में विलायक (निक्षालक) डालते है जिससे बेंड्स निचे की और सरकते है इन्हे अलग अलग पात्रों में एकत्रित कर लेते है।
धातुकर्म का
वैधुत
रासायनिक सिद्धांत Meteorological chemical theory of metallurgy
Meteorological chemical
theory of metallurgy धातुकर्म का वैधुत रासायनिक सिद्धांत
धातु कर्म का वैधुत रासायनिक सिद्धान्त :
(1) किसी सैल में मानक मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (ΔG0) निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है। ()
ΔG0 =
– nf E0cell
(2) E0cell का मान धनात्मक होने पर सेल में अभिक्रिया अवश्य घटित होती है।
(3) सेल अभिक्रिया होने के लिए यह भी आवश्यक है की ΔG0 का मान ऋणात्मक होना चाहिए।
अनुप्रयोग :
(1) एलुमिना का विधुत अपघटन :
Al2O3 का गलनांक अधिक तथा यह विधुत का कुचालक होता है।
इसके गलनांक को कम करने के लिए तथा चालकता बढ़ाने के लिए इसमें क्रायोलाइट (Na3AlF6) तथा फ्लुओरस्पाट (CaF2) मिला देते है।
एक लोहे का पात्र लेते है इसकी आन्तरिक सतह पर कार्बन का अस्तर लगा होता है यह कैथोड की तरह कार्य करता है इसमें Al2O3 , Na3AlF6 , CaF2 , का मिश्रण डाल देते है इस मिश्रण में ग्रेफाइट की छडे लटकी रहती है ये छडे एनोड की तरह कार्य करती है।
विधुत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर एल्युमिनियम तथा एनोड पर CO तथा CO2गैस बनती है इस विधि को हॉल हैरॉल्ट विधि भी कहते है। क्रियाविधि
2Al2O3 + 3C
= 4Al + 3CO2
क्रियाविधि
:
Al2O3
= 2Al3+ + 3O2-
कैथोड पर क्रिया :
Al3+ +
3e– = Al
एनोड पर क्रिया :
O2-
+ C = CO + 2e–
2O2- +
C = CO2 + 4e–
(2)रद्दी Cu /निम्न कोटि के कॉपर से कॉपर प्राप्त करना :
रद्दी Cu को अम्ल में विलेय कर लेते है अशुद्धियों को छानकर हटा देते है अब इस विलयन में अधिक सक्रीय धातु Fe अथवा हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करते है जिससे तांबा प्राप्त होता है।
नोट : इसे हाइड्रो धातु कर्म भी कहते है।
Cu2+ +
Fe = Cu + Fe2+
Cu2+
+ H2 = Cu + 2H+
नोट : अधिक सक्रीय धातु Zn डालने से भी ताम्बा प्राप्त किया जा सकता है परन्तु यह लोहे से अधिक महंगा होता है जिससे तांबे की निर्माण लागत बढ़ जाती है।
लोहे
का
धातुकर्म & ढलवा
लोहे
से
पिटवा
लोहा
बनाना
Iron metallurgy in hindi
Iron metallurgy in hindi लोहे का धातुकर्म
: Cast iron making process in chemistry हेमेटाइड से लोहा प्राप्त करने के लिए निम्न पद काम में आते हैं।
(1) चुंबकीय पृथक्करण विधि से अयस्क का सान्द्रण कर लेते है।
(2) वात्या भट्टी में ऊपर से हेमेटाइड , लाइमस्टोन तथा कोक डालते है जिससे निम्न क्रियाएँ होती हैं।
(१)
500-800k पर
3Fe2O3
+ CO = 2Fe3O4 + CO2
Fe3O4
+ 4CO = 3Fe + 4CO2
Fe2O3
+ CO = 2FeO + CO2
(२)
900-1500k ताप
CaCO3
= CaO + CO2
SiO2 +
CaO = CaSiO3
FeO
+ CO = Fe + CO2
वात्या भट्टी के पैंदे में प्राप्त लोहे को कच्चा लोहा कहते है इसमें 4% कार्बन तथा Si ,
S , P , Mn की अशुद्धियाँ होती हैं।
कच्चे लोहे में रद्दी लोहा तथा कोक मिलाकर गर्म करने से ढलवा लोहा प्राप्त होता हैं इसमें 3% कार्बन तथा अन्य अशुद्धिया होती है।
ढलवा लोहे से पिटवा लोहा बनाना
:
ढलवा लोहे में 3% कार्बन तथा Si
, S , P , Mn की अशुद्धियाँ होती हैं।
ढलवे लोहे को परावर्तनी भट्टी के तल में रखकर वायु की उपस्थिति में गर्म करते है इस भट्टी के तल पर Fe2O3 का
अस्तर लगा होता है ढलवे लोहे में उपस्थित कार्बन की अशुद्धि अस्तर से क्रिया करके CO के रूप में बाहर निकल जाती है जबकि अन्य अशुद्धि धातुमल बना लेती है इस लोहे को परावर्तनी भट्टी से बाहर निकाल कर रोलरों की सहायता से दबाते है , जिससे धातुमल बाहर निकल जाता है प्राप्त लोहे को पिटवा लोहा कहते है।
Fe2O3 +
3C = 2Fe + 3CO
कॉपर
पाइराइटिज से
Cu & जिन्काइट (ZnO ) से
Zn प्राप्त करना
Getting zn from zincite in
hindi जिन्काइट (ZnO ) से Zn प्राप्त करना Cu from Copper Pyrite :
जिन्काइट को कोक के साथ गर्म करने से Zn प्राप्त होता है , प्राप्त Zn का आसवन विधि से शोधन कर लेते है।
ZnO +
C = Zn + CO
कॉपर पाइराइटिज से
Cu प्राप्त करना :
यह निम्न पदों में किया जाता है।
(1) अयस्क का सान्द्रण फेन प्लवन विधि से किया जाता है।
(2) भर्जन :
सान्द्रित अयस्क को परवर्तनी भट्टी में रखकर वायु के साथ गर्म करते है , जिससे Cu2S ,
FeS तथा कुछ मात्रा में Cu2O , FeO बनते है इसे मैट कहते है।
2CuFeS2 +
O2 = Cu2S +
2FeS + SO2
(3) बेसेमरी कण :
द्रवित मैट को बेसेमरी परिवर्तक में भर लेते है , जिसकी आंतरिक सतह पर सिलिका (SiO2) का लेप लगा होता है इसमें वायु प्रवाहित करने पर निम्न क्रियाएँ होती है।
2FeS
+ 3O2 = 2FeO + 2SO2
FeO +
SiO2 = FeSiO3
2Cu2S
+ 3O2 = 2Cu2O + 2SO2
Cu2S
+ 2Cu2O = 6Cu + SO2
प्राप्त तांबा 98% शुद्ध होता है इसे फफोलेदार ताम्बा कहते है , इसका विधुत अपघटन शोधन किया जाता है।
प्रश्न : Cu
के धातुकर्म में SiO2 का महत्व बताइये।
उत्तर : सिलिका FeO की अशुद्धि से क्रिया कर उसे धातुमल के रूप में बाहर निकाल देता है।
Feo + SiO2
= FeSiO3
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