chemistry12th chapter-11 अल्कोहल, फेनोल और ईथर (Alcohols, Phenols and Ethers)

 अल्कोहल, फेनोल और ईथर 

एल्कोहल समावयवता , अल्कोहल का वर्गीकरण , समावयवता Classification of Alcohol

परिचय :

1.     जब एल्केन में -H के स्थान पर -OH आता है तो उन्हें एलीफैटिक एल्कोहल कहते है।

RH → R-OH

2.     जब बेंजीन में से -H के स्थान पर -OH समूह जुड़ता है तो उन्हें ऐरोमैटिक एल्कोहल (फिनॉल) कहते है।

नोट :

 नाम

 बंध

 समूह

 alkanol

 –  (single bond )

 -OH

 alkenol

 = (double bond)

 -OH

 alkynol

 ≡ (triple bond)

 -OH

 

 alkandiol

 दो -OH समूह

 alkantriol

तीन -OH समूह

एल्कोहल का वर्गीकरण (Classification of Alcohol):

-OH समूह की संख्या के आधार पर इन्हे तीन भागों में बांटा गया है।

1.     मोनो हाइड्रिक एल्कोहल –

इनमे एक -OH समूह होता है।

उदाहरण – R-OH (alkanol) , CH3-OH (methynol) , phenol

2.     डाई हाइड्रिक एल्कोहल –

इनमे दो -OH समूह होते है।

उदाहरण : एथिलीन ग्लाइकोल (ethan-1,2 diol) , benzen-1,2 diol

3.     ट्राई हाइड्रिक एल्कोहल –

इनमे तीन -OH समूह होते है।

उदाहरण : ग्लिसरॉल (propan-1,2,3 triol) , benzen-1,2,4 triol

मोनो हाइड्रिक एल्कोहल को पुन: निम्न प्रकार से वर्गीकृत करते है।

वे यौगिक जिनमें C-OH bond में SP3 संकरण होता है

इन्हे निम्न प्रकार से वर्गीकृत करते है

1.     प्राथमिक , द्वितीयक , तृतीयक एल्कोहल :

10 alcohol

20 alcohol

30 alcohol

2.     बेन्जिलिक एल्कोहल –

जब -OH समूह बेंजीन वलय से जुड़े SP3 संकरित कार्बन से जुड़ा होता है तो उन्हें बेन्जिलिक ऐल्कोहल कहते है।

3.     एलिलिक एल्कोहल –

जब -OH समूह कार्बन कार्बन द्विबंध के निकटवर्ती उस कार्बन से जुड़ा होता है जिसका संकरण SP3 हो उन्हें एलिलिक एल्कोहल कहते है।

CH3=CH-CH2-OH  (एलिल एल्कोहल) (pro-2-enol)

CH3-CH=CH-CH2-OH  but-2-enol

 वे यौगिक जिनमे C-OH बंध होता है।

§  वाइनिल एल्कोहल  – उदाहरण : CH2=CH-OH  (ethanol)

§  एरिल एल्कोहलउदाहरण : phenol

समावयवता :

एल्कोहल ईथर एक दूसरे के क्रियात्मक समावयवी होते है क्योंकि दोनों का सामान्य सूत्र CnH2n+2होता है।

अल्कोहल और फिनोल बनाने की विधियां Methods of making alcohol and phenols

अल्कोहल बनाने की विधियाँ (Alcohol forming methods):

1.ग्रिन्यार अभिकर्मक से :

इस विधि द्वारा 10 , 20 , 30 एल्कोहल बनाये जाते है।

§  जब RMgX की क्रिया HCHO से की जाती है तो बने पदार्थ के जल अपघट्न से  10  एल्कोहल बनते है।

§  जब RMgX की क्रिया R-CHO से की जाती है बने पदार्थ के जल अपघट्न से द्वितीयक एल्कोहल बनते है।

§  जब RMgX की क्रिया कीटोन से की जाती है तो बने पदार्थ के जल अपघट्न से 30 एल्कोहल बनते है।

2.     एल्कीन (alkene) की जल योजन से :

यह क्रिया तनु H2SO4 के साथ की जाती है।

नोट : असम्मित एल्कीन में जल का योग मारकोनी कॉफ नियम से होता है।

CH2=CH2 + H2O →  CH3-CH2-OH

क्रियाविधि :

 क्रियाविधि :

यह क्रिया तीन पदों में होती है।

1.     पहले पद में प्रोटॉन ग्रहण किया जाता है जिससे कार्बोकैटायन बनता है।

CH3-CH=CH2 + H+ → CH3+CH-CH3

2.     दूसरे पद में कार्बोकैटायन पर जल का अणु प्रहार करता है।

3 अन्तिम पद में प्रोटोन के निष्कासन से एल्कोहल बनता है।

एल्किन के हाइड्रोबोरोनन ऑक्सीकरण से :  

जब एल्किन की क्रिया डाई बोरोन या बोरेन से की जाती है तो ट्राई एल्किल बोरेन बनता है इसका ऑक्सीकरण H2O2   NaOH से करने पर एल्कोहल बनते है।

1.     3(CH2=CH2) + BH3 →  (CH3-CH2)3-B

(CH3-CH2)3-B + 3NaOH + 3H2O2 →  3H2O + Na3BO3 + 3CH3-CH2-OH

2.     3(CH3-CH=CH2) + BH3 → (CH3-CH2-CH2)3-B

(CH3-CH2-CH2)3-B + 3NaOH + 3H2O2 →  3H2O + Na3BO+ 3CH3-CH2-CH2-OH

एल्डिहाइड कीटोन के अपचयन :

उपस्थिति NaBH4 या  LiAlH4 या  H2/Ni , Pt , Pd

एल्डिहाइड के अपचयन से 10  एल्कोहल जबकि कीटोन के अपचयन से 20 एल्कोहल बनते है।

R-CHO + 2H →  R-CH2-OH

कार्बोक्सिलिक अम्ल अथवा एस्टर का अपचयन LiAlH4 की उपस्थिति में करने पर

नोट : NaBHएस्टर का अपचयन नहीं करता।

फ़िनोल बनाने की विधियाँ :

1.     बेंजीन डाई एजोनियम की क्रिया जल से करने पर

2.     क्लोराइड बेंजीन से

3.     क्यूमिन से

4.     बेंजीन सल्फोनिक अम्ल से क्रिया

एल्कोहल के भौतिक गुण Physical Properties of Alcohol in hindi

Physical Properties of Alcohol in hindi एल्कोहल के भौतिक गुण :

गुण :

1.     कम कार्बन वाले अल्कोहल द्रव अवस्था में जबकि C12से अधिक कार्बन वाले एल्कोहल मोम के समान ठोस अवस्था में होते है।

2.     अणुभार बढ़ने के साथ साथ क्वथनांक बढ़ता जाता है क्योंकि कार्बन परमाणु की श्रृंखला बढ़ने पर वांडरवाल बल बढ़ते है।

CH3-OH < CH3-CH2-OH < CH3-CH2-CH2-OH < CH3-CH2-CH2-CH2-OH

3.     एल्कोहल का क्वथनांक अपने समावयवी ईथर की तुलना में अधिक होता है क्योंकि अल्कोहल में अंतराअणुक हाइड्रोजन बंध के कारण संगुणन हो जाता है।

4.     समावयवी अल्कोहल में वह एल्कोहल जो अधिक शाखित होता है।  उसका क्वथनांक उतना ही कम होता है।

इसके दो कारण है।

§  अधिक शाखित एल्कोहल गोलीय रूप ग्रहण कर लेता है , गोलीय रूप का पृष्ठीय क्षेत्रफल कम होता है जिससे वांडरवाल बल दुर्बल हो जाते है।

§  हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता कम हो जाती है।

5.     एल्कोहल जल में विलेय होते है क्योंकि में जल के साथ हाइड्रोजन बंध बना लेते है।

6.     कार्बन की संख्या बढ़ने पर अर्थात जल विरोधी भाग बढ़ने पर जल के साथ हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता कम हो जाती है अतः जल में विलेयता कम हो जाती है।

नोट : C2H5-OH  जल में विलेय है जबकि C6H5-OH जल में आंशिक विलेय होता है।

प्रश्न 1 : निम्न को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में लिखो।

. Pentan-1-ol , But-1-ol , methanol , ethanol, propan-1-ol , butan-2-ol

.  Pentan-1-ol , Butanol , Butane , ethoxy ethane

Ans :.  methanol < ethanol < propan-1-ol < butan-2-ol < but-1-ol < pentan-1-ol

. Butane < ethoxy ethan < butanol < pentanol

एल्कोहल के रासायनिक गुण Chemical properties of alcohol in hindi

Chemical properties of alcohol एल्कोहल के रासायनिक गुण :

वे अभिक्रिया जिनमे R-O-H bond टूटता है। 

1.     क्रियाशील धातुओं से क्रिया (अम्लीय प्रकृति)  (reaction from active metals (acidic nature)):

सभी एल्कोहल सक्रीय धातु Na , K , Al से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते है।  एल्कोहल की इस प्रवृति को अम्लीय प्रकृति को अम्लीय प्रकृति कहते है।

2R-OH + 2Na →  2R-ONa + H2

2C2H5-OH + 2Na →  2C2H5-ONa + H2

6R-OH + 2Al →  2(R-O-)3Al + 3H2

नोट : फिनॉल की अम्लीय प्रवृति को दर्शाने वाली अभिक्रिया

2C6H5-OH + 2Na →  2C6H5-ONa + H2

C6H5-OH + NaOH →  H2O + C6H5-ONa

नोट : एल्कोहल NaOH से क्रिया नहीं करता है।

सभी एल्कोहल सोडियम से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते है।  एल्कोहल द्वारा हाइड्रोजन त्यागने की प्रवृति को अम्लीय प्रवृति कहते है , यह प्रवृति जितनी ज़्यादा होगी अम्लीय गुण उतने ही अधिक होंगे।

जिस कार्बन पर -OH समूह होता है वह जितने ज़्यादा एल्किल समूह से जुड़ा होगा , +I प्रभाव के कारण ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व ही अधिक हो जाता है जिससे प्रोटॉन त्यागने की प्रवृति कम हो जाती है।

प्रश्न 1 : फीनोल प्रबल अम्लीय स्वभाव का होता है जबकि एथिल एल्कोहल दुर्बल अम्लीय होता है क्यों ?

उत्तर : फिनॉल +R प्रभाव के कारण निम्न अनुनादी संरचनाओं में पाया जाता है।

अनुनादी संरचनाओं को देखने से स्पष्ट है की ऑक्सीजन पर धनावेश जाता है , जिससे O-H बंध के इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन की ओर विस्थापित हो जाते है जिससे H+ आयन बाहर निकलता है।

 H+ आयन बाहर निकलने के बाद फिनेट आयन अनुनाद के कारण अधिक स्थायी होता है अतः फीनोल अम्लीय प्रवृति का होता है।

एल्कोहल में जिस कार्बन पर -OH होता है उसका संकरण SP3 होता है।  S गुण कम होने के कारण उसकी विद्युत ऋणता कम होती है।

जिससे प्रोटोन का निष्कासन आसानी से नहीं होता।  साथ ही H+ आयन त्यागने के बाद बना ऑक्साइड आयन कम स्थायी होता है अतः एल्कोहल दुर्बल अम्लीय स्वभाव के होते है।

आवश्यक बिंदु :

1.     अम्ल की प्रबलता Pkaके व्युत्क्रमानुपाती होता है।

2.     जब फिनॉल में इलेक्ट्रॉन आकर्षि समूह जैसे –NO2जुड़ा है तो फीनोल की अम्लीय प्रवृत्ति बढ़ जाती है जबकि इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह CH3– , CH3-O- जुड़ा हो तो अम्लीय प्रवृत्ति कम हो जाती है।

एस्टरीकरण , PCl5, PX3 , SOCl2 से क्रिया , अल्कोहल का निर्जलीकरण , विहाइड्रोजनीकरण

एस्टरीकरण :

अल्कोहल या फिनॉल की क्रिया कार्बोक्सिलिक अम्ल , अम्ल क्लोराइड , एनहाइड्राइड से करने पर हमेशा एस्टर बनते है।

CH3-COOH + H-O-C2H5   →  CH3-COOC2H + H2O

CH3-COCl + H-O-C2H5   → CH3-COOC2H + HCl

CH3-COCl + H-O-C6H5 →  CH3-COOC6H5 + HCl

वे अभिक्रिया जिनमे R-OH बंध टूटता है

1.     PCl5, PX3 , SOClसे क्रिया

R-OH + PCl5  →  RCl + POCl3 + HCl

3R-OH + PH3 →  H3PO3 + 3R-X

R-O-H + SOCl → R-Cl + SO2 + HCl

2.     एल्कोहल का निर्जलीकरण :

जब एल्कोहल को सान्द्र H2SO4 या H3PO4 की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो एल्कीन बनती है।

CH3-CH2-OH → CH2=CH2 + H2O

प्रश्न : एथेनॉल के निर्जलन की क्रियाविधि लिखिए।

उत्तर :    CH3-CH2-OH → CH2=CH2 + H2O

क्रियाविधि (Mechanism) :

यह क्रिया तीन पदों में होती है।

पहले पद में एथिल एल्कोहल प्रोटोन ग्रहण करके एथिल ओक्सोनियम आयन बनता है।

दूसरे पद में ओक्सोनियम आयन जल का अणु त्यागकर कार्बोकैटायन बनाता है।

कार्बोकैटायन प्रोटोन त्यागकर एथिन बनाता है।

H-CH2+CH2 → H+ + CH2=CH2

एल्कोहल के निर्जलन की क्रियाशीलता का क्रम लिखिए

30 > 20 > 10 alcohol

3.     उत्प्रेरकीय विहाइड्रोजनीकरण :

§  यह क्रिया कॉपर की उपस्थिति में 573k ताप की उपस्थिति में की जाती है।

§  यह 30 ,  20 , 10 alcohol में अंतर के काम आती है।

§   1एल्कोहल से एल्डिहाइड जबकि 2एल्कोहल से कीटोन तथा 3एल्कोहल को निर्जलन से एल्कीन बनते है।

CH3-CH2-OH → H2 + CH3-CHO

4.     ल्यूकास अभिकर्मक से क्रिया :

सांद्र HCl तथा निर्जल ZnCl2 के मिश्रण को ल्यूकास अभिकर्मक कहते है।

सभी एल्कोहल ल्यूकास अभिकर्मक से क्रिया करके R-Cl बनाते है जिससे धुंधलापन दिखाई देता है।

R-OH + HCl → R-Cl + H2O

§  यह 30 ,  20 , 10 alcohol में अंतर के काम आती है।

30 alcohol →  तुरंत

20 alcohol →  5 मिनट बाद

10 alcohol →  30 मिनट बाद R-Cl का धुंधलापन दिखाई देता है।

अतः एल्कोहल की ल्यूकास अभिकर्मक से क्रियाशीलता का क्रम

30 > 20 > 10 alcohol

5.     ऑक्सीकरण :

ऑक्सीकारक – H+/KMnO4 , H+/K2Cr2O7 , OH/ KMnO, di/HNO3

10 एल्कोहल का उपरोक्त पदार्थों की उपस्थिति में ऑक्सीकरण करने से पहले एल्डिहाइड बनते है जिसके ऑक्सीकरण से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।

CH3-OH + (O) → HCHO → HCOOH

CH3-CH2-OH + (O) → CH3-CHO  →  CH3-COOH

नोट : 10 एल्कोहल से केवल एल्डिहाइड बनाने के लिए पिरिडीनियम क्लोरो क्रोमेट (PCC) अभिकर्मक काम में लेते है इसका सूत्र निम्न है।

C5H5N.HCl.CrO3

20 एल्कोहल के ऑक्सीकरण से कीटोन बनते है।

फ़िनॉल का अभिक्रिया , नाइट्रीकरण , ब्रोमोनीकरण , राइमरटीमान , कोल्बे

Phenol reactions फ़िनॉल का अभिक्रिया :

1. इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया :

फीनॉल +R प्रभाव के कारण O P पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक हो जाता है जिससे इलेक्ट्रॉन स्नेही (E+) O P पर प्रहार करता है अतः ये अभिक्रिया O P पर होती है।

ये क्रियाएँ निम्न है।

1. नाइट्रीकरण :

जब फिनॉल की क्रिया तनु HNO3 के साथ की जाती है।   O P नाइट्रोफिनॉल बनती है।

नोट : जब फिनॉल की क्रिया सांद्र HNO3 के साथ सांद्र H2SOकी उपस्थिति में की जाती है तो पिक्रिक अम्ल बनता है।

प्रश्न 1 : O-nitro फिनॉल का क्वथनांक कम है जबकि p -नाइट्रो फिनॉल का क्वथनांक अधिक होता है क्यों ?

उत्तर : O नाइट्रो फिनोल में अन्तः अणुक हाइड्रोजन बंध होता है।  अणुओ के मध्य संगुणन नहीं होता अतः क्वथनांक कम वाष्पशीलता अधिक होती है।

p nitro फिनॉल का क्वथनांक कम होने के कारण इसे भापिन आसव द्वारा अलग किया जा सकता है।

2. ब्रोमोनीकरण :

जब फिनॉल की क्रिया ब्रोमीन के साथ CHClया CS2 की उपस्थिति में की जाती है इसे O P ब्रोमो फिनॉल बनती है।

जब फिनॉल की क्रिया ब्रोमीन जल से की जाती है 2,4,6 ट्राई ब्रोमो फिनॉल का सफ़ेद अवक्षेप बनता है (फिनॉल की पहचान )

3. राइमरटीमान अभिक्रिया :

जब फिनॉल की क्रिया CHCl3  NaOH के साथ की जाती है तो सेलैसिल एल्डिहाइड बनता है।

4. कोल्बे अभिक्रिया :

जब सोडियम फिनेट की क्रिया CO2 के साथ उच्च दाब ताप पर की जाती है तो सोडियम फेनिल कार्बोनेट बनता है जिससे पुनर्विन्यास से सोडियम से लैसिलेट बनता है इसे तनु HCl से क्रिया करने पर सैलैलीक अम्ल बनता है।

5. फिनॉल की क्रिया यशदरज (ज़िंक चूर्ण) के साथ करने पर बेंजीन बनती है।

6. ऑक्सीकरण :

फिनॉल का ऑक्सीकर क्रोमिक अम्ल (H2CrO4अथवा वायु प्रकाश की उपस्थिति में करने पर p बेंजोफिनोन बनता है।

औद्योगिक महत्व के एल्कोहल :

1. मैथिल एल्कोहल इसे काष्ट एल्कोहल या काष्ट स्प्रिट कहते है।

इसे लकड़ी के भंजक आसवन से बनाया जाता है।

मैथिल एल्कोहल की कम मात्रा के सेवन से अंधापन तथा अधिक मात्रा के सेवन से मृत्यु हो सकती है।

2. एथिल एल्कोहल :

इसे अंगूर , गन्ने का रस , मोलेसेज (शीरा)से किण्वन विधि से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 1 : ऐल्कोहल का विकृतिकरण किसे कहते है।

उत्तर : एल्कोहल का उपयोग मदिरा के रूप में किया जाता है इसे पीने के अयोग्य बनाने के लिए इसमें विषैले पदार्थ जैसे मैथिल ऐल्कोहल पिरिडिन मिला देते है।  इसे विकृत एल्कोहल कहते है।

ईथर का नामकरण , बनाने की विधियाँ , भौतिक गुण , रासायनिक गुण

ईथर का नामकरण :

CH3-CH2-O-CH2-CH2-CH3     (1-ethoxy propane)

CH3-CH2-O-C6H5    (ethoxy benzene) (फेनिटोल)

C6H5-O-CH2-CH2-CH2-CH2-CH2-CH2-CH2    (1-phenoxy heptane)

ईथर बनाने की विधियाँ :

1.     जब एथिल एल्कोहल की क्रिया सान्द्र H2SOके साथ 413k ताप पर की जाती है।  डाई एथिल ईथर बनता है।

क्रियाविधि :

यह क्रिया SN2 क्रियाविधि से होती है।

कमियाँ :

इस विधि द्वारा सम्मित ईथर ही बनाये जा सकते है , असममित ईथर नहीं , क्योंकि असममित ईथर के साथ साथ अन्य ईथर भी बनते है जिससे इनका पृथक्करण आसानी से नहीं होता।

उपरोक्त क्रिया में 20 अथवा 30 एल्कोहल लेने पर मुख्य पदार्थ एल्कीन बनता है की ईथर।

क्योंकि 30 एल्कोहल में प्रतिस्थापन अभिक्रिया की तुलना में विलोपन अभिक्रिया सुगमता से होती है (30 कार्बोकैटायन के अधिक स्थायित्व के कारण )

विलियम सन संश्लेषण :

जब सोडियम एल्कोहल की क्रिया एल्किल हैलाइड से की जाती है तो ईथर बनते है।

R-ONa + X-R’  →  NaX + R-OR

नोट : इस विधि द्वारा सममित असममित ईथर बनाई जा सकती है।

C2H5-ONa + X-C2H5 → NaX + 2C2H5O

C2H5-ONa + X-CH3 → NaX + C2H5-O-CH3

नोट : एनिसोल का निर्माण निम्न प्रकार से होता है।

C6H5-O-Na + X-CH3 → C6H5-O-CH3 + NaX

CH3-ONa + X-C6H5 → CH3-O-C6H5 + NaX

द्वितीय क्रिया संभव नहीं है क्योंकि हैलोबेंजीन अनुनाद के कारण C-X के मध्य द्विबंध जाते है जिससे बंध अधिक मजबूत हो जाता है।

नोट : तृतीयक हैलाइड की क्रिया सोडियम ऐथाऑक्साइड से करने पर मुख्य पदार्थ एल्कीन बनती है।

व्याख्या :

ऐथाऑक्साइड आयन नाभिक स्नेही के साथ साथ एक प्रबल क्षार भी है।  जो 30 कार्बोकैटायन में से प्रोटॉन बाहर निकाल देता है जिससे मुख्य पदार्थ एल्कीन बनता है।

भौतिक गुण :

1.     डाई मेथिल तथा डाइएथिन गैसीय अवस्था में जबकि अधिक कार्बन वाले ईथर द्रव अवस्था में होते है।

2.     कम कार्बन वाले ईथर जल के साथ हाइड्रोजन बंध बना लेते है इसलिए जल में विलेय हो जाते है।

3.     ईथर में C-O-C बंध कोण 11107’ मिनट होता है जो की चतुष्फलकीय कोण 109028मिनट से अधिक हो क्योंकि ईथर में दो एल्किल समूह में मध्य पारस्परिक प्रतिकर्षण होता है।

4.     एनिसोल में अनुनाद के कारण C-O bond की बंध लम्बाई कम होती है।

रासायनिक गुण :

H-X से क्रिया :

ईथर की क्रिया H-X से करने पर एल्कोहल एल्किल हैलाइड बनते है।

R-O-R + HX → R-OH + RX

C2H5-O-C2H5 + HI → C2H5-OH + C2H5-I

नोट : असममित ईथर की क्रिया H-X से करने पर हैलोजन परमाणु उस एल्किल समूह से जुड़ता है जिसमे कार्बन कम होते है।

C2H5-O-CH3 + HI → C2H5-OH + CH3-I

नोटजब ईथर में ऑक्सीजन से बेंजीन वलय जुडी हो तो फिनॉल अवश्य बनती है।

C6H5-O-CH3 + HI → C6H5-OH + CH3-I

CH3-O-C6H5 + HI → XXXXX

द्वितीय क्रिया सम्भव नहीं है क्योंकि अनुनाद के कारण C6H5-O बंध में द्विबंध गुण जाते है जिससे बंध अधिक मजबूत हो जाता है।

नोट : यदि ईथर में ऑक्सीजन से तृतीय एल्किल समूह जुड़ा हो तो 30 हैलाइड अवश्य बनते है।

प्रश्न : एनिसोल में इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया O P पर होती है क्यों ?

उत्तर : ऐनिसोल में +R प्रभाव के कारण O P पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक होता है जिससे electron स्नेही (+E) O P पर प्रहार करता है।

 

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