chemistry12th chapter-4 रासायनिक बल गतिकी (Chemical Kinetics)

 

रासायनिक बल गतिकी

अभिक्रिया वेग रासायनिक बल गतिकी Reaction velocity in hindi chemical kinetics

रासायनिक बल गतिकी : रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत अभिक्रिया वेग , वेग को प्रभावित करने वाले कारक तथा अभिक्रिया की क्रिया विधि का अध्ययन किया जाता है उसे रासायनिक बल गतिकी कहते है।

अभिक्रिया वेग :

इकाई समय में क्रियाकारक या क्रियाफलो की सान्द्रता में हुए परिवर्तन को अभिक्रिया वेग कहते है।

अभिक्रिया वेग = क्रियाकारक या क्रियाफलो की सान्द्रता में  परिवर्तन  / परिवर्तन में लगा समय

नोट : अभिक्रिया वेग की इकाई mol L−1 s−1 है।

समय के साथ साथ क्रिया कारको की सान्द्रता कम होती जाती है जबकि क्रियाफलो (उत्पाद) की संख्या बढ़ती जाती है।

द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम से

अभिक्रिया का वेग क्रियाकारको की सान्द्रता के समानुपाती होता है।  प्रारम्भ में क्रियाकारको की सांद्रता अधिक होती है अतः अभिक्रिया का वेग भी अधिक होता है।  समय के साथ साथ क्रियाकारको की सान्द्रता कम होती जाती है अतः अभिक्रिया का वेग भी कम होता जाता है परन्तु अभिक्रिया का वेग कभी शून्य नहीं होता क्योंकि अभिक्रिया वेग समय अक्ष के अन्तः स्पर्शी होता है।

 

उपरोक्त कथन से स्पष्ट है की अभिक्रिया निश्चित वेग से घटित नहीं होती है अतः अभिक्रिया वेग दो नए पदों

औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग के रूप में व्यक्त करते है।

# Reaction velocity (अभिक्रिया वेग) in hindi chemical kinetics अभिक्रिया वेग रासायनिक बल गतिकी

 

तात्क्षणिक वेग क्या है रसायन विज्ञान में परिभाषा तथा उदाहरण Instant velocity in hindi

Instant velocity (तात्क्षणिक वेग ) in hindi chemistry definition and examples तात्क्षणिक वेग क्या है रसायन विज्ञान में परिभाषा तथा उदाहरण

तात्क्षणिक वेग :

किसी समय पर अभिक्रिया वेग को तात्क्षणिक वेग कहते है।

इसे ज्ञात करने के लिए सान्द्रता समय के मध्य ग्राफ खींचते है।  उस ग्राफ में समय विशेष पर एक बिंदु का निर्माण करते है इसके सापेक्ष एक स्पर्श रेखा खींचते है।  स्पर्श रेखा का ढाल ही तात्क्षणिक वेग कहलाता है।

तात्क्षणिक वेग  = (± ΔC/Δt)limit Δt = 0

तात्क्षणिक वेग  =          ± dC/dt

उदाहरण 1  :   2NH2O= 4NO2  + O2

   तात्क्षणिक वेग = – 1/2 d[NH2O5]/dt   = +1/4 d[NO2]/dt  =  +d[O2]/dt

वेग नियम या वेग समीकरण या वेग व्यंजक velocity equation in chemistry in hindi

velocity equation in chemistry in hindi (वेग नियम या  वेग समीकरण या वेग व्यंजक) : वेग नियम के अनुसार अभिक्रिया का वेग क्रियाकारको की सांद्रता के गुणन फल के समानुपाती होता है।

अभिक्रिया वेग क्रियाकारको की सांद्रता में सम्बन्ध को जिस समीकरण से व्यक्त किया जाता है उसे वेग समीकरण कहते है।

माना एक समीकरण निम्न है।

N1A + N2B →  उत्पाद

वेग नियम से

अभिक्रिया वेग  [A]n1 [B]n2

अभिक्रिया वेग =  K[A]n1 [B]n2

यहाँ k एक स्थिरांक है जिसे विशिष्ट अभिक्रिया वेग या वेग नियतांक कहते है।

नोट : अभिक्रिया की  स्टॉइकियोमिट्रिक  की सहायता से वेग नियम नहीं लिखा जाता परन्तु यह प्रयोगों द्वारा ज्ञात करके लिखा जाता है।

उदाहरण : CHCl3  + Cl2   = CCl4  + HCl

प्रायोगिक वेग  [CHCl3][Cl2]1/2

उदाहरण : CH3COOC2H5 + H2O  = CH3COOH + C2H5OH

प्रायोगिक वेग  [CH3COOC2H5 ] [H2O]

उदाहरण :2A + 3B →  उत्पाद

के लिए वेग समीकरण लिखो।

अभिक्रिया वेग = k [A]2[B]3

वेग स्थिरांक की इकाई velocity constant unit in hindi

velocity constant unit in hindi (वेग स्थिरांक की इकाई) : माना एक अभिक्रिया निम्न है।

N1A  + N2B   =  उत्पाद

अभिक्रिया वेग  [A]n1 [B]n2

अभिक्रिया वेग = k[A]n1 [B]n2

यहाँ k एक नियतांक है जिसे वेग नियतांक या वेग गुणांक या विशिष्ठ अभिक्रिया वेग कहते है।

इसका मान ताप पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

यदि [A]  = [B] = 1 molL-1 है तो

अतः अभिक्रिया का वेग = k

वेग स्थिरांक को निम्न प्रकार से परिभाषित करते है।  जब क्रिया कारकों की सान्द्रता 1 molL-1 है तो अभिक्रिया वेग को ही वेग स्थिरांक कहते है।

नोट : k की इकाई निम्न प्रकार से ज्ञात करते है।

k = अभिक्रिया वेग / [A]n1 [B]n2

K= (mol/L)1-(n1+n2) x 1/sec

अभिक्रिया की कोटि क्या है परिभाषा order of reaction in hindi

order of reaction in hindi definition अभिक्रिया की कोटि की परिभाषा क्या है ?

अभिक्रिया की कोटि (order of reaction )

माना एक अभिक्रिया निम्न है।

N1A  + N2B   =  उत्पाद

अभिक्रिया वेग  [A]n1 [B]n2

अभिक्रिया वेग = k[A]n1 [B]n2

अतः

अभिक्रिया की कोटि (n) = n1+n2

अभिक्रिया की कोटि प्रयोग द्वारा निर्धारित वेग समीकरण में सांद्रता पदों के घातो के योग के बराबर होती है।

अभिक्रिया की कोटि(n) (order of reaction )

क्रियाकारक के उन अणुओं की संख्या जिनकी सान्द्रता में अभिक्रिया के दौरान परिवर्तन होता है उसे अभिक्रिया की कोटि कहते है।

नोट : अभिक्रिया की कोटि 0 , पूर्णांक , भिन्न में हो सकती है।

प्रश्न 1 : निम्न के लिए अभिक्रिया की कोटि बताइये।

)                वेग = K[A]1/2 [B]3/2

अभिक्रिया की कोटि = 1/2  + 3/2  = 2

)          वेग = K[A]3/2 [B]-1

अभिक्रिया की कोटि = 3/2 -1 = 1/2

प्रथम द्वितीय तथा तृतीत कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई उदाहरण

उदाहरण First second and third order reaction (प्रथम द्वितीय तथा तृतीत कोटि की अभिक्रिया) constant unit in hindi प्रथम द्वितीय तथा तृतीत कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई

निम्न अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई लिखो। 

(1) प्रथम कोटि के लिए

K= (mol/L)1-(n1+n2) x 1/sec

चूँकि n1+n2 = 1 

K= (mol/L)1 – 1 x 1/sec

K= (mol/L) x 1/sec

K= 1  x 1/sec

K=   sec-1

(2) द्वितीय कोटि के लिए

K= (mol/L)1-(n1+n2) x 1/sec

चूँकि n1+n2 = 2 

K= (mol/L)1 – 2 x 1/sec

K= (mol/L)-1   x 1/sec

K=mol-1 L sec-1

(3) तृतीत कोटि के लिए

K= (mol/L)1-(n1+n2) x 1/sec

चूँकि n1+n2 = 3 

 K= (mol/L)1 – 3 x 1/sec

K= (mol/L)-2 x 1/sec

K=mol-2 L2 sec-2

प्रश्न :1 एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम कोटि की तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है। 

1.     अवकलन समीकरण लिखो।

2.     B की सान्द्रता 3 गुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

3.     A और B दोनों की सान्द्रता दोगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 

उत्तर : (1)A प्रथम कोटि की अभिक्रिया है तथा B द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है।

अतः

वेग  [A]1 [B]2

वेग =  k[A]1 [B]2

V  =  k[A] [B]2                     समीकरण

प्रश्नानुसार [B] = [3B]

V’   =  k[A] [3B]2

V‘   =  k[A]9 [B]2                    समीकरण 2

समीकरण 2 तथा समीकरण 1 से

2/1 = k[A]9 [B]2  /k[A] [B]2    

2/1 = 9/1

V‘ /V = 9/1

 V’ = 9V

वेग 9 गुना बढ़ जाता है।

प्रश्नानुसार [B] = [2B] तथा [A] = [2A]

V”    =  k[2A] [2B]2

V”    =  k 2[A]4[B]2

V”    = 8 k[A] [B]2

V”  /V = 8 k[A] [B]2 /k[A] [B]

V”  /V =  8/1

V”   = 8 V

अर्थात वेग 8 गुना बढ़ जाता है।

प्रश्न :2 किसी क्रियाकारक 

        (1)यदि क्रियाकारक की सांद्रता दोगुनी कर दी जाए।

(2) यदि आधी कर दी जाए तो अभिक्रिया वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उत्तर : A प्रथम कोटि की अभिक्रिया है

अतः

वेग  [A]

वेग =  k[A]

V  =  k[A]            समीकरण 1

(1) प्रश्नानुसार  [A] = [2A]

V”    =  k [2A]2

V”    =  k 4[A]2           समीकरण 2

समीकरण 2/ समीकरण 1  = V” /V

k 4[A]/k[A]

V” /V = 4/1

V” = 4V

अर्थात अभिक्रिया वेग 4 गुना बढ़ जायेगा।

(1) प्रश्नानुसार  [A] = [A/2]

V“”    =  k [A/2]2

V“”    =  k[A] /4    समीकरण 3

समीकरण 3 / समीकरण 1 =  V“‘ /V

V“‘ /V = 1/4

V“‘  =  V/4

अर्थात वेग चौथाई हो जाता है।

वेग स्थिरांक अभिक्रिया वेग में अंतर velocity constant and reaction velocity

वेग स्थिरांक  अभिक्रिया वेग में अंतर(velocity constant and reaction velocity difference in hindi) :

 वेग स्थिरांक(velocity constant)

 अभिक्रिया वेग(reaction velocity)

 1. जब क्रियाकारको की सांद्रता एक इकाई हो तो अभिक्रिया वेग को ही वेग स्थिरांक कहते है।

 इकाई समय में पदार्थों की सान्द्रता में हुए परिवर्तन को ही अभिक्रिया वेग कहते है।

 2. यह ताप पर निर्भर है।

 यह पदार्थों की सांद्रता पर निर्भर रहता है।

 3. इसकी इकाई अभिक्रिया की कोटि पर निर्भर रहती है।

 इसकी इकाई mol  L-1 sec-1होती है।

शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्द्धकाल अभिक्रिया वेग समय के मध्य ग्राफ

zero order reaction (शून्य कोटि की अभिक्रिया) definition Half time and graph between velocity and time शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्द्धकाल अभिक्रिया वेग समय के मध्य ग्राफ

शून्य कोटि की अभिक्रिया (zero order reaction) :

जब अभिक्रिया वेग क्रियाकारको की सान्द्रता के शून्य घात के समानुपाती होता है तो उसे शून्य कोटि की अभिक्रिया कहते है।

माना एक अभिक्रिया निम्न है। तथा

 →  उत्पाद 

 माना t =0 समय पर क्रियाकारक की प्रारंभिक सांद्रता [R]0  तथा  t समय पश्चात इसकी सान्द्रता [R] हो जाता है। 

शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए 

अभिक्रिया  का वेग  [R]

अभिक्रिया  का वेग -d[R]/dt  = k[R]0

चूँकि [R]= 1 

अतः  -d[R]/dt  = k 

– (माइनस ) से गुना करने पर। 

d[R] = – k dt 

d[R] = ∫ – k dt 

[R] = -kt  + I         . . . . समीकरण

यहाँ I समाकलन स्थिरांक है। 

इसका मान निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते है। 

यदि t = 0 है तो [R] = [R] होगा। 

अतः समीकरण 1 से 

[R]  =  -kt + [R]

kt = [R]0  – [R] 

k = ([R]0  – [R] )/t 

यह शून्य कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण कहलाता है। 

शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्द्धकाल ज्ञात करना :

किसी अभिक्रिया के 50% पूर्ण होने में लगे समय को उस अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल कहते है। 

इसे t1/2 से व्यक्त करते है। 

शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए   

 k = ([R]0  – [R] )/t 

या 

 t = ([R]0  – [R] )/k

यदि t  = t 1/2 है तो 

[R] = [R]0/2 


1/2 = ([R]0  – [R]0/2 )/k

1/2 =[R]/2k 

या 

1/2   [R]0

अतः 

शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल क्रियाकारको की प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती होता है। 

प्रश्न 1 : शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए अभिक्रिया वेग  समय के मध्य ग्राफ खींचिए। 

उत्तर : अभिक्रिया का वेग    [R]0

      अभिक्रिया का वेग     = k[R]0

अभिक्रिया का वेग = k 

 

शून्य कोटि की अभिक्रिया उदाहरण सहित प्रश्नोत्तर zero order reaction questions

zero order reaction (शून्य कोटि की अभिक्रिया) question answer examples in hindi उदाहरण सहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 2 : शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए समय तथा क्रिया कारकों की बची हुई पदार्थ की मात्रा [R]

 के मध्य ग्राफ खींचिए। 

उत्तर : शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए

k= ([R]0  – [R] )/ t

tk – [R]0  – [R]

– (माइनस) से गुणा करने पर

[R] = -tk + [R]0

y = -mx + c

उपरोक्त समीकरण y = -mx + c जैसी है।  यह समीकरण सरल रेखा की समीकरण है परन्तु यह ऋणात्मक ढाल वाली होती है।

यदि [R] t के मध्य ग्राफ खिंचा जाए तो यह निम्न प्रकार से आता है।

प्रश्न 3 : एक अभिक्रिया के लिए क्रियाकारको की प्रारंभिक सांद्रता 0.4M तथा वेग स्थिरांक 2.5 x  10-4 molL-1sec-1 है। तो अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल ज्ञात करो। 

उत्तर : यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है।  वेग स्थिरांक की इकाई के आधार पर।

1/2 =[R]0 /2k 

[R]= 0.4M

k = 2.5 x   10-4

   1/2 = ?

1/2 = 0.4 / 2 x 2.5 x   10-4

1/2 =  800 सेकंड

प्रश्न 4 : शून्य कोटि की अभिक्रिया के उदाहरण लिखिए। 

उत्तर : (1) सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में H Clकी  क्रिया

H+ Cl2   = 2HCl

अभिक्रिया वेग  [H2]0 [ Cl2]0

अभिक्रिया वेग = k

(2) अमोनिया का प्लेटिनम (pt) उत्प्रेरक की उपस्थिति में तापीय वियोजन

2NH3  →  N2 + 3H2

अभिक्रिया वेग [NH3]0

इस क्रिया में प्लेटिनम की सतह अमोनिया गैस से संतृप्त रहती है क्रिया से पूर्व तथा क्रिया के बाद pt की सतह पर अमोनिया की सांद्रता में परिवर्तन नहीं होता अतः यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है।

प्रश्न 5 : शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई बताओं। 

उत्तर : शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई molL-1sec-1 है।

प्रथम कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण तथा अर्द्ध आयुकाल

First order reaction (प्रथम कोटि की अभिक्रिया) velocity equation and half time with examples and question answers velocity equation and half time with examples

प्रथम कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण :

जब किसी अभिक्रिया का वेग क्रियाकरको की सांद्रता के प्रथम घात के समानुपाती होता है।  तो इसे प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते है। 

माना एक अभिक्रिया निम्न है। 

    R  → उत्पाद 

 माना प्रारम्भ में अर्थात t = 0 समय पर क्रियाकारक की प्रारंभिक सांद्रता [R]0 हैसमय पश्चात इसकी सांद्रता [R] है। 

 अभिक्रिया वेग     [R]

                = – d[R]/dt  = k[R]

यहाँ k प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक है।  उपरोक्त समीकरण को प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अवकल वेग समीकरण कहते है। 

या 

– d[R]/[R] = k dt

– (माइनस) से गुणा करने पर 

 d[R]/[R] = – k dt

समाकलन करने पर 

d[R]/[R] = ∫ – k dt

ln [R] = -kt + I  .. . . . . . . . .  समीकरण

यहाँ I समाकलन नियतांक है इसका मान निम्न प्रकार से ज्ञात करते है। 

यदि t = 0 है तो [R] =  [R]0होगा। 

अतः 

समीकरण 1 से 

ln [R] = -kt + ln [R]0 

kt = ln [R]0  – ln [R]

kt = ln [R]0 / [R]

kt = 2.303 log [R]0 / [R]

k= (2.303/t ) log [R]0 / [R]

यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण कहलाता है। 

प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्द्ध आयुकाल ज्ञात करना :

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए 

k= (2.303/t ) log [R]0 / [R]

या 

t= (2.303/k ) log [R]0 / [R]

यदि t = t1/2 है तो [R] = [R]0/2 होगा। 

t1/2 = (2.303/k ) log ([R]0) / ([R]0/2)

t1/2 = (2.303/k ) log 2 

चूँकि log 2  = 0.3010 

log 2 का मान रखने पर 

t1/2 = (2.303/k ) x 0.3010 

t1/2 = 0.693 /k

अतः प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्द्धकाल क्रियाकरको की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता। 

प्रश्न 1 : प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्द्ध आयुकाल ज्ञात करो यदि वेग स्थिरांक 

(1) 200 sec-1

(2) 2 Min-1

(3) 4 Year-1

उत्तर : (1)   t1/2 = 0.693 /k

          t1/2 = 0.693 /2 x 10-2

 t1/2 =  3.465 x 10-3 sec

(2)    t1/2 = 0.693 /k

t1/2 = 0.693 /2 

t1/2 = 3.465 x 10-1 Min

(3)  t1/2 = 0.693 /k

t1/2 = 0.693 / 4 

t1/2 = 1.732 x 10-1 Year

प्रथम कोटि की अभिक्रिया का आलेख निरूपण :

(1)प्रथम कोटि की अभिक्रिया के वेग समीकरण से 

ln[R]  =  – kt + ln[R]0

y  = -mx + c (अन्तः खण्ड)

 

(2)प्रथम कोटि की अभिक्रिया के वेग समीकरण  से 

kt = ln [R]0 / [R]

kt = 2.303 log [R]0 / [R]

log [R]0 / [R] = kt / 2.303

 

प्रश्न : प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 60 sec-1 है। क्रियाकारक की प्रारंभिक सांद्रता से 1/16 भाग रह जाने में कितना समय लगता है। 

उत्तर : t = (2.303/k) log [R]0 / [R]

दिया गया है

k = 60 sec-1 

[R]= 1

 [R] = 1/16

t = ?

t = (2.303/60) log 1 /(1/16 )

t = (2.303/60) log 16

t = 46.5 x 10-3

प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दोगुना होता है , सिद्ध कीजिये। 

उत्तर :

t99%  पूर्ण होने में लगा समय

t = (2.303/k) log [R]0 / [R]

t99% = ?

[R]0 = 100

[R]  = 1

t99%  = (2.303/k) log 100  

t99%  = (2.303/k) x 2   [log 100 = 2 ]

t90%  पूर्ण होने में लगा समय 

t = (2.303/k) log [R]0 / [R]  

t90% = ?

[R]0 = 100

[R]  = 10

t90%  = (2.303/k) log 100/10 

t90%  = (2.303/k)               [log 10 = 1 ] 


t99%/
t90% = [(2.303/k) x 2] /  (2.303/k)

t99%/t90% = 2

t99% = 2 x  t90%

 प्रथम कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण निम्न है 

 k  = (2.303/t) log [R]0 / [R]

उपरोक्त समीकरण को निम्न प्रकार से भी व्यक्त कर सकते है।

माना t = 0 समय पर अर्थात प्रारम्भ में क्रिया कारकों की प्रारंभिक सांद्रता a molL-1 है। t समय पश्चात इसका x मोल वियोजित हो जाता है तो t समय पश्चात् इसकी शेष बची मात्रा (a – x) होगी अतः

[R]0 = a

[R]  = (a – x)

k  = (2.303/t) log a /(a – x)

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के उदाहरण

(1) रेडियोएक्टिव पदार्थ का विघटन :

λ = (2.303/t)log(N0/Nt)

यहाँ λ = विघटन स्थिरांक 

      N= रेडियो ऐक्टिव तत्व की प्रारंभिक मात्रा 

      N= T समय पश्चात रेडियो सक्रिय तत्व की बची मात्रा 

उदाहरण 2 : एथिल ऐसिटेट का अम्लीय माध्यम में जल अपघटन :

CH3COOC2H5   + H2O  = C2H5OH   + CH3COOH

अभिक्रिया वेग   (CH3COOC2H5)(H2O)

उपरोक्त क्रिया में जल को अधिक मात्रा में लिया जाता है।  क्रिया के बाद जल की सांद्रता में कोई मापने योग्य परिवर्तन नहीं होता अतः जल की सान्द्रता को स्थिर मान सकते है।

अतः

अभिक्रिया वेग   (CH3COOC2H5)

उपरोक्त समीकरण से स्पष्ट है की अभिक्रिया वेग ऐथिल ऐसिटेट की सांद्रता के प्रथम धातु के समानुपाती है अतः यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

नोट : इस अभिक्रिया की कोटि एक तथा अणुसंख्यता या आणविकता दो है अतः इसे छदम प्रथम कोटि या छ्दम एकाणुकता अभिक्रिया कहते है।

उदाहरण : C12H22O11(sucrose)     +  H2O      =   C6H12O6 (glucose) + C6H12O6(fructose)

उपरोक्त अभिक्रिया कोटि एक आणविकता दो होगा अतः यह छदम एकाणु अभिक्रिया है।

प्रोयोगिक वेग      (C12H22O11)

कोटि तथा आणविकता में अंतर तथा अणु संख्यता या आणविकता क्या है समझाइये

molecularity (अणु संख्यता या आणविकता ) in hindi Difference Between order of reaction and Molecularity कोटि तथा आणविकता में अंतर तथा अणु संख्यता या आणविकता क्या है समझाइये

अणु संख्यता या आणविकता (molecularity) : 

क्रियाकारक के अणुपरमाणु या आयन की वह संख्या जो किसी प्राथमिक अभिक्रिया के घटित होने पर परस्पर पर टकराते है।

नोट : यदि किसी अभिक्रिया के घटित होने में एक/ दो /तीन अणु टकराते है तो उस अभिक्रिया को क्रमशः एकाणुक /द्विअणुक /त्रिअणुक अभिक्रिया कहते है।

उदाहरण :

NH4NO2       =    N2   +  2H2O  (एकाणुक)

2HI   = H2   +  I2   (द्विअणुक)

2NO  +  O2   = 2NO    (त्रिअणुक)

 कोटि तथा आणविकता में अंतर लिखिए

 कोटि

 आणविकता

 1. यह प्रायोगिक मान है।

 यह सैद्धांतिक मान है।

 2. इसका मान शून्य हो सकता है।

 इसका मान कभी भी शून्य नहीं हो सकता।

 3. इसका मान भिन्नाक में हो सकता है।

 इसका मान पूर्णांक में होता है।

 4. प्रयोग द्वारा निर्धारित वेग समीकरण में सांद्रता पदों के घातो का योग कोटि कहलाता है।

 क्रिया कारको के अणुओं की संख्या जो प्रथम अभिक्रिया के घटित होने पर टकराते है।

 5. प्राथमिक जटिल दोनों अभिक्रिया के लिए यह प्रायोगिक वेग समीकरण से ही ज्ञात की जाती है।

 जटिल जटिल अभिक्रियाओं के लिए इसका कोई अर्थ नहीं होता।

किसी गैसीय अभिक्रिया के लिए प्रथम की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण

Integrated velocity equation of first order reaction to gaseous reaction किसी गैसीय अभिक्रिया के लिए प्रथम की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण

छदम एकाणु अभिक्रिया किसे कहते है उदाहरण दीजिये। 

उत्तर : वे अभिक्रिया जिनकी कोटि एक  अणु संख्यता दो होती है उन्हें छदम एकाणु अभिक्रिया कहते है।

उदाहरण : एथिल ऐसिटेट का अम्लीय माध्यम में जल अपघटन इक्षु शर्करा का प्रतिलोपन।

किसी गैसीय अभिक्रिया के लिए प्रथम की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण लिखो। 

निम्न गैस की अभिक्रिया प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

उदाहरण : (सल्फ्यूरिक अम्ल)SO2Cl2(g)     = SO2(g)   + Cl2(g)

माना एक गैसीय अभिक्रिया निम्न है।

A (g)     =  B(g)     +      C(g)

t =0              Pi                 0                    0

tसमय     P– x        x                     x

माना क्रियाकारक का प्रारंभिक दाब = P

t समय बाद कुल दाब P= Pi – x + x = P+ x

या

X = Pt – Pi

t  समय बाद A का आंशिक दाब

PA  =  Pi  – x

PA  =  Pi  – (Pt – Pi)

PA  =  2 P– Pt

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के समाकलित वेग समीकरण से।

K = (2.303/t)log([R]0/[R])

गैसीय अभिक्रिया के लिए

[R]= Pi

[R] = 2 P– Pt

अतः

K = (2.303/t)log(Pi/2 P– Pt)

 स्थिर आयतन पर सल्फ्यूरिक क्लोराइड के प्रथम कोटि के ताप अपघटन पर निम्न आंकड़े प्राप्त हुई। 

SO2Cl2(g)     = SO2(g)   + Cl2(g)

अभिक्रिया वेग की गणना करो जब कुल दाब 0.65 atm है।

 प्रयोग

 समय (s)

 कुल दाब (atm)

 1

 0

 0.5

 2

 100

 0.6

K = (2.303/t)log(Pi/2 P– Pt)

Pi=  0.5

P=0.6

t = 100 सेकंड

K = (2.303/100)log(0.5/2 (0.5) – 0.6)

K = (2.303/100)log(Pi/2 P– Pt)

K = (2.303/100)log(0.5/1 -0.6)

k = (2.303/100)(0.6990 – 0.6020 )

अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक Factors affecting the velocity of the reaction

Factors affecting the velocity of the reaction अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक क्रियाकारक की सांद्रताउत्प्रेरकताप reactors Concentrations, Catalysts, Heating  :

1.     क्रियाकारक की सांद्रता :

अभिक्रिया का वेग क्रियाकारको की सांद्रता के समानुपाती होता है अतः क्रियाकारको की सान्द्रता अधिक होने पर अभिक्रिया का वेग भी अधिक होता है।

2.     उत्प्रेरक 

उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया वेग अधिक हो जाता है क्यूँकि उत्प्रेरक अभिक्रिया अभिक्रिया के लिए कम ऊर्जा रोध वाला काल्पनिक पथ तैयार करते है जिससे उसे अणुओं की संख्या बढ़ जाता है जो इस ऊर्जा रोध को पार कर सके जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

डायग्राम 

3.     ताप 

ताप बढ़ाने से अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।  ताप बढ़ाने से अणुओं की गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है।  जिससे उनमे टक्करें अधिक होती है।  टक्करें अधिक होने पर सक्रियण की ऊर्जा प्राप्त कर लेते है।  जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

अभिक्रिया के वेग को वेग स्थिरांक से भी व्यक्त करते है।  ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान बढ़ता है।  प्रयोगों द्वारा यह पाया गया की 10 डिग्री सेंटीग्रेट ताप बढ़ाने से वेग स्थिरांक का मान दोगुना हो जाता है दूसरे शब्दों में अभिक्रिया का वेग दोगुना हो जाता है।

माना t.c ताप पर वेग स्थिरांक का मान kt है तथा t10 डिग्री सेंटीग्रेट ताप बढ़ाने से वेग स्थिरांक kt+10  हो जाता है

अतः

(kt+10 )/ kt= 2

10 डिग्री सेंटीग्रेट तापंतर पर वेग स्थिरांक के अनुपात को ताप गुणांक कहते है।

प्रश्न : ग्राफ द्वारा समझाइये की 10 डिग्री सेंटीग्रेट ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग दोगुना हो जाता है।

उत्तर : डायग्राम

मैक्सवेल वॉटसमान ने अणुओं के अंश गतिज ऊर्जा में एक ग्राफ खिंचा जिसे मैक्सवेल वितरण वक्र कहते है।

अणुओं का अंश = NE/NT

NE  = गतिज ऊर्जा वाले अणुओ की संख्या

NT  कुल अणुओं की संख्या

इस वक्र का शीर्ष अति सम्भाव्य गतिज ऊर्जा अर्थात अणुओं के सर्वाधिक अंश की गतिज ऊर्जा है।

जब ताप को 10 डिग्री सेंटीग्रेट बढ़ा दिया जाता है तो यह वक्र दायी ओर विस्थापित हो जाता है।  जिससे सक्रिमण  ऊर्जा से अधिक ऊर्जा वाले अणुओ के अंश में दोगुने की वृद्धि हो जाती है।

जिसे ग्राफ में ADF क्षेत्र से व्यक्त है अतः अभिक्रिया का वेग दो गुणा वर्धित हुआ है।

प्रश्न : वेग पर ताप का प्रभाव बताने के लिए आरेनियस समीकरण लिखो। 

उत्तर : K = Ae-Ea/RT

       यहाँ  K = वेग स्थिरांक

A = पूर्वचर घातांकी स्थिरांक या आरेनियस स्थिरांक

Ea    = संक्रियण ऊर्जा (activation energy )

R       = गैस नियतांक

R= 8.314 JK-1mol-1

             T = परमताप

सक्रियण ऊर्जा ज्ञात करने की विधि Method of calculate the activation energy

Method of calculate the activation energy in hindi सक्रियण ऊर्जा ज्ञात करने की विधि :

(1) आलेखी विधि :

K = Ae-Ea/RT

log लेने पर

ln K = ln A – Ea/RT

Y = c – mx

यहाँ ढाल =  – Ea/R

अन्तः  खंड  = ln A

उपरोक्त ग्राफ की सहायता से ढाल का मान ज्ञात करके सक्रियण ऊर्जा ज्ञात कर लेते है।

(2) अलग अलग ताप पर वेग स्थिरांक का मान ज्ञात करके :

आरेनियस समीकरण से

K = Ae-Ea/RT

log लेने पर

ln K = ln A – Ea/RT

माना T1   Tताप पर वेग स्थिरांक का मान क्रमशः K   Kहै तो

ln K1 = ln A – Ea/RT1

ln K2 = ln A – Ea/RT

ln K में से ln K1 को  घटाने पर।

ln K2     ln K1  = ln A –  ln A – Ea/RT+ Ea/RT1

ln K2/K= Ea/RT–  Ea/RT2

ln K2/K=  Ea/R [1/T1   – 1/T2]

2.303 logK2/K1 = Ea/R [T2 – T1 / T1T2]

या

logK2/K= (Ea/{2.303R}) [T2 – T1 / T1T2]

रासायनिक अभिक्रिया टक्कर सिद्धांत या संघट्य सिद्धांत Chemical reactions collision theory

Chemical reactions collision theory (रासायनिक अभिक्रिया टक्कर सिद्धांत) or organizational principles (संघट्य सिद्धांत )

यह सिद्धांत ट्राउटज क्लार्क द्वारा दिया गया।

इस सिद्धांत के मुख्य बिंदु निम्न है।

1.     संघट्य करने वाले क्रियाकारक के अणुओं को कठोर गोले के रूप में माना जाता है।

2.     अणुओं में टक्करें होने से अभिक्रिया घटित होती है।

3.     संघट्य (टक्कर) करने वाले अणुओं की ऊर्जा संक्रियण ऊर्जा से बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए।

4.     टकराते समय अणुओं का उचित अभिविन्यास होना चाहिए।

माना एक अभिक्रिया निम्न है।

A  +  B  =  उत्पाद

वेग  = ZAB x e-Ea/RT

यहाँ ZAB संघट्य आवृति है अर्थात अभिक्रिया मिश्रण के प्रति इकाई आयतन में प्रति इकाई सेकंड में होने होने वाली टक्कर की संख्या है।

यहाँ e-Ea/RT उन अणुओं के अंश को दर्शाता है।  जिनकी ऊर्जा संक्रियण ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक होती है।

उपरोक्त वेग समीकरण सरल अभिक्रिया के लिए सही आंकड़े  देता है परन्तु जटिल अभिक्रियाओं के लिए ये आंकड़े प्रायोगिक मान से भिन्न आते है।

जटिल अभिक्रियाओं के लिए उपरोक्त वेग समीकरण को संशोधित किया गया।

इसमें एक नया गुणांक समावेश किया जिसे प्रायिकता गुणांक या त्रिविमीय कारक कहते है इसे P से व्यक्त करते है। निष्कर्ष

अतः

वेग = P ZAB x e-Ea/RT

निष्कर्ष :

किसी रासायनिक अभिक्रिया के घटित होने के लिए सक्रिय अणुओं में टक्करे होना ही आवश्यक नहीं है परन्तु टकराते समय उनका अभिविन्यास भी होना चाहिए इसे निम्न उदाहरण द्वारा समझाया गया है।

समीकरण :

CH3-Br  + OH   = CH3-OH + Br

डायग्राम ??

अभिक्रिया वेग  सक्रियण ऊर्जा :

किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए यह आवश्यक है की क्रियाकारक के अणुओं के पास निश्चित न्यूनतम ऊर्जा होनी चाहिए जिससे की वे क्रियाफल में बदल जाए इस ऊर्जा को देहली ऊर्जा कहते है।

जिन अणुओं की ऊर्जा देहली ऊर्जा से कम होती है वे अपनी ऊर्जा को देहली ऊर्जा के बराबर करने के लिए कुछ अतिरिक्त ऊर्जा ग्रहण करते है इस ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते है।

माना एक समीकरण निम्न है।

H2  +  I2   = 2HI

डायग्राम ??

सर्वप्रथम क्रियाकारक के सक्रीय अणु परस्पर टकराकर सक्रीय संकुल का निर्माण करते है।  सक्रीय संकुल अत्यधिक ढीले बंध वाला अणु है जिसकी ऊर्जा सबसे अधिक होती है , यह अस्थायी होता है तथा क्रियाफलो में विभक्त हो जाता है।

सक्रियण ऊर्जा = देहली ऊर्जाक्रियाकारक के अणुओं की औसत ऊर्जा

डायग्राम 

नोट : सक्रियण ऊर्जा कम होने पर अभिक्रिया वेग अधिक होता है। सक्रियण ऊर्जा अधिक होने पर अभिक्रिया वेग कम होता है।

 

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